राजधानी
दुष्कर्मी जीजा को 20 साल का कारावास
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सात माह तक अत्याचार सहने के बाद पुलिस के पास पहुंची थी नाबालिग पीडि़ता
भोपाल। माता-पिता के निधन के बाद बड़ी बहिन के यहां रह रही नाबालिग किशोरी को धमकाकर बार-बार दुष्कर्म करने वाले उसके जीजा को भोपाल जिला न्यायालय ने दुष्कर्म एवं पोक्सो एक्ट की अलग-अलग धाराओं में 20 साल के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है।
भोपाल के टीटी नगर थाने में इस अपराध की सूचना 2 नवम्बर 2020 को चाइल्ड लाईन भोपाल के सदस्य ने दी थी। शिकायत में बताया गया कि पीडि़ता से उसके सगे जीजा आरोपी अनिल मोरे ने कई बार दुष्कर्म किया है। पीडि़ता ने पुलिस को बताया कि वह पांच भाई बहन है, वह सबसे छोटी है। उसके माता-पिता नहीं हैं। माँ की मौत के बाद बड़े भाई ने उसे 11 साल की उम्र में बड़ी बहिन की ससुराल में रहने के लिए भेज दिया था। उसके पहुंचने के बाद जीजा अनिल मोरे ने परिवार से अलग एक अलग झुग्गी ले जी और दीदी को अलग-अलग बंगलों पर काम पर लगा दिया था। बहिन के घर से चले जाने के बाद वह उसे धमाकाकर गलत काम करता था। करीब सात महीने तक उसने ऐसा किया। एक दिन मना करने पर उसके साथ आरोपी जीजा ने मारपीट की इस कारण वह घर छोडक़र भाग निकली और एम.पी.नगर में एक संस्था की दीदियों से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई। इसके बाद संस्था की दीदियां उसे पुलिस के पास लेकर पहुंची और एफआईआर कराई। इस मामले में पुलिस ने दुष्कर्म की धारा 376, 376(2)एन, 376(2)एफ भादवि एवं 3/4, 5एल/6, 9/10 पॉक्सो एक्ट में प्रकरण पंजीबद्ध किया था। न्यायालय ने पीडि़त पक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्कों, साक्ष्यों और दस्तावेजों से सहमत होकर आरोपी अनिल मोरे को धारा 376(2)एफ भादवि एवं 5एन/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं सौ रुपये अर्थदण्ड, धारा 376(2)एन भादवि एवं 5एल/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं सौ रुपये अर्थदण्ड, धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रुपये एवं धारा 323 एवं 506 भादवि में एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं सौ-सौ रुपये अर्थदण्ड से दण्डित करने का आदेश दिया। इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुश्री दिव्या शुक्ला एवं श्रीमती ज्योति कुजूर ने पैरवी की।
पीडि़ता को मिलेगी 4 लाख प्रतिकर राशि
पीडि़ता वर्तमान में फ्रिसबी का प्रशिक्षण देने केरल गई है, जहां वह बच्चों को प्रशिक्षण दे रही है। 12वीं कक्षा में 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण हो चुकी पीडि़ता पढाई जारी रखकर खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहती है। पीडि़ता के भविष्य को देखकर न्यायालय ने पीडि़ता को प्रतिकर के रूप मे 4 लाख रुपये दिए जाने का आदेश पारित किया है।
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