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दागदार सर्वेयर एजेंसी पर क्यों मेहरबान अधिकारी?

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जिस एजेंसी की सर्विस पर तीन साल से उठ रहे सवाल, उसे सौंपी कई जिलों में उपार्जन की कमान

भोपाल। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा विपणन वर्ष 2025-26 के लिए मध्यप्रदेश के 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द का समर्थन मूल्य पर उपार्जन 7 जुलाई से शुरू कर दिया है। हालांकि सभी जिलों में सर्वेक्षकों की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) ने अधिकांश जिलों में सर्वेक्षकों की नियुक्ति का काम जिस निजी एजेंसी एनसीएमएल को सौंपा है, जबकि उसके सर्वेक्षकों पर विगत वर्षों में गंभीर आरोप लगे हैं। इस साल भी जिला विपणन अधिकारी जबलपुर की ओर से एनसीसीएफ के शाखा प्रबंधक को पत्र लिखकर इस तरह की एजेंसी को जिले में काम नहीं दिए जाने का आग्रह किया है। 

 बिना निविदा चयन होती है सर्वेक्षक एजेंसी 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने मप्र में समर्थन मूल्य पर मूंग और उड़द खरीदी का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) को सौंपा है। मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) को उपार्जन की निगरानी एजेंसी बनाया गया है। दलहन के उपार्जन से पहले निजी एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले बी.एस.सी. एग्रीकल्चर योग्यताधारी कुशल सर्वेक्षकों की देखरेख में होता है। खरीदे गए माल की गुणवत्ता का जिम्मा भी इन सर्वेयरों का ही होता है। सर्वेयर उपलब्ध कराने के लिए एनसीसीएफ और नाफेड द्वारा इन दोनों ही केन्द्रीय एजेंसियों के पास सूचीबद्ध  (इम्पैनल्ड) निजी एजेंसियों में से चयन किया जाता है। खास बात यह है कि दोनों ही कई निजी एजेंसियां सूचीबद्ध होने के बावजूद नाफेड और एनसीसीएफ ने अधिकांश जिलों में एनसीएमएल को सर्वेयर एजेंसी नियुक्त किया है। जबकि इस एजेंसी और सर्वेयरों पर पूर्व में गंभीर आरोप लगे हैं।   

जबलपुर विपणन अधिकारी ने शाखा प्रबंधक को लिखा पत्र 

उपार्जन सर्वेयरों को लेकर जिला विपणन अधिकारी, जबलपुर ने विगत 9 जुलाई को एनसीसीएफ के शाखा प्रबंधक को पत्र लिखा है। वर्ष 2023 में नियुक्त सर्वेयरों और उनकी अधिकृत एजेंसी द्वारा की गई गड़बडिय़ों अनियमितताओं और उन पर प्रकरण दर्ज किए जाने का उल्लेख करते हुए पत्र में लिखा है कि एनसीसीएफ द्वारा पूर्व में नियुक्त एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध सर्वेयरों द्वारा बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहने, एजेंसी द्वारा सर्वेयरों को स्थानांतरित करने से उनकी जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती है। इसलिए जिले में सर्वेयर एजेंसियों को ध्यान में रखते हुए बी.एस.सी. एग्रीकल्चर, स्नातक, कुशल एवं अनुभवी सर्वेयरों की नियुक्ति की जाए। साथ ही उपार्जन कार्य अवधि तक नियमित उपस्थित रहने हेतु संबंधितों को निर्देशित किया जाए। उल्लेखनीय है कि विपणन वर्ष 2023 में भी एनसीसीएफ ने एनसीएमएल कंपनी को जबलपुर जिले में सर्वेयर उपलब्ध कराने का काम सौंपा था, लेकिन कंपनी और सर्वेयरों की योग्यता पर सवाल उठाते हुए उनकी गड़बडिय़ों के संबंध में पर 8 जून 2023 को जिला विपणन अधिकारी ने महाप्रबंधक (उपार्जन दलहन) को पत्र लिखा था। इस मामले में एनसीसीएफ की स्टेट हेड श्रीमती अपर्णा सिंह को फोन कर एवं वॉट्सअप मैसेज के माध्यम से प्रकरण संज्ञान में लाया गया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 

36 जिलों में जारी है मूंग उपार्जन 

नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, रायसेन, हरदा, सीहोर, जबलपुर, देवास, सागर,गुना, खण्डवा, खरगोन, कटनी, दमोह, विदिशा, बड़वानी, मुरैना, बैतूल, श्योपुरकला, भिण्ड, भोपाल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, छतरपुर, उमरिया, धार, राजगढ़, मण्डला, शिवपुरी, अशोकनगर, इंदौर, बालाघाट, सतना, पांढुर्णा, मैहर और पन्ना। 

13 जिलों में हो रहा उड़द का उपार्जन 

जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, दमोह, छिंदवाड़ा, पन्ना, मण्डला, उमरिया, सिवनी, बालाघाट, बैतूल, सिंगरौली और मैहर। 

जिले जहां नेफेड ने नियुक्त की एजेंसियां 

नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, हरदा, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, खण्डवा, खरगोन, कटनी, विदिशा, बड़वानी, बैतूल, भोपाल, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, बुरहानपुर, धार, राजगढ़, मण्डला, इंदौर और बालाघाट। 

जिले जहां एनसीसीएफ ने नियुक्त की एजेंसियां 

रायसेन, सीहोर, जबलपुर, देवास, गुना, मुरैना, श्योपुरकलां, भिण्ड, शिवपुरी, अशोक नगर, उमरिया, सिंगरौली, सतना और मैहर। 

‘सर्वेयर एजेंसी के चयन के लिए केन्द्रीय एजेंसियां एनसीसीएफ और नाफेड अधिकृत हैं। इस तरह की शिकायत पर राज्य एजेंसी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। मूंग-उड़द के उपर्जन में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा गुणवत्तापूर्ण खरीदी नहीं होने पर संबंधित सर्वेयर पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। ’

आलोक सिंह (आईएएस)

प्रबंध निदेशक, राज्य सहकारी विपणन संघ