मध्यप्रदेश

Image Alt Text

जनता की सुविधा नहीं, मोटी कमाई पर फोकस, निजी बस संचालकों के कारण अटकी मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा

मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटरसिटी और अंतर्राज्यीय स्तर पर यात्रियों को सस्ती, सुलभ और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रस्तावित मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा धरातल पर नहीं उतर पा रही है। राज्य सरकार द्वारा एक दिन पहले ही यात्री बसों के किराए की राशि में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी की है। फिर भी निजी बस संचालक संतुष्ट नहीं हैं और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा जैसी यात्री हित की महत्वाकांक्षी योजना के विरोध में अड़ गए हैं। बस यात्रियों की मानें तो निजी बस संचालक सुविधाओं के नाम पर तो उनके साथ ठगी करते ही हैं। कई बार निर्धारित दर से अधिक किराया भी वसूलते हैं। 

सरकार की योजना से अधिकारों का हनन कैसे?

शहरों और राज्यों के बीच मप्र सरकार की सुगम बस परिवहन सेवा शुरू न हो सके, इसके विरोध में प्रदेशभर के निजी बस संचालक एकजुट हो गए हैं। विगत 7 जुलाई को प्रदेश के 40 प्रमुख बस मार्गों पर संचालन का एकाधिकार ‘मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ को देने के संबंध में अधिसूचना प्रकाशित हुई थी, जिसमें आम जनता और ऑपरेटरों से आपत्तियां मांगी गई थीं। जुलाई और अगस्त महीने से चरणबद्ध तरीके से योजना प्रदेशभर में लागू होना थी। प्रक्रिया आगे बढ़ती इससे पहले ही निजी स्टेट कैरेज बस ऑपरेटर धर्मेन्द्र सिंह की ओर से 40 प्रमुख बस मार्गों पर एकाधिकार के विरोध में इसे निजी बस संचालकों के अधिकारों का हनन बताते हुए ग्वालियर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। सप्ताहभर पहले उच्च न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी। इस प्रकरण में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होनी है। 

सरकार को सिटी बसों तक सीमित रखना चाहते हैं बस संचालक    

मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा में बसें तो निजी बस संचालकों की ही होंगी, लेकिन संचालन के नियम, मार्ग निर्धारण, सुरक्षा और संचालन पर सरकार की नजर होगी। निजी बस संचालक चाहते हैं कि सुगम सेवा की बसों का संचालन सिर्फ शहरों के भीतर सिटी बस के रूप में हो होता रहे। इंटरसिटी और इंटर स्टेट संचालन में सरकार का किसी तरह का हस्तक्षेप न हो। वे सरकार के परमिट पर निजी बसों का अपने हिसाब से संचालन के पक्ष में हैं। मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा की बसों में यात्री सुविधा, सुरक्षा और नियमों की बाध्यता होगी और टिकट राशि को लेकर भी पूरी तरह पारदर्शिता होगी।  

सुगम के माध्यम से क्या चाहती है सरकार 

सरकार निजी बस संचालकों के सहयोग से पारदर्शी व्यवस्था में बसों का संचालन कराना चाहती है। इस पूरे नेटवर्क की निगरानी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय कंपनी ‘मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ करेगी। योजना में सात सहायक क्षेत्रीय परिवहन कंपनियां अपने-अपने संभाग में बस संचालन, मार्ग निर्धारण और यात्री सुविधाओं का प्रबंधन करेंगी। यातायात सर्वे के आधार पर नए मार्ग तय किए जाएंगे और पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस स्टैंड, डिपो तथा बस स्टॉप विकसित किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे यात्रियों को समयबद्ध, सुरक्षित और किफायती बस सेवा उपलब्ध होगी।

परमिट और बसों के संचालन के लिए समिति गठित 

मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा के लिए परिवहन विभाग ने आठ सदस्यीय समिति गठित कर दी है, जो इस सेवा के तहत प्रस्तावित बसों के परमिट जारी करने, निजी बस संचालकों की सहभागिता और बस संचालन से जुड़े अहम मुद्दों पर एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति का गठन उस समय किया गया है, जब नई बस सेवा को लेकर निजी बस संचालक लगातार विरोध जता रहे हैं। समिति में विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों और मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के चार प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति का सबसे प्रमुख काम योजना के तहत प्रस्तावित बस संचालन व्यवस्था का परीक्षण करना और यह सुझाव देना होगा कि वर्तमान निजी बस संचालकों का समायोजन या सहभागिता किस प्रकार सुनिश्चित की जाए।