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मानसून सत्र में नहीं हो सकेगा विधायकों का प्रशिक्षण
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मप्र विधानसभा में शीतकालीन सत्र से ही लागू हो सकेगा ई-विधान
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के निर्देश पर राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) के अंतर्गत मप्र विधानसभा में ई-विधान की कार्यवाही जारी है। इस दिशा में भौतिक तैयारी लगभग पूरी हो चुकी हैं, लेकिन टेबलेट सहित अन्य उपकरणों की खरीदी नहीं हो पाने से न केवल ई-विधान अगले सत्र से लागू हो सकेगा, बल्कि विधायकों को मानसून सत्र में ही प्रशिक्षण दिलाने की योजना भी पूरी नहीं हो सकेगी।
सत्र के बाद होगा विधायकों का प्रशिक्षण
एनआईसी द्वारा विधानसभा में टेबलेट की स्थापना सहित अन्य व्यवस्थाओं में देरी के चलते विधानसभा सचिवालय का प्रयास था कि टेबलेट उपलब्ध होने पर विधानभवन में सभी विधायकों को ई-विधान की प्रक्रिया से प्रशिक्षित किया जाए। लेकिन गवर्नेमेंट ई-मार्केट प्लेस (जेम) के माध्यम से टेबलेट सहित अन्य डिजीटल सामग्री की खरीदी नहीं हो पाने से अब प्रशिक्षण भी मानसून-सत्र के बाद तक टलेगा। सचिवालय अब सत्र के बाद विधायकों को अलग से सूचना देकर बुलाएगा और 50-50 विधायकों को एक साथ एक दिवसीय प्रशिक्षण दिलाएगा।
टेबलेट खरीदी में क्यों हो रही देरी
विधानसभा सचिवालय ने डिजीटलीकरण का पूरा काम एनआईसी को सौंपा है। एनआईसी द्वारा सामग्री खरीदी का काम राष्ट्रीय पोर्टल जेम के माध्यम से निविदा बुलाकर किया जा रहा है। निविदा एक बार निरस्त हो चुकी है। हाल में दूरी बार 15 दिन की अवधि की निविदा बुलाई गई हैं। इस कारण टेबलेट खरीदी में देरी हुई है। निविदा खुलने से लेकर सामग्री प्रदाय एवं इसके बाद टेबिलों पर फिटिंग में करीब एक महीने का समय और लगने का अनुमान है।
सदन की बैठक व्यवस्था में नहीं हुआ बदलाव
विधानसभा सचिवालय की देखरेख में विधानसभा सदन की सभी टेबिल-कुर्सियों को हटाकर जमीन में बिजली और इंटरनेट के तार बिछाए गए हैं। इस दौरान कुछ संधारण कार्य भी हुए हैं। हालांकि सदन की बैठक व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया है। सदन की बैठक व्यवस्था पहले की ही तरह रहेगी। हालांकि सत्र से पहले सदन और विधानसभा परिसर में साफ-सफाई और साज-सज्जा का काम जारी है।
क्या है केन्द्र की ‘नेवा’ योजना
राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) योजना भारत सरकार की एक पहल पर शुरू हुई है। जिसका उद्देश्य सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, ताकि विधायी प्रक्रियाओं को कागज रहित बनाया जा सके। नेवा से विधायी निकायों से संबंधित सभी कार्यों और डेटा ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगा।
‘टेबलेट सहित अन्य डिजीटल सामग्री की खरीदी में देरी हुई तो विधानसभा सदस्यों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि सत्र के बाद भी प्रशिक्षण के लिए उन्हें अलग से सूचना देकर बुलाया जा सकता है।’
एपी सिंह
प्रमुख सचिव, मप्र विधानसभा
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