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मप्र की जेेलों में कम्प्युटर, टाइपिंग और संगीत सीख रहीं महिला बंदी

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एक साल में 653 महिला बंदी हुईं साक्षर, 148 ने दी परीक्षाएं

भोपाल। मध्यप्रदेश में महिलाओं की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। वहीं प्रदेश की जेलों में सजा काट रहीं और विचाराधीन महिला बंदियों को भी शिक्षा और स्वावलंबन के कई अवसर दिए जा रहे हैं। मप्र की जेलों में कम्प्युटर, टाइपिंग और संगीत के प्रशिक्षण एि जा रहे हैं। वही औद्योगिक और व्यवसायिक प्रशिक्षण भी महिला बंदी ले रही हैं। पिछले एक साल में मप्र की जेलों में कुल 653 महिला बंदी साक्षर हुई हैं, जबकि 148 ने अलग-अलग विषयों और पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं दी हैं। 


14 जेलों में लघु एवं कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण 

जेल में सजा काट रहीं महिलाओं को अलग-अलग प्रकार के लघु एवं कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें केन्द्रीय जेल इंदौर, सतना, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, उज्जैन, ग्वालियर एवं रीवा तथा जिला जेल देवास, बैढऩ, अनूपपुर, हरदा, शिवपुरी और मण्डला में व्यवसायिक  प्रशिक्षण के अंतर्गत महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, कम्प्युटर, मेहंदी, ब्यूटी पार्लर, गणेश प्रतिमा, पापड़, हर्बल कलर, राखी, सजावटी सामग्री, गोबर निर्मित सामग्री, आर्ट एण्ड क्राफ्ट एवं गुडिय़ा आदि बनाने का प्रशिक्षण कुल 687 महिलाओं को दिया गया है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण के दौरान ही प्रति आधा दिवस काम के लिए कुशल महिला बंदियों को 154 रुपये और अकुशल महिला बंदियों को 92 रुपये पारिश्रमिक दिया जाता है। 


प्राथमिक कक्षा से स्नातकोत्तर तक शिक्षा का अवसर 

जेलों में महिला बंदियों को प्राथमिक कक्षा से स्नातकोत्तर तक विभिन्न कक्षाओं में पढऩे का अवसर दिया जा रहा है। निरक्षर महिला बंदियों को साक्षर बनाने के लिए जेलों में कक्षाएं चलाई जा रही हैं। शासन द्वारा पुस्तकों और स्टेशनरी आदि की व्यवस्था मुफ्त की जाती है। परिणाम स्वरूप वर्ष 2024 में 148 महिला बंदियों ने अलग-अलग विषयों/पाठ्यक्रमों की परीक्षा दी। 653 साक्षर हुईं। 10 महिला बंदी कम्प्युटर शिक्षा, 10 महिला बंदी को टाइपिंग शिक्षा तथा  12 महिला बंदियों को संगीत की शिक्षा दिलाई गई। 


आबादी क्षेत्र से बाहर होंगी छह जेलें 

प्रदेश की घनी आबादी क्षेत्र में आ चुकी जेलों को स्थानांतरित कर सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना है। इनमें बैतूल की नई जेल निर्माणाधीन है। जबकि दमोह, रतलाम, सागर, छतरपुर और मंदसौर की जेलों के संबंध में साधिकार समिति से अनुमोदन हो चुका है। दूसरी पुरानी जेलों के प्रस्ताव भी पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत विचाराधीन हैं। 


जेल परिसर में बनेंगे जेलकर्मियों के आवास 

जेल नियमावली के अनुसार जेलों की सुरक्षा के उद्देश्य से जेल कर्मियों का जेल परिसर में निवास करना आवश्यक है। जेलकर्मी शासकीय आवासों की कमी के चलते जेल परिसर से बाहर निवास करते हैं। जेल प्रावधानों की पूर्ति और जेलों की सुरक्षा के लिए जेलकर्मियों के लिए विभाग जेल परिसरों के अंदर ही शासकीय आवास बनाने की योजना पर काम कर रहा है। 


‘मध्यप्रदेश की जेलों में महिलाओं की साक्षरता के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है। औद्योगिक एवं व्यवसायिक सहित अन्य प्रशिक्षण भी उन्हें दिलाए जाते हैं। हालांकि कम्प्युटर शिक्षा की व्यवस्था बहुत कम स्थानों पर है। प्रशिक्षण की व्यवस्था स्थानीय कलेक्टर द्वारा स्व-सहायता समूहों और संस्थाओं के माध्यम से कराई जाती है।’

जी.पी.सिंह 

महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, मध्यप्रदेश