मध्यप्रदेश

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पेरिस और लंदन तक पहुंच रहा मध्यप्रदेश का गुलाब

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42 हजार हैक्टेयर में 5.13 लाख टन फूलों के उत्पादन के साथ देश में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश
भोपाल। कोविड संक्रमण काल के बाद नगद फसल के रूप में फूलों की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है। परिणामस्वरूप न सिर्फ किसानों की आय में इजाफा हुआ, बल्कि प्रदेश के गुना में उत्पादित फूलों की मांग जयपुर, दिल्ली, मुंबई के साथ ही पेरिस एवं लंदन तक हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी को समर्पित 27.71 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि में से इस वर्ष 42 हजार 976 हैक्टेयर में 5 लाख 12 हजार 914 टन उत्पादन हुआ। फूलों की खेती को लेकर देश में यह उत्पादन कर प्रदेश तीसरे स्थान पर आ गया है। फूलों का रकवा भी वर्ष 2021-22 में जहां 37 हजार 647 हैक्टेयर था, वर्ष 2024-25 में यह बढक़र लगभग 43 हजार हैक्टेयर तक पहुंच गया है। उत्पादन में भी रिकॉर्ड 86294 टन की बढ़ोतरी हुई है।  भोपाल की बरखेड़ा-बोदर ग्राम पंचायत की लक्ष्मीबाई कुशवाह ने धान, गेहूं, सोयाबीन की खेती छोडक़र गुलाब, जरबेरा और गेंदा के फूलों का उत्पादन करना शुरू किया। अब उनकी आय तीन से चार लाख रुपए तक हो गई है।
इन फूलों की हो रही खेती

प्रदेश के गांव और शहरी क्षेत्र से लगी कृषि भूमि में गेंदा, गुलाब, सेवन्ती, ग्लेडूलस, रंजनीगंधा की खेती हो रही है। जबकि औषधीय फूलों में इसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली और कोलिक्स की खेती की जा रही है। प्रदेश की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई सुविधाओं में हुए विस्तार से बेहतर उत्पादकता को बल मिला है।


सबसे ज्यादा गेंदा का उत्पादन 

किसान सबसे ज्यादा उत्पादन गेंदे का कर रहे हैं। इस वर्ष किसानों ने 24 हजार 214 हैक्टेयर में गेंदे की खेती की है। 4 हजार 502 हैक्टेयर के साथ गुलाब दूसरे स्थान पर है, जबकि 1709 हैक्टेयर के साथ सेवंती तीसरे और 1058 हैक्टेयर के साथ ग्लेडूल्स चौथे स्थान पर है। 263 हैक्टेयर में रजनीगंधा का उत्पादन हो रहा है। 11227 हैक्टेयर में अन्य फूलों की खेती हो रही है।