राजधानी
आंदोलन खत्म फिर भी उलझन में किसान नेता, 60 प्रतिशत मूंग से नहीं बन पा रहा 3 बोरे का हिसाब
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भोपाल। समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत मूंग की खरीदी एवं खाद को लेकर टोकन व्यवस्था समाप्त किए जाने की मांग को लेकर हरदा से भोपाल तक पहुंचा किसान आंदोलन बुधवार को सरकार के साथ चर्चा के बाद समाप्त हो गया। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व करने वाले किसान नेता किसान से खरीदी जाने वाली मूंग की मात्रा को लेकर अब भी उलझन में हैं। 60 प्रतिशत मूंग खरीदी के आंकड़े में उलझे किसान नेता अब प्रति एकड़ तीन बोरे खरीदे जाने की मांग को लेकर अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि राजधानी भोपाल में किसान आंदोलन के बीच बुधवार रात मंत्रियों की समिति और अधिकारियों के साथ 16 किसान संगठनों के नेताओं के साथ बैठक हुई थी। बैठक में किसान नेताओं ने पहले शत-प्रतिशत और फिर 4 बोरे प्रति एकड़ के हिसाब से किसान की मंूग खरीदे जाने की मांग रखी। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह किसान के कुल रकबे में उत्पादित कुल मूंग की 60 प्रतिशत से अधिक खरीदी नहीं कर सकेगी। लेकिन प्रतिशत के फेर से बचते हुए किसान नेताओं ने बोरे की संख्या के हिसाब से खरीदी की मांग की। साढ़े तीन बोरे प्रति एकड़ पर भी सहमति नहीं बनी और आखिर जब किसान वापस लौटने लगे और मंत्री विश्वास सारंग ने उनसे एक बार फिर आग्रह किया तो किसान नेता 3 बोरे प्रति एकड़ पर सहमत हो गए। अब किसानों का कहना है कि 60 प्रतिशत के अनुपात में मूंग की मात्रा कुल 2 क्विंटल 88 किलो ही आ रही है। सरकार मंूग खरीदी 50 किलो के बोरे में करती है, इससे कम बची मात्रा सरकार नहीं रखीदेगी। इस तरह खरीदी का आंकड़ा लगभग ढाई क्विंटल प्रति एकड़ तक ही पहुंच रहा है। वहीं खाद की टोकन व्यवस्था को भी सरकार ने अस्थायी रूप से बंद किया है, कमियों को दूर करने के बाद इसे फिर से चालू करने की बात कही है।
अब अधिकारी नहीं उठा रहे फोन
किसान नेताओं का कहना है कि मंत्री विश्वास सारंग के साथ आखिरी बार चर्चा में 3 बोरा प्रति एकड़ पर सहमति बनी थी। अब सरकार 60 प्रतिशत के हिसाब से नहीं, बल्कि बोरे के अनुपात में मंूग खरीदे। वे अधिकारियों से चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन उनके फोन नहीं उठ रहे हैं। मंत्रियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। किसान नेता अब बातचीत से ही समाधान निकालने की बात कह रहे हैं।
‘मंत्रियों की समिति और अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद सभी किसान संगठन 3 क्विंटल प्रति एकड़ के अनुपात में मूंग खरीदी पर राजी हो गए थे। 60 प्रतिशत के हिसाब से यह मात्रा 2 क्विंटल 88 किलो ही आ रही है। किसान बोरे का हिसाब समझता है। इसलिए अधिकारियों से इस पर फायनल चर्चा करेंगे।’
संतोष पटवारे
प्रदेश उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन, मप्र
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