विशेष

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एक स्कूल ऐसा जहां छात्रों के जीवन में समाहित हैं रामायण और गीता

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-24 सौ छात्रों के आधुनिक स्कूल में संस्कार के साथ मिलती है अंतर्राष्ट्रीय मानक की शिक्षा
हरदा। शिक्षा को व्यवसाय की बजाय मिशन मानकर कार्य कर रहे हरदा के ‘द फाउंडेशन ऑफ एजुकेशन’ ने शिक्षा में भारतीयता की गूंज को पहचान बनाया है। 24 सौ छात्र संख्या वाले स्कूल में प्रत्येक छात्र को रामायण एवं गीता के श्लोक कंठस्थ हैं। छात्र एक दूसरे को जय श्री कृष्णा के संबोधन से बुलाते हैं। स्कूल संचालन कर रहे जयशंकर गुर्जर ने बताया कि हमने स्कूल संचालन मुनाफे के लिए नहीं किया बल्कि यह हमारे लिए समाजसेवा है। स्कूल फीस की संरचना आम परिवार की पहुंच में है, इसलिए संस्कार और अनुशासन से पहचान बनाने वाले स्कूल में दाखिले के लिए बगैर विज्ञापन अभिभावकों की लंबी प्रतीक्षा सूची है।
पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं संस्कार
स्कूल में कक्षाओं की शुरुआत प्रार्थना और ध्यान से होती है। भोजन से पूर्व सभी विद्यार्थी भोजन मंत्र का उच्चारण करते हैं। स्वदेश संवाददाता ने स्कूल पहुंचकर कक्षा-1 के बच्चों से कुछ सुनाने का अनुरोध किया तो पूरे समूह ने मधुराष्टकं स्रोत्र एवं भोजन मंत्र लयबद्ध तरीके से सुनाया। अनुशासन एवं संस्कारित शैक्षणिक वातावरण छात्रों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है।
यह हैं स्कूल में सुविधाएं
शिक्षा में भारतीयता को बुनियाद बनाए ‘द फाउंडेशन ऑफ एजुकेशन’ स्कूल में स्मार्ट क्लासख्, डिजिटल बोर्ड, इनोवेटिव शैक्षणिक व्यवस्था है। रामायण एवं महाभारत की कथाएं छात्रों को कंठस्थ हैं, श्रीमद्भवदगीता के श्लोक भी प्रत्येक बच्चे को याद हैं एवं दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, शास्त्रों और जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जा रही है।
टीम भावना से बना आदर्श
भारतीयता को जी रहे इस आधुनिक स्कूल को संचालक जयशंकर गुर्जर जिले के उत्कृष्ट शिक्षकों में शुमार हैं। उनके साथ जुड़ी टीम भी पूरे मन से कार्य कर रही है। टीम और संचालन के प्रयासों से स्कूल वर्तमान मुकाम तक पहुंचा है। इस टीम में वर्षों से जुड़ा स्टाफ, शिक्षक एवं प्राचार्य शामिल हैं। बार-बार स्टाफ में बदलाव न होने से बच्चे और शिक्षकों के बीच बेहतर समझ विकसित हुई है। हरदा के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. वीरेन्द्र गुहा भी स्कूल से जुड़े हैं।
यह बोले संचालक
स्कूल के संस्थापक एवं संचालक जयशंकर गुर्जर ने बताया कि उनका योगदान सिर्फ एक शिक्षक के रूप में सीमित नहीं है। वे अपने स्कूल के माध्यम से यह साबित कर रहे हैं कि ग्लोबल स्टैंडर्ड की शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक बोध दोनों को एक ही पाठ्यक्रम में सहेजा जा सकता है। प्रत्येक कक्षा में 25 छात्र पर एक शिक्षक नियुक्त है और पढ़ाई इंग्लिश मीडियम में होती है।