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समान नागरिक संहिता विधेयक के प्रारूप को मंत्रि-परिषद की मंजूरी, मुख्यमंत्री बोले- यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश करने पूरी तरह तैयार
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर इसे पास कराने की तैयारी कर चुकी मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रि-परिषद ने रविवार को यूसीसी विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी। सोमवार से शुरू होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार विधेयक प्रस्तुत कर इसे सदन में सर्वसम्मति से पास कराने की तैयारी कर चुकी है।
रविवार को राजधानी भोपाल के जगदीशपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में समान नागरिक संहिता विधेयक सहित अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं मीडिया से चर्चा कर मंत्रि-परिषद के निर्णयों की जानकारी दी। मुख्यमंंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है। इसी भावना के अनुरूप सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि देश में उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है, जबकि गुजरात और असम में यूसीसी विधेयक पारित हो चुका है।
3.49 करोड़ एसएमएस भेजे, 94 प्रतिशत से मिला समर्थन
मुख्यमंत्री ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसमें शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया। समिति ने प्रचलित कानूनों का विस्तृत अध्ययन करने के साथ-साथ प्रदेशभर में जन-परामर्श बैठकें आयोजित कर विभिन्न वर्गों से सुझाव प्राप्त किए। इसी प्रकार जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल भी तैयार किया गया। इसके अतिरिक्त 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए। प्रदेशभर के 10 लाख से अधिक लोगों ने सुझाव और प्रतिक्रियाएं साझा कीं। जिला एवं राज्य स्तर पर 50 जन-परामर्श बैठकें हुईं, जिनसे 1,134 से अधिक सुझाव मिले। व्यापक जनसंवाद के दौरान लगभग 94 प्रतिशत लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार समान अवसर, समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। आज का यह निर्णय उसी जनभागीदारी और संकल्प का प्रतिफल है।
हिन्दू-मुस्लिम को राजनीतिक चश्मे से देखती है कांग्रेस
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर हमने सभी राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे जिसमें आप पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि नहीं आए। कांग्रेस पार्टी हिंदू, मुस्लिम को राजनीतिक चश्मे से देखती है। उन्हें एक देश, एक निशान,एक प्रधान पर हमेशा दुविधा रहती है। जब हमने सबके सुझाव मांगे तो 80 प्रतिशत मुस्लिम बहनों ने इसके पक्ष में अपनी अपनी बात कही। डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने संकल्प लिया है कि ऐसा कानून लागू किया जाए, जिसमें राम, रहीम, रवींद्र और रॉबिन सभी को समान अधिकार और समान न्याय मिले। जो अब साकार होने जा रहा है।
समान नागरिक संहिता के लिए सरकार संकल्पित
डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 के विकसित भारत के लिए एक उद्घोष वाक्य दिया है। जो सबकी जुबान पर चढ़ा है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास । इस मंत्र की धारणा सबको अपना अधिकार दिलाने की है। सबके लिए समान कानून हो । संविधान के अनुच्छेद 14 और 44 में समान नागरिक संहिता और सामान नागरिक अधिकार का मार्ग प्रशस्त करती है।
मानसून सत्र में पेश करेंगे महत्वपूर्ण विधेयक
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मध्यप्रदेश के इतिहास का एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम दिन है। मंत्रिपरिषद ने आज समान नागरिक संहिता, 2026 विधेयक को अनुमोदित किया है। कल से प्रारंभ हो रहे विधानसभा सत्र में इस विधेयक सहित अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए सदन के पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा।
कानून से बाहर रहेगा जनजातीय समाज
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजातीय समाज को मुक्त रखते हुए सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव मंत्रि-परिषद में पास हुआ है। इसे विधानसभा में रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी दी जानकारी
- 71 अस्पतालों के उन्नयन के प्रस्ताव भी पारित हुए हैं। चिकित्सा, इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए भी हमारी सरकार काम कर रही है। हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए सांदीपनि विद्यालय भी खोल रहे हैं।
- डेयरी, दुग्ध उत्पादन, गौसंवर्धन एवं बकरी पालन से संबंधित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा।
- झाबुआ में 760 से अधिक तालाबों एवं जलाशयों के माध्यम से 3,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।
- जगदीशपुर का इतिहास गौरवशाली और अमिट है, लेकिन इसे जानबूझकर इतिहास के पन्नों से धूमिल करने का प्रयास किया गया। भोपाल अंचल की यह धरती वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्र गौरव की प्रतीक रही है। इसी गौरवशाली विरासत से भावी पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से हमने यहां मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की।
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