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जीवितों को मरा और मृतकों को जिंदा बताकर करोड़ों की धोखाधड़ी
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- जीवन ज्योति योजना के नाम पर ग्वालियर-चंबल में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, ईओडब्ल्यू ने दर्ज किए प्रकरण
- दो कंपनियों के 1004 प्रकरणों में चल रही जांच, शेष छह से मांगे दस्तावेज
भोपाल/ग्वालियर। ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना में भारत सरकार की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के हितग्राहियों को मरा बताकर और कुछ पहले से मरे हुए व्यक्तियों का नाम योजना में जोड़वाकर उनके परिजनों के खातों में दो-दो लाख रुपये का भुगतान किए जाने का मामला उजागर हुआ है। मप्र की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 120बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित अधिनियम की 2018 की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
दो कंपनियों की जांच में ही उजागर हुआ 20 करोड़ का घोटाला
शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने ग्वालियर-चम्बल में कार्यरत 8 बीमा कंपनियों से जनवरी 2020 से दिसम्बर 2024 तक 5 साल के उन प्रकरणों की जानकारी मांगी, जिसमें बीमा क्लेम 2 लाख रुपये नॉमिनी के खातों में भुगतान किए गए। प्रारंभिक जांच में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के अब तक 325 प्रकरण और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के 679 क्लेम प्रकरणों की जांच जांरी है, जिनमें 20 करोड़ का भुगतान हुआ है। ग्वालियर में मैक्स लाइफ के 5 बीमा क्लेम और भिण्ड-मुरैना में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के 10 प्रकरणों की जांच पूरी हो चुकी है। जिनके माध्यम से यह धोखाधड़ी उजागर हुई है। ईओडब्ल्यू ने शेष छह कंपनियों से भी भुगतान संबंधी दस्तावेज मांगे हैं।
आरोपियों ने इस तरह की धोखाधड़ी
योजना में गरीब/निम्र आय वर्ग के लोगों को मात्र 436 रुपये प्रति वर्ष प्रीमियम पर 18 से 55 वर्ष तक के व्यक्तियों को 2 लाख रुपये का बीमा सुरक्षा मिलती है। बीमाधारक की मृत्यु पर नॉमिनी को दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। आरोपियों ने गरीब/निम्र आय वर्ग के जिंदा और मरे हितग्राही खोजे। ऋण आदि के बहाने से उनके आधार कार्ड, वोटर कार्ड लिए। इसी प्रकार एक आरोपी दीपमाला मिश्रा ने ‘एंटी करप्शन फाउण्डेशन ऑफ वर्ड’ नामक संस्था से जुडक़र उसका सदस्य बनाने के नाम पद दस्तावेज लिए। स्थानीय नगरीय निकायों से जीवित व्यक्तियों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए। उनके बैंक खाते, पासबुक, एटीएम, चैकबुक नॉमिनी के हस्ताक्षर कराकर अपने पास रखते थे। आरोपियों ने धोखाधड़ी कर जिंदा और मृत व्यक्तियों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना का हितग्राही बनाया। बाद में मृतकों और जिंदा हितग्राहियों की भी मृत्यु होना बताकरबीमा कंपनियों से उनके बैंक खातों में दो-दो लाख रुपये का भुगतान कराया। आरोपियों ने इस तरह की धोखाधड़ी बीमा कंपनियों के कर्मचारियों की मिलीभगत से की।
ईओडब्ल्यू ने इन्हें बनाया आरोपी
ग्वालियर- मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के कर्मचारी जिग्नेश प्रजापति, दीपमाला मिश्रा, विवेक दुबे एवं अन्य।
मुरैना- बीमा एजेंट मानसिंह कुशवाह और बल्लेश किरार, प्रदीप कुशवाह, रिंकू कुशवाह, सगुनी कुशवाह, सूरजराम कुशवाह (पंचायत सचिव)।
भिण्ड- बालेन्द्र सिंह कुशवाह, सतीश परिहार, निखिल विमल, भोलू सिंह और पंचायत सचिव सूरतमल कुशवाह एवं अन्य।
जीवित जिन्हें मरा बताया- ग्वालियर के नदीम, इरशाद, नसीमा, सिमरन, कृष्णा शंखवार और भिण्ड के लक्ष्मण श्रीवास सभी जिंदा हैं, लेकिन इन्हें मृत बताकर बीमा क्लेम लिया।
मृतक जिन्हें जिंदा बताकर बनाया हितग्राही- मुरैना जिले में अरुण कुशवाह, राजाबेटी, सीमाबाई, कल्याण माहौर, सुनीता बाई और भिण्ड जिले में शशि, विमल, मंजूबाई, अरविंद की मृत्यु हो चुकी थी। लेकिन इन्हें जिंदा बातकर हितग्राही बनाया और बाद में मृत बताकर बीमा क्लेम निकाला।
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