मध्यप्रदेश

Image Alt Text

कब मैदान में उतरेंगे चयनित टीएसआई?

मध्यप्रदेश

34 में से 30 टीएसआई के पास नहीं है कम्प्युटर डिप्लोमा, इसलिए अटका प्रशिक्षण ---- 

भोपाल। मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के परिवहन चेकपोस्टों पर प्रायवेट कटर द्वारा अवैध वसूली की शिकायतों के बीच नव-चयनित 34 टीएसआई की पदस्थापना भी फिलहाल अटक गई है। विभाग में पदस्थापना से पूर्व आवश्यक अर्हता दस्तावेज कम्प्युटर डिप्लोमा नव-चयनित 30 टीएसएसआई के पास नहीं है। इसलिए इनका विभागीय प्रशिक्षण भी अटक गया है। मैदानी काम में हो रही परेशानी को देखते हुए परिवहन आयुक्त ने इनकी पदस्थाना को लेकर शासन से अभिमत मांगा है। यदि बिना कप्युटर डिप्लोमा के ही प्रशिक्षण की अनुमति शासन से नहीं मिलती है तो 30 टीएसआई की ज्वाइनिंग और मैदानी पदस्थापना लम्बी खिंच सकती है। 

उल्लेखनीय है कि मप्र परिवहन विभाग की प्रवर्तन (एन्फोर्समेंट) शाखा के अंतर्गत 45 चेकपॉइंट और इतने ही उडऩदस्ता में सहायक उप निरीक्षक, उप निरीक्षक और निरीक्षक स्तर तक को ही वाहनों को रोककर चेक करने का अधिकार प्राप्त है। विभाग के पास वर्तमान में एक भी सहायक उप निरीक्षक नहीं है। जबकि स्वीकृत पदों के अनुपात में आरटीआई लगभग एक चौथाई और टीएसआई आधे ही हैं। तीनों ही श्रेणियों में कुल स्वीकृत पद 171 हैं जबकि पदस्थ आरटीआई और टीएसआई की संख्या करीब 55 है। इनमें भी एक चौथाई अलग-अलग कारणों से मैदानी पदस्थाना में नहीं हैं।

तीन महीने से अटका है प्रशिक्षण 

परिवहन विभाग में 34 नए परिवहन उप निरीक्षकों का चयन सहित भर्ती की सभी औपचारिकताएं तो तीन महीने पहले ही पूरी हो चुकी हैं, लेकिन ज्वाइनिंग सिर्फ 4 की ही हो सकी है। पिछले करीब तीन महीने से अटके प्रशिक्षण की प्रक्रिया बिना कम्प्युटर डिप्लोमा के ज्वाइनिंग दिए जाने हेतु शासन से हरी झंडी मिलने पर ही पूरी हो सकेगी। चूंकि सभी 34 टीएसआई का प्रशिक्षण साथ होना है, इसलिए चार का प्रशिक्षण भी अटका है। 

विभागीय कामकाज सीख रहे नए टीएसआई 

30 नए टीएसआई को भलें विधिवत ज्वाइनिंग नहीं मिल सकी हो, लेकिन परिवहन आयुक्त ने इन्हें विभागीय कार्यप्रणाली को सीखने के लिए अलग-अलग विभागीय कार्यालयों में पदस्थ किया है। प्रशिक्षण और मैदानी पदस्थापना से पहले ये सभी विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर कार्यालयीन कामकाज का प्रशिक्षण ले रहे हैं। 

आरक्षकों का प्रशिक्षण को मिली हरी झंडी 

परिवहन विभाग में 13 आरक्षक भी ऐसे हैं, जिन्होंने विभागीय प्रशिक्षण नहीं लिया है। परिवहन आयुक्त ने इनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी कर ली है। पुलिस मुख्यालय ने इनके प्रशिक्षण के लिए जो राशि बताई थी। वह भी स्वीकृत हो गई है। इनके साथ दो छूटे हुए उप निरीक्षकों का भी प्रशिक्षण होना है।  

सुरक्षा को लेकर भयभीत हैं परिवहन दस्ते 

चेकपॉइंटों और प्लाइंग पर अवैध वसूली की शिकायतों के बीच विभागीय दस्ता भी लगातार अधिकारियों से पर्याप्त सुरक्षा का आग्रह कर रहा है। हाल में अवैध वसूली के वीडियो सामने आए हैं तो ट्रक चालकों द्वारा विभागीय कर्मचारियों से मारपीट, झूमाझटकी और धमकानें के भी कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि चेकपॉइंट या फ्लाइंग द्वारा वाहन को रोके जाते समय उनकी सीमित संख्या देखकर ट्रक चालक एकजुट हो जाते हैं और अपने वाहनों को कार्रवाई से बचाने के लिए उनके साथ विवाद और मारपीट तक कर देते हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय पुलिस भी उनकी मदद नहीं करती है। इसलिए उन्हें और अधिक अधिकारियों तथा बल की आवश्यकता है। जबकि ट्रक चालकों का आरोप है कि उनके वाहनों को अवैध वसूली के लिए जबरदस्ती बैरीकेटिंग कर रोका जाता है। पैसे नहीं देने पर उनके वाहन की नंबर प्लेट का फोटो लेकर ऑनलाइन चालान बनाए जा रहे हैं। 

‘कम्प्युटर डिप्लोमा के अभाव में जिन 34 टीएसआई की ज्वाइनिंग अटकी है, उनके संबंध में शासन से अभिमत चाहा है। जैसे भी निर्देश मिलेंगे, कार्यवाही को आगे बढ़ाएंगे। प्रशिक्षण के बाद सभी टीएसआई की मैदानी पदस्थापना की जाएगी।’

विवेक शर्मा, परिवहन आयुक्त,मप्र