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सहकारिता से जोड़े तीन लाख नए किसान, 4524 नई पेक्स संस्थाएं बनीं, अपेक्स के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव ने किसान हित में तीन माह में किए 25 जिलों के प्रवास
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भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स) बैंक के प्रशासक महेन्द्र ङ्क्षसह यादव को इस पद पर 3 माह का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस अवधि में किसानों को सहकारिता से जोडऩे, उनमें विश्वास जगाने तथा धरातल पर फलीभूत करने की दिशा में वे कितने सफल हुए हैं। सवालों पर क्या बोले महेन्द्र सिंह यादव-
सहकारिता में गड़बडिय़ां, भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार उजागर सामने आती हैं, इस दिशा में क्या किया?
यादव- मध्यप्रदेश में पेक्स से अपेक्स तक पूरा सिस्टम का कम्प्युटरीकरण हो चुका है। लगभग सभी जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध हैं। अब गड़बड़ी की संभावना शून्य हो चुकी है। इस पारदर्शी व्यवस्था के लिए अपेक्स मप्र को देश में प्रथम पुरस्कार मिला है। जिलों व संभागों में प्रबंधक निदेशकों एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर नई सदस्यता के प्रयास किए गए। परिणाम स्वरूप मप्र में 4524 नई पेक्स समितियों का गठन हो चुका है और यह प्रयास आगे भी जारी हैं।
प्रशासक के नाते पेक्स से अपेक्स तक सुधार और विस्तार के लिए आपने प्रयास किए?
यादव : अपेक्स के प्रशासक के नाते मैंने तीन महीनों में सभी 10 संभागों में और 25 जिलों में प्रवास किए हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। इन प्रवासों के दौरान सोसायटी की गतिविधियों, खाद वितरण व्यवस्था को ठीक करने सहित अन्य कामों की समीक्षा की जाती है। सुधार के लिए निर्देश दिए जाते हैं? समीक्षा के केन्द्र में किसान होता है। प्रयास यही होता है कि किस तरह किसान तक सरकार की योजनाएं पहुंचेंं और उन्हें सहकारिता के माध्यम से समृद्ध किया जाए। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत की दर पर 3 लाख रुपये तक का ऋण, 10 गांवों के बीच एक पेक्स सोसायटी गठित की जाती है, अब तक 4524 पेक्स गठित की गई हैं, जिससे अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाया जा सके।
पेक्स की समृद्धि और किसान हित में अपेक्स के क्या प्रयास?
यादव : प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पेक्स) संस्थाओं के माध्यम से सिर्फ किसानों को कम अथवा शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, खाद-बीज वितरण और फसलों की खरीदी जैसे काम ही नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि अब पेक्स सोसायटियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का काम भी सौंपा जा रहा है। सामाजिक सहभागिता से पेक्स संस्थाएं पौधरोपण भी कर रही हैं। प्रधानमंत्री के आह्वान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अंतर्गत मप्र में पेक्स संस्थाओं ने एक लाख पौधे रोपे। तय किया गया है कि माह के अंतिम रविवार को जिला सहकारी बैंक के अधिकारी किसानों के साथ बैठकर प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनेंगे।
‘अपेक्स’ प्रशासक के नाते आपकी भावी कार्योजना क्या है?
यादव : सहकारिता की योजनाओं को किसानों में निचले स्तर तक ले जाना है। ‘किसान कल्याण वर्ष’ चल रहा है। इस वर्ष बलराम जयंती को ‘बलराम उत्सव’ के रूप में बनाएंगे। प्रदेशभर में महोत्सव होंगे। इस दौरान किसानों की समस्याओं का अध्ययन कर उसका निराकरण कर लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। ‘सहकारिता से समृद्धि’ की मूल भावना के साथ प्रदेश की पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने की कार्यवाही जारी है।
सरकार के पास मांग से ज्यादा खाद-बीज, फिर भी किसान परेशान क्यों है?
यादव : हमारा प्रयास है कि किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो सके। सर्वर में खराबी के चलते किसानों को परेशानी जरूर होती है। क्योंकि ज्यादातर किसान इतना पढ़ा-लिखा भी नहीं है। रात 12 बजे तक सर्वर का इंतजार करेगा तो वह काम पर कम जाएगा। कई सोसायटी और कुछ समृद्ध और दबंग लोग ट्रॉलियां भरकर खाद ले जाते थे। इसीलिए व्यवस्था को पारदर्शी और छोटे किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए ही टोकन व्यवस्था शुरू की थी। हालांकि यह व्यवस्था मार्कफेड और नान जैसी संस्थाओं के माध्यम से होता है। बदनाम सहकारिता होती है। मुख्यमंत्री ने ऋण वापसी की व्यवस्था में बदलाव करके भी किसान को राहत दी है।
3 माह में अपेक्स के प्रयास और उपलब्धियां यह भी-
- मप्र के सहकारी साख आंदोलन को मप्र राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स) अपनी शाखाओं एवं जिला स्तर पर जिला बैंकों तथा ग्राम स्तर पर पेक्स के माध्यम से कृषि एवं सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों हेतु जन कल्याण के निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
- अपेक्स के माध्यम से फसल ऋण एवं कृषि आदानों के साथ-साथ पीडीएस उपभोक्ता सामगी जैसे कैरोसिन, खाद्यान बांटा जा रहा है। फसलों के उचित मूल्य हेतु उपार्जन का कार्य भी किया जा रहा है।
- वर्ष 2024-25 में 21493 करोड़ का फसल ऋण वितरण किया गया जो पिछले वर्ष की तुलना में 1546 करोड़ अधिक है। वर्ष 25-26 में 11 जुर्ला तक पैक्स के माध्यम से किसानों को 7.47 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद वितरित किया जा चुका है।
- वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर 3475 केन्द्रों के माध्यम से 14 जुलाई 2025 तक 77.74 लाख मी.टन गेहँू एवं वर्ष 2024-25 में कुल 1368 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 45.53 लाख मीट्रिक टन धन खरीदी की गई।
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