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जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे परिजन!
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छापे से जमानत तक संदिग्ध नजर आई लोकायुक्त की कार्रवाई, ईडी के शिकंजे में बुरे फंसे सौरभ और साथी
भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके दोनों साथी शरद जायसवाल और चेतन गौर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज प्रकरण में बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं। छापों के बाद फरारी और गिरफ्तारी से पहले बनाई गई योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है। जिला न्यायालय, भोपाल के बाद जबलपुर उच्च न्यायालय से भी तीनों को जमानत मिल पाना आसान नहीं है। लेकिन जमानत को लेकर उच्च न्यायालय का निर्णय आने से पहले ही परिजनों ने सर्वोच्च न्यायालय से जमानत की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त टीम द्वारा 19 दिसम्बर 2024 को सौरभ और चेतन के भोपाल स्थित दो ठिकानों पर मारे गए छापों में मिली करीब 8 करोड़ की संपत्ति मामले में विशेष न्यायालय (लोकायुक्त), भोपाल से तीनों को जमानत मिल चुकी है। लेकिन पहले ही दिन आयकर टीम द्वारा बरामद 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकदी के चलते प्रकरण में शामिल हुई ईडी टीम ने प्रकरण दर्ज किया तो तीनों ही न केवल फंसते चले गए बल्कि इन तीनों आरोपियों के अलावा उनके परिजन, दोस्त और रिस्तेदार भी इसलिए आरोपी बन गए क्योंकि काली कमाई से उनके नाम पर भी संपत्तियां खरीदी गई और जिन अलग-अलग कंपनियों, फार्मों और संस्थाओं के नाम से संचालित अलग-अलग कारोबार में कालाधन लगाया गया, उनमें यह सभी चेयरमैन, डायरेक्टर जैसे पदों पर हैं। लोकायुक्त टीम तीनों के अलावा शेष आरोपियों को क्लीनचिट दे चुकी है। लेकिन ईडी ने इस मामले में कुल 12 आरोपी बनाए हैं, जिसमें से सौरभ की माँ श्रीमती उमा शर्मा, पत्नी श्रीमती दिव्या तिवारी, साला रोहित और मौसेरे जीजा विनय हासवानी को विशेष न्यायालय (प्रवर्तन निदेशालय) से जमानत मिल चुकी है। हालांकि तीनों मुख्य आरोपियों सौरभ, चेतन और शरद जायसवाल की जमानत जिला न्यायालय भोपाल से निरस्त हो चुकी है। जबकि तीन दिन पहले शरद जायसवाल की जमानत याचिका को भी उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया, जो इस आग्रह के साथ लगाई गई थी कि उसके नवजात जुड़वां बच्चों की देखरेख के लिए उसे जमानत दी जाए।
लोकायुक्त छुपाए रही अचल संपत्तियों की कीमत
सौरभ शर्मा एवं उसके साथियों पर लोकायुक्त टीम की कार्रवाई शुरू से ही संदेह के घेरे में नजर आई है। छापे की कार्रवाई के बीच से सोना और नकदी से भरी कार का निकल भागना। छापे के बाद सौरभ के ठिकानों से मिली चल-अचल संपत्तियों का विवरण उपलब्ध नहीं कराना और बाद में भी सौरभ की अचल संपत्तियों की कीमत को छुपाए रखना। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पूछे गए प्रश्न के जवाब में लोकायुक्त टीम ने सौरभ के ठिकानों से मिली अचल संपत्ति की कीमत करीब 3 करोड़ रुपये आंकी है। इस तरह लोकायुक्त टीम को सौरभ के ठिकानों से कुल करीब 11 करोड़ की संपत्ति मिली। आयकर टीम को करीब 45 करोड़ कीमत का सोना और 11 करोड़ की नकदी मिली, जबकि ईडी ने 23 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेज, खातों में नकदी सहित अन्य सामान मिला। तीनों ही एजेंसियों द्वारा जब्त सौरभ की संपत्तियों को ईडी ने सौ करोड़ से अधिक की माना है।
अवैध कमाई के संरक्षकों पर कार्रवाई कब?
परिवहन विभाग में सौरभ शर्मा को अवैध वसूली से जोडऩे वालों तक एक भी एजेंसी नहीं पहुंची है। लोकायुक्त और ईडी दोनों ही यह मानकर चल रही हैं कि सौरभ ने अनुपातहीन संपत्ति परिवहन बैरियरों पर अवैध वसूली से कमाई है। लेकिन सौरभ को इस अवैध वसूली से जोडऩे वाला कौन था। सौरभ के पास सौ करोड़ तो संरक्षकों पर कितना धन? इस दिशा में किसी भी एजेंसी ने अपनी जांच को नहीं बढ़ाया है।
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