राजधानी

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‘माननीयों’ पर कोई प्रतिबंध नहीं, सिर्फ व्यवस्था को लेकर भेजा अनुरोध पत्र

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-विधानसभा परिसर में विधायकों की नारेबाजी पर रोक लगाने पर सचिवालय की सफाई
भोपाल। मप्र विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इससे पहले विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी विधायकों को सत्र संचालन के संबंध में जो अनुरोध पत्र भेजा है, उसे विधानसभा परिसर में विधायकों की नारेबाजी और प्रदर्शन पर रोक से जोडक़र बताया जा रहा है। जिस पर विधानसभा सचिवालय ने सफाई देते हुए कहा कि माननीयों पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं है। सिर्फ सुरक्षा एवं व्यवस्था के चलते सभी माननीय को अनुरोध पत्र भेजा गया है। इस तरह का अनुरोधी हर सत्र से पहले विधायकों से किया जाता है।
विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह की ओर से सभी विधायकों की सुरक्षा, प्रवेश पत्र और पार्किंग व्यवस्था हवाला देते हुए व्यवस्था में सहयोग करने की अपेक्षा की गई है। इस संबंध में एक अनुरोध पत्र 10 जुलाई को भेजा गया। जो मीडिया में सामने आने के बाद राजनीतिक तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक इसी मुद्दा बनाते हुए सरकार पर विधानसभा में जनता की आवाज को कुचलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि ‘यह पत्र आदेश नहीं, एक अनुरोध है। उद्देश्य केवल यह है कि परिसर का वातावरण गरिमापूर्ण बना रहे।’ उन्होंने कहा कि ऐसा अनुरोध पहली बार नहीं भेजा है। पिछले सत्रों में भेजा गया था।
समर्थकों की भीड़ नहीं ले जा पाएंगे, पास भी सीमित
विधानसभा सचिवालय ने अनुरोध पत्र में में कहा है कि सभी माननीय अपने साथ वाहन में केवल उन्हीं लोगों को लाएं, जिनके पास विधानसभा सचिवालय से जारी प्रवेश पत्र हो। एक निज सहायक, ड्राइवर का नाम, वाहन नंबर सहित प्रवेश पत्र कार्यालय में भेजना सुनिश्चित करें। दर्शक दीर्घा व परिसर के लिए पास सीमित संख्या में जारी किए जाएंगे। एक पास पर अधिकतम दो लोग आ सकते हैं। पर एक समय में केवल एक व्यक्ति, वह भी अधिकतम एक घंटे तक।
विपक्ष ने शुरू की राजनीति
विधानसभा सचिवालय द्वारा विधायकों केा अनुरोध पत्र भेजने पर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। नहीं नता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, ‘सरकार न तो कार्यवाही को लाइव होने दे रही है, न प्रदर्शन करने दे रही है। अब नारेबाजी पर भी रोक लगा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार जनता के आवाज क्यों नहीं सुनना चाहती है। कांगे्रस के आरोपों के बीच प्रदेश भाजपा अध्या  हेमंत खंडेलवाल ने कहा, ‘मेरे संज्ञान में ऐसा पत्र नहीं आया है। व्यवस्थाएं तय करना विधानसभा अध्यक्ष का अधिकार है। इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।’