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विपक्ष के हंगामे के बीच सदन में पांच विधेयक पारित, दिल्ली में कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का मप्र विधानसभा में काली पट्टी बांधकर विरोध
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भोपाल। नीट विवाद में प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन के चलते मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित अन्य कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में विधानसभा सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन किया। काली पट्टी बांधकर पहुंचे कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे पर सदन में भी हंगामा किया। हालांकि इस बीच सरकार ने सदन में चर्चा के बाद तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करा लिया।
मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन पहले प्रश्नकाल शुरू होते ही और प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नीट मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी मामले में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। मंत्री राकेश सिंह ने इसे मप्र के बाहर का मामला होने के कारण इस पर चर्चा नहीं कराने की बात कही। अध्यक्ष द्वारा स्थगन का प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्षी विधायकों ने आसंदी के पास पहुंचकर नारेबाजी की। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रस्तुत विधेयकों पर चर्चा शुरू हुई। हंगामे के बीच सरकार ने पांच महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करा लिया।
बुधवार को सदन में पास हुए यह विधेयक
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) संशोधन विधेयक
- मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
- मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026
- मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक- 2026
- मध्य प्रदेश निरसन विधायक 2026
संशोधन विधेयकों से यह होगा बदलाव
मप्र निजी विश्वविद्यालय (स्थाना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार उच्च शिक्षा में निवेश और नए संस्थान खोलने की प्रक्रिया को सरल और सस्ता किया गया है। विश्वविद्यालय खोलने के लिए कम से कम 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये बंदोबस्ती कोष राशि की एफडी की अनिवार्य शर्त समाप्त समाप्त की गई है। बहुमंजिला परिसरों में विवि खुल सकेंगे तथा छोटे निवेशक भी विश्वविद्यालय/महाविद्यालय शुरू कर सकेंगे। संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि इस निर्णय से विश्वविद्यालय की गुणवत्ता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा बल्कि प्रदेश में नए विश्वविद्यालय खुल सकेंगे।
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 : ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री सस्ती और सरल होगी। राज्य सरकार को ग्रामीण इलाकों में जमीन, मकान व अन्य संपत्तियों की खरीद पर लगने वाले अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क को कम अथवा पूरी तरह माफ करने का कानूनी अधिकार होगा। मूल अधिनियम की धारा 75 में संशोधन कर सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह नोटिफिकेशन जारी करके अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क हटा सके। इससे भविष्य में महिलाओं के नाम पर होने वाले अचल संपत्तियों के पंजीयन, सरकार की योजनाओं के हितग्राहियों के पक्के मकानों की रजिस्ट्री, और ग्रामीण क्षेत्रों में स्टार्टअप या नए उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को स्टाम्प ड्यूटी में राहत मिल सकती है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक 2026: केन्द्र सरकार द्वारा पारित इस कानून में वर्तमान में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85, 181 और 296 के अधीन अपराध शमनीय नहीं है। लम्बी मुकद्दमेबाजी और न्यायालयों में बढ़ते प्रकरणों के भार को कम करने के उद्देश्य से इन धाराओं के अधीन अपराधों को शमनीय बनाया गया है। अर्थात पीडि़त और आरोपी पक्ष आपसी सहमति या समझौते से ऐसे प्रकरणों को न्यायालय के बाहर भी सुलझा सकेंगे। कई छोटे अपराधों को शमनीय होने से दोनों ही पक्षकारों को प्रकरणों को निपटाने में आसानी होगी और न्यायालयों में लंबित वादों की संख्या भी कम हो सकेगी। महिला के साथ पति या नातेदार द्वारा की गई क्रूरता के प्रकरण में एफआईआर के छह माह के बाद शमन महिला के हित में हाने की स्थिति में न्यायालय आवेदन स्वीकार कर सकेगा। बलवा और अश्लील कार्य या अश्लल शब्दों के प्रयोग जैसे प्रकरणों में भी संशोधन किया गया है।
मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026: राज्य में जीएसटी से जुड़े कर निर्धारण, मूल्यांकन के तरीकों और अनुपालन प्रक्रिया को जीएसटी परिषद की सिफारिशों के अनुरूप अद्यतन व सरल बनाने के लिए लाया गया एक विधायी प्रस्ताव है। इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य केंद्रीय और राज्य के कर कानूनों के बीच एकरूपता लाना, विनिर्दिष्ट वस्तुओं के मूल्य निर्धारण को आसान बनाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुधारना।
मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, 2026: राज्य में पुराने, अप्रचलित और अनुोपयोगी हो चुके कानूनों को समाप्त (निरसन) करने के उद्देश्य से यह विधायी संशोधन प्रस्ताव है। जुलाई 2026 में इसे मंत्री-परिषद से अनुमोदन मिला था। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे पुराने और व्यर्थ कानूनों को पहचान कर खत्म करना जिनकी आज के समय में कोई प्रासंगिकता नहीं बची है। साथ ही शासन प्रणाली को सरल बनाना और कानूनों के अनावश्यक बोझ को कम करना है।
महीने भर में होगा केन-बेतवा से संबंधित शिकायतों का निराकरण
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी का मुददा उठाया। उन्होंने कहा कि इसमें करोड़ों का घोटाला हुआ है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने उत्तर में आरोपों को गलत बताया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कुछ विसंगति हुई है अथवा शिकायत है तो जांच कराकर न्याय करेंगे। अपनी सरकार में किसी को कोई कष्ट होगा, ऐसा नहीं चलेगा। आप भी नहीं चाहेंगे, किसानों को उनके हक का पैसा जरूर मिलेगा। सिंघार ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए बांध का काम चालू होने तथा मुआवजा में गड़बड़ी की जांच की समय सीमा जाननी चाही। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक महीने में इसका निराकरण कर देंगे। अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि केन-बेतवा बड़ा प्रोजक्ट है। यह बहुत लम्बे कालखंड से चल रहा है। उमंग जी की जानकारी सही है तो किसी भी प्रोजक्ट में 80 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण होने पर प्रोजक्ट का काम शुरू हो सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री को सर्वाधिकार हैं।
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