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वेबसाइट के पत्रकार ने बनवाया था मछली का पास

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दैनिक अखबार और राष्ट्रीय चैनलों से लेकर वेबसाइट/पोर्टल के पत्रकारों को भी जारी हो रहे विधानसभा प्रवेश पत्र  

भोपाल। ड्रग जिहाद मामले में भोपाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी शाहवर उर्फ मछली और उसके भतीजे यासीन अहमद की गाड़ी पर चस्पा मिला पत्रकार कोटे से बना विधानसभा का प्रवेश पत्र भोपाल से संचालित एक वेबवाइट के पत्रकार ने बनवाया था। इस कथित पत्रकार का नाम सौरभ शर्मा नहीं, बल्कि गौरव शर्मा है और वेबसाइट का पूरा काम यही संभालता है। 

विधानसभा सूत्रों का कहना है कि एक बड़े नेता से जुड़ा होने के कारण इस पत्रकार पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। हालांकि मानसून सत्र के लिए पत्रकारों को उन्हीं वाहनों के प्रवेश पत्र दिए जा रहे हैं, जो उनके या परिजनों के नाम से हैं और उसका पंजीयन प्रमाण पत्र (आरसी) साथ लेकर पहुंच रहे हैं।  

आरोपी के पूरे परिवार की गाडिय़ों पर पास !

सूत्र बताते हैं कि विधानसभा का प्रवेश पत्र केवल आरोपी यासीन अहमद की गाड़ी पर नहीं लगा, बल्कि उसके पूरे परिवार की गाडिय़ों पर पत्रकार कोटे से पास लगे हैं। यासीन की गाड़ी पर विधानसभा का प्रवेश पत्र मिलने से उठे विवाद के बाद परिजनों ने वाहनों पर लगे पिछले सत्र के सभी पास हटा दिए हैं। खास बात यह है कि सत्र से पहले अगर यासीन की गिरफ्तारी नहीं होती, तो आरोपी और उसके परिवार के दूसरे सदस्यों के वाहनों के लिए मानसून सत्र के भी प्रवेश पत्र बनने वाले थे। मामला उजागर होते ही इस तरह के पास न केवल रोके गए हैं, बल्कि निरस्त भी किए जा रहे हैं। 

पांच सैकड़ा से ज्यादा पास जारी करता है विधानसभा 

मप्र विधानसभा के प्रत्येक सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय के आदेश पर जनसंपर्क शाखा पांच सैकड़ा से अधिक प्रवेश पत्र जारी करता है। दैनिक संस्थानों के पत्रकारों और छायाकारों के लिए प्रवेश पत्र और वाहन पास की संख्या दो या अधिक होती है। जबकि राष्ट्रीय, प्रादेशिक, ब्यूरो, सप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक पत्र-पत्रकाओं के लिए प्रवेश पत्रों की संख्या सामान्यत: एक या दो होती है। इसके अलावा स्वतंत्र पत्रकार, इलेक्ट्रोनिक मीडिया, वेबसाइट और पोर्टल भी अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक संबंधों का उपयोग कर प्रत्येक सत्र के लिए एक या अधिक प्रवेश पत्र बनवाते रहे हैं। जानकारी के अनुसार भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबारों की अलग-अलग सूचियों में कुल संख्या करीब एक सैकड़ा है। इसके अलावा करीब 60 प्रादेशिक, लगभग आधा सैकड़ा इलैक्ट्रोनिक मीडिया, 84 स्वतंत्र, 21 प्रादेशिक और आधा सैकड़ा से अधिक सप्ताहिक, मासिक, वेबसाइट, पोर्टल आदि के प्रवेश पत्र विधानसभा से जारी होते हैं। 

संस्थान के पत्र पर जारी होते हैं प्रवेश पत्र 

मप्र विधानसभा के प्रत्येक सत्र के लिए प्रवेश पत्र हेतु नियमानुसार संबंंधित संस्थान के संपादक या प्रतिनिधि द्वारा लेटरहेड पर विधानसभा के प्रमुख सचिव के नाम से आवेदन करना होता है। पहली बार के आवेदन पर प्रवेश पत्र समिति विचार कर जारी करती है। हालांकि एक बार की स्वीकृति के बाद आवेदन समिति के पास नहीं जाता है। नाम बदलने, जोडऩे या बढ़ाने का काम सचिवालय या जनसंपर्क शाखा के स्तर पर होता है। संस्थानों की अनुशंसा पर कुछ ऐसे अवांछित लोगों के नाम भी प्रवेश पत्रों की सूची में जोड़ दिए गए हैं, जो न तो विधानसभा सत्र का कवरेज ही करते हैं, न ही उनका पत्रकारिता से लेना-देना है।