राजधानी

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मप्र में यूसीसी विधेयक बहुमत से पारित, ओबीसी आरक्षण पर नारेबाजी कर हंगामा करता रहा विपक्ष, चर्चा में नहीं हुआ शामिल

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भोपाल। मध्य प्रदेश विधान सभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक बहुमत से पास हो गया।  मानसून सत्र के दूसरे दिन यूसीसी विधेयक पर चर्चा शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विधायक आरिफ मसूद और आरिफ अकील यूसीसी के विरोध में जबकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य कांग्रेस विधायक 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर सदन में हंगामा और नारेबाजी करते रहे। इस हंगामे के बीच सत्तापक्ष के कुछ विधायकों ने यूसीसी के पक्ष में बात रखी, दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी और अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संबोधन के साथ ही बहुमत के आधार पर इसे सदन में पास कर दिया गया। 

एमपी विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक पास हो गया है। सदन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि आज स्वर्णिम दिन है। हिंदू मुसलमान सभी के लिए एक कानून लेकर आए हैं। विधानसभा में एक स्वर्ण अध्याय लिखा गया है। भगवान के विधान में सब एक है, मनुष्य की नीति भी एक जैसी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि गुलामी के दौरान कांग्रेस पार्टी ने देश की संप्रभुता से समझौता किया।

राज्यपाल की अनुमति के बाद लागू होगा कानून 

विधानसभा से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद इसका राजपत्र (गजट) में अधिसूचना का प्रकाशन होगा। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही मप्र में समान नागरिक संहिता कानून लागू हो जाएगा। राज्य सरकार इसे सप्ताहभर में लागू कर सकती है। 

यूसीसी लागू होने पर क्या होंगे प्रमुख बदलाव 

विवाह और तलाक: सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा। मप्र में एक समय में केवल एक ही विवाह मान्य होगा और बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन पर सजा और अर्थदण्ड का प्रावधान। 

कुप्रथाओं पर लगेगी रोक: यूसीसी कानून में तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी कुप्रथाओं को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। ऐसा करने अथवा कराने वाला, प्रेरित करने वाला दंडित होगा। 

लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को एक महीने के भीतर उसका पंजीकरण कराना जरूरी होगा, ऐसा न करने पर सजा का प्रावधान है। आयु सीमा 18 वर्ष से कम होने पर माता-पिता, अभिभावक को सूचना देना अनिवार्य होगा। 

उत्तराधिकार और अधिकार : सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा और माता-पिता व बच्चों को समान उत्तराधिकार के अधिकार दिए गए हैं। 

अनुसूचित जनजातियों को छूट:  अनुसूचित जातियों (संविधान के तहत संरक्षित) और विशिष्ट जनजातीय समुदायों को यूसीसी कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। वे अपनी संस्कृति-परंपराओं का पालन कर सकेंगे।

मप्र में नहीं होगा अब मजहबी तौलकांटा: मुख्यमंत्री  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राम से रहीम तक, रविंदर से रॉबिन तक अमर से एंथोनी और अकबर तक देश एक संविधान से चले। आज के बाद मध्यप्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी। असम, गुजरात और उत्तराखंड के बाद मध्यप्रदेश चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि अब मध्यप्रदेश में अलग-अलग मजहबी तौल कांटा नहीं होगा। सब एक ही बांट से तौले जाएंगे। विपक्ष बताएं हम अपने दो बेटों को अलग-अलग दृष्टिकोण से क्यों देखते हैं?

7765 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, चर्चा आज 

राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट मंगलवार को विधानसभा में पेश कर दिया। बजट मांगों पर चर्चा बुधवार को होगी। कुल 7,765.76 करोड़ रुपए के इस अनुपूकर बजट में सबसे अधिक 3,000 करोड़ रुपए नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए प्रावधानित हैं। यह राशि विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण के भुगतान पर खर्च होगी। अनुपूरक बजट में राजस्व मद में 907.59 करोड़ रुपए और पूंजीगत मद में 6,858.18 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपए तथा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण के लिए 58.07 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। वहीं गृह विभाग में अंतर-संचालित अपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) के लिए 98.83 करोड़ रुपए और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपए रखे गए हैं। राजस्व विभाग को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) से प्राप्त राशि के हस्तांतरण के लिए 397.54 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

इन विभागों और मदों में प्रावधानित राशि  

कृषि विभाग- भावांतर एवं फ्लैट रेट योजना के लिए 313.18 करोड़, कपास प्रोत्साहन के लिए 39.51 करोड़

खाद्य विभाग- उपार्जन संस्थाओं को ऋण के लिए 2220.62 करोड़

लोक निर्माण- सडक़, पुल, बीओटी परियोजनाएं 1300 करोड़

उच्च शिक्षा- पीएम-ऊषा योजना 50 करोड़

पर्यटन विभाग- पर्यटन नीति क्रियान्वयन 30 करोड़

नगरीय विकास- पीएम ई-बस योजना 21.41 करोड़

जल संसाधन- डिक्रीधन भुगतान- 10 करोड़

धुमंतु-अर्धघुमंतु- विशेष योजनाएं 6.02 करोड़

लोक सेवा प्रबंधन- अटल सुशासन संस्थान 25 करोड़