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अध्यक्ष की मौजूदगी में मना जश्र हुआ स्वच्छता कर्मियों का सम्मान
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भोपाल ऐसे ही नहीं बना
देश का दूसरा स्वच्छ शहर
-मिला कार्ययोजना क्रियान्वयन के साथ दिन-रात की मेहनत का परिणाम
-पुरस्कार मिलते ही अध्यक्ष के साथ नाचे सफाई मित्र, बंटी मिठाई, हुई फूलों की वर्षा
भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल देश की दूसरी सबसे स्वच्छ राजधानी बन गई है। इस परिणाम के पीछे निगम प्रशासन की बेहतर कार्ययोजना, क्रियांवयन और अधिकारी-कर्मचारियों के साथ सफाई मित्रों की दिन-रात की मेहनत रही है। परिणाम की घोषणा के बाद भारी बरसात में अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के नेतृत्व में गुरूवार ढ़ोल-नगाड़ों के साथ जश्र मनाया गया। इसके पहले उपलब्धि के लिये फूलों की वर्षा और मिठाई से सफाई मित्रों का आभार जताया गया।
दरअसल स्वच्छता के मामले में बीते साल तक 5वें पायदान पर रहा भोपाल लंबी छलांग लगाते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया। महज एक वर्ष में 10 लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में दूसरे शहरों को पछाडक़र यह देश की सबसे स्वच्छ राजधानी भी बन गया है। जबकि यहां रोज करीबन 800 टन कचरा निकलता है। इसके बाद भी नगर निगम ने घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्रित कर निष्पादन का जहां सार्थक प्रयास किया गया। वहीं दूसरी ओर कचरे से खाद, ईंट आदि बनाकर इसका सदुपयोग भी सुनिश्चित किया गया है। कचरा कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण की अवधारणा की सफलता को इससे मदद मिली है।
सबसे स्वच्छ राजधानी का खिताब मिलने भोपाल नगर निगम के सफाई कर्मियों का सम्मान किया गया। भोपाल नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सफाई कर्मियों को मिठाई खिलाई और दिन रात शहर को साफ स्वच्छ बनाए रखने में योगदान देने के लिए उनका हाथ जोडक़र धन्यवाद दिया। भोपाल को अवॉर्ड मिलने का श्रेय स्वच्छता मित्रों और आम लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि जनता के स्वच्छ आचरण के चलते ही राजधानी को ये उपलब्धि मिली है। बरसते पानी में यह जश्र मनाया गया। जहां सफाई कर्मियों का फूलों से स्वागत किया गया। इसके इसके अलावा शहर के बैरागढ़, कोलार सहित नौ प्रमुख स्थानों पर एलइडी स्क्रीन लगाकर अवार्ड समारोह का लाइव टेलीकास्ट भी किया गया।
स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल का अब तक का सफर
स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल ने 2017 और 2018 में लगातार दो साल देश में दूसरी रैंक हासिल की थी। 2019 में भोपाल खिसककर 19वें नंबर पर आ गया था। 2020 में कम बैक करते हुए 12 पायदान ऊपर खिसका और 7वीं रैंक हासिल की। 2021 के सर्वेक्षण में भी भोपाल ने 7वां स्थान हासिल किया था। 2022 के सर्वेक्षण में भोपाल की रैंक सुधरी और यह छठवें स्थान पर आ गया। वहीं, भोपाल को 5 स्टार मिला। 2023 के सर्वेक्षण में पांचवीं रैंकिंग रही थी। इस बार यह टॉप-3 से आगे बढक़र दूसरे स्थान पर पहुंच गया।
स्वच्छता की छलांग में मददगार बने यह 5 प्रयोग
-कचरा प्रबंधन: कचरे के एकत्रीकरण के बाद प्रबंधन के लिये शहर में 5 स्थानों पर गारबेज ट्रांसफर स्टेशन शुरू किए गए। ये अल्ट्रा मॉर्डन गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन हैं। 17.74 करोड़ की लागत से बनाए गए इन स्टेशन में कचरा अलग-अलग करके प्रोसेसिंग प्लांट में भेजा जाता है।
-डोर टू डोर कलेक्शन के लिए सीएनजी वाहन: शहर भर से निकलने वाले कचरे के लिए 125 नए सीएनजी वाहन खरीदे गए। 8 करोड़ 75 लाख की लागत से खरीदे गए इन वाहनों के प्रयोग से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और कचरा कलेक्शन ने रफ्तार मली।
-सडक़ों पर उड़ती धूल हुई गायब: सडक़ों पर उड़ती धूल को नियंत्रित करने रोड स्वीपिंग वाहन शहर में दौड़ाये गए। 4 से बढ़ाकर इनकी तादात 10 की गई। इससे भोपाल की करीब सभी फोरलेन और 6 लेन सडक़ों को कवर किया गया है। 3 करोड़ रुपए की लागत से ये वाहन खरीदे गए।
धार्मिक स्थलों का कचरा भी काम में लिया
धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूल और नारियल जैसे कचरे को भी काम में लिया गया। प्लांट लगाए गए। वार्ड व धार्मिक स्थलों से निकलने वाले इन अपशिष्टों के निपचारे के लिए अलग यूनिट बनाकर अगरबत्ती और गुलाल तैयार किया जाने लगा। दूसरी ओर 5 टन प्रतिदिन की क्षमता वाले कोकोनट प्लांट में कोकोशेल कोकोपिट, नारियल कम्पोस्ट नारियल फाइबर लगाया जाता है।
सफल है थैला बैंक और कचरा कैफे का भी प्रयोग: भोपाल में 3 जगह कचरा कैफे लगाए गए हैं। इसमें कोई भी नागरिक घर का कबाड़ देकर मनचाहा भोजन या फिर सेल्फ हैल्प ग्रुप की ओर से तैयार किए गए अचार, पापड़, गौ शिपल्प के उत्पाद, कपड़े या कागज के थैले ले सकता है। यह कैफे एप के जरिए काम करता है। सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करने के लिए थैला बैंक भोपाल में 10 स्थानों पर लगाए गए हैं। जहां पर 10 रुपए वैंडिग मशीन में डालकर कपड़े का थैला प्राप्त कर सकते हैं।
2024 का रिपोर्ट कार्ड
यूएलबी जनगणना कोड -802312
वार्डों की संख्या- 85
जनसंख्या (जनगणना 2011) -1798218
जीएफसी स्टार रेटिंग -7 स्टार
ओडीएफ प्रमाणन -वाटर+
राष्ट्रीय रैंकिंग रैंक: 2 (40 में से)
राज्य रैंकिंग रैंक : 1 (3 में से)
कुल स्कोर (12,500): 12067
एसएस 2024 (10,000): 9567
जीएफसी (1,300): 1300
ओडीएफ (1,200): 1200
ऐसा रहा शहर का रिपोर्ट कार्ड
घर-घर जाकर कचरा संग्रहण: 100 प्रतिशत
स्रोत पृथक्करण: 95 प्रतिशत
कचरा उत्पादन बनाम प्रसंस्करण: 100 प्रतिशत
डंपसाइटों का उपचार: 0 प्रतिशत
आवासीय क्षेत्रों की सफाई: 100 प्रतिशत
बाजार क्षेत्रों की सफाई: 100 प्रतिशत
सफाई जल निकायों की सफाई: 100
प्रतिशत सार्वजनिक शौचालयों की सफाई: 100 प्रतिशत
इस शब्दों से जताई खुशियां
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में भोपाल ने पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि नगर निगम के नियुक्त कर्मचारी, स्वच्छता मित्र, अधिकारी, और सबसे ऊंचे भोपालवासियों का सहयोग और जागरूकता का प्रतिफल है।
मालती राय, महापौर भोपाल
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर पुरस्कार से भोपाल में 2024-25 के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।, बधाई।
आलोक शर्मा, सांसद भोपाल
स्वच्छता के क्षेत्र में भोपाल ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राजधानी के रूप में हमारे भोपाल की पहचान अब एक स्वच्छ, सुंदर और स्मार्ट शहर के रूप में और भी मजबूत हो गई है।
विश्वास कैलास सारंग, मंत्री खेल एवं युवा कल्याण
भोपाल को 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह भोपालवासियों के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह भोपाल की जनसमुदाय, मान्यताप्राप्त कार्यकर्ता, नगर निगम की कर्मठ टीम, नगर सरकार की सतत मेहनत का परिणाम है।
रामेश्वर शर्मा, विधायक
भोपाल नगर निगम ने अपने सीमित संसाधनों के साथ अधिकारी-कर्मचारियों और सफाई मित्रों के सहयोग से इस मुकाम पर पहुंचा। सर्वश्रेष्ठ स्थान के लिये प्रयास जारी रहेगा।
्रहरेंद्र nकुमार, आयुक्त नगर निगम भोपाल
भोपाल को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए और देश में स्वच्छता सर्वे में नंबर 2 पर लाने के लिए सबसे पहले उन सफाई कर्मियों को बहुत बहुत नमन जिन्होंने इसके लिए मेहनत की है। इसके साथ सभी को भी अधिकारीगण और इसमें सहयोगी रहे रहवासियों को भी बधाई।
रोली शिवहरे, सामाजिक कार्यकर्ता
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