शाम को कारीगर आते है, सुबह ऑटो वाले
ठेकेदार की किचिन से सटे और सामने वाला पड़ोसी भी यह नहीं बता सका कि यहां भोजन कौन और किसके लिए बनवाता है। पड़ोसी यह भी नहीं बता सके कि जिस मकान में अवैध रसोई चल रही है, उसका नाम और पता क्या है? सिर्फ इतना ही बताया कि किसी मुस्लिम का मकान है। पड़ोसियों ने बताया कि शाम को यहां हलवाई आता है, रात 8 बजे से भट्टी चालू होती है और सुबह खाना बनाकर चला जाता है। सुबह करीब आधा दर्जन ऑटो आती हैं, जिनमें रखकर भोजन रवाना किया जाता है।
प्लास्टिक के ड्रमों में रखा जा रहा गर्म भोजनवीरपुर क्षेत्र में आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए भोजन एल्यूमिनियम के बर्तनों में बनाया जाता है। लेकिन आधी रात में तैयार होने के बाद इस गर्म दलिया, खिचड़ी और सब्जी को सुबह सप्लाई तक प्लास्टिक के गंदे ड्रमों में भर दिया जाता है। प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म भोजन रखने से कितने ही खतरनाक रसायन मिलते होंगे, जो मासूमों को गंभीर बीमारियां दे सकते हैं। लेकिन ठेकेदारों से प्रभावित विभाग के अधिकारियों के पास न निरीक्षण का समय है और न ही इच्छा शक्ति।
15 किमी दूर की आंगनबाडिय़ों में पहुंचता है भोजनवीरपुर बांध क्षेत्र में रातभर तैयार हुआ भोजन ठेकेदार सुबह 15 किमी दूर उप नगर ग्वालियर में किलागेट, कांचमील, गोला का मंदिर आदि क्षेत्रों की बस्तियों में पहुंचाता है। सूत्रों के अनुसार दर्जनभर समूहों की जिम्मेदारी संभाले इस ठेकेदार की भोजन सप्लाई परियोजना शहरी क्रमांक 1 व 2 की आंगनबाडिय़ों पर है। रातभर बना बासा भोजन और खराब गुणवत्ता बच्चों को कितना पोषित करेगी, अनुमान लगाया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती उपासना राय गड़बडिय़ों पर मौन हैं। सहायक संचालक राहुल पाठक डीपीओ को जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। सवाल उठता है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से क्या मासूमों का पोषण लूटा जाता रहेगा? क्या कुपोषण के खिलाफ शासन की योजनाएं इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी?
खुले में पड़े हैं टीएचआर के दलिया पैकेटआंगनबाडिय़ों पर नाश्ता और भोजन के अलावा बच्चों, धात्री और गर्भवती महिलाओं को दिया जाने वाला पूरक पोषण आहार (टीएचआर) सप्लाई का काम भी सरकार ने फिलहाल इन्हीं स्व-सहायता समूहों को दे रखा है, जिन्हें ठेकेदार चला रहे हैं। वीरपुर बांध स्थित ठेकेदार की रसोई के पिछले हिस्से में इस पूरक पोषण आहार के सैकड़ों पैकेट खुले में पड़े हैं, जहां जहां कीड़े-मकोड़े, चूहे-छिपकली घूमते देखे जा सकते हैं।