राजधानी

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स्पीडो विजन सॉफ्टवेयर से मिनटों में तैयार होगी ड्राइविंग रिपोर्ट

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- तकनीक रही सफल, तो पूरे देश के अन्य रेलवे मंडल भी करेंगे लागू
भोपाल। पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल ने नवाचार करते हुए पहली बार ‘स्पीडो विजन’ नामक आधुनिक सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जोकि लोकोमोटिव स्पीडोमीटर डेटा का तेज, सटीक और स्वचालित विश्लेषण कर संचालन रिपोर्ट मिनटों में तैयार कर देगा। इस सॉफ्टवेयर का उद्घाटन हाल ही में जीएम शोभना बंदोपाध्याय ने गुना क्रू लॉबी में किया। इस तकनीक को फिलहाल भोपाल मंडल में लागू किया गया है। अगर यह सफल रहा, तो देश के अन्य रेलवे मंडलों में भी लागू किया जाएगा।
वर्तमान में भोपाल मंडल में 747 लोको पायलट एवं 729 सहायक लोको पायलट कार्यरत हैं। स्पीडो विजन की तैयार विश्लेषण रिपोर्ट को तत्काल जीमेल, व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा किया जा सकता है।
हर माह होती 400 स्पीडोमीटर डेटा की समीक्षा
सीनियर डीएमई सचिन शर्मा ने बताया कि मंडल में प्रतिदिन औसतन 13 फ्लॉपी का विश्लेषण किया जाता है। हर महीने करीब 400 स्पीडोमीटर डेटा को डाउनलोड कर लोको पायलट की कार्यशैली की समीक्षा की जाती है। यदि विश्लेषण में किसी प्रकार की चूक, गति सीमा का उल्लंघन या संचालन व्यवहार में असामान्यता पाई जाती है, तो संबंधित लोको पायलट को लोको निरीक्षक काउंसलिंग करते हैं और पुन: प्रशिक्षण देते हैं। जून में किए गए विश्लेषण में 400 में से केवल 8 मामलों में अनियमितता पाई गई, जिनको काउंसलिंग हेतु भेजा गया।
सीएलआई सुरेंद्र श्रीवास्तव ने बनाया साफ्टवेयर
बता दें कि यह सॉफ्टवेयर भोपाल के चीफ लोको इंस्पेक्टर सीएलआई सुरेंद्र श्रीवास्तव ने मात्र एक माह के भीतर तैयार किया है। मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी और वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता सचिन शर्मा के मार्गदर्शन में बना यह लोकोमोटिव स्पीडोमीटर से प्राप्त डेटा की एक्सेल फाइल को सेकंडों में प्रोसेस कर ग्राफिकल रिपोर्ट तैयार करता है, जिसमें तारीख, समय, गति, दूरी, ब्रेकिंग पैटर्न, ओवरस्पीड, फील टेस्ट और ब्रेक पावर टेस्ट जैसी प्रमुख जानकारियां शामिल होती हैं। यह विश्लेषण पूर्णतया स्वचालित और त्रुटिरहित होता है, जिससे पहले की मैनुअल प्रक्रिया की तुलना में समय और संसाधनों की बड़ी बचत होती है।
स्पीडो विजन तकनीक में है ये खास
1. लोको स्पीडोमीटर डेटा से ग्राफिकल विश्लेषण।
2. सेकंडों में रिपोर्ट तैयार और मोबाइल से कर सकते साझा।
3. सटीक, त्रुटिरहित और पूर्ण स्वचालित प्रक्रिया।
4. ओवरस्पीड, ब्रेकिंग पैटर्न, फील टेस्ट की निगरानी।
5. संचालन में पारदर्शिता और लोको पायलट की जवाबदेही सुनिश्चित।

"यह तकनीक न केवल ट्रेन संचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता को सशक्त बनाएगी, बल्कि लोको पायलटों के प्रशिक्षण, दक्षता और जिम्मेदारी को भी नया आयाम देगी। आने वाले समय में इस मॉडल को भारतीय रेलवे के अन्य मंडलों में भी लागू करने की योजना है।"
देवाशीष त्रिपाठी, डीआरएम, भोपाल