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मध्यप्रदेश
25 जिलों में राजस्व के पास सवा दो लाख हेक्टेयर वनभूमि
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सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर वनभूमि से 11 महीने में हटने हैं सभी सरकारी और निजी कब्जे
भोपाल। मध्यप्रदेश में वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 लागू होने से पहले 24 अक्टूबर 1980 से पहले राजस्व विभाग को विभिन्न उद्देश्यों एवं प्रयोजनों के लिए हस्तांतरित की गई 2 लाख 16 हजार 350.269 हेक्टेयर वन भूमि अब भी राजस्व विभाग के पास है। सर्वोच्च न्यायालय ने विगत 15 मई को वन विभाग के कब्जे से बाहर ऐेसी भूमि जो वनभूमि के रूप में अधिसूचित है तथा जो राजस्व विभाग के कब्जे में है, या राजस्व विभाग द्वारा निजी व्यक्ति/संस्थाओं को आवंटित किया है। अथवा जिस भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया है। वन विभाग के कब्जे के बाहर ऐसी समस्त भूमियों को एक साल के अंदर वन विभाग को दिए जाने का आदेश दिया है। आदेश के परिपाहन में वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी संभागीय आयुक्तों और कलेक्टरों को एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने वन विभाग के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों, टाईगर रिजर्व के संचालकों और वनमंडलाधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यवाही के लिए लिखा है।
मंत्री बोले आदेश वनभूमि की वापसी के लिए नहीं
कांग्रेस विधायक अजय सिंह द्वारा विधानसभा के माध्यम से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने उत्तर में बताया है कि राजस्व विभाग को हस्तांतरित उपरोक्त भूमि वन भूमि, वन प्रबंधन के उद्देश्य से राजस्व विभाग को हस्तांतरित नहीं की गई है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में वन विभाग के प्रबंधन के बाहर अधिसूचित वन भूमि, जिस पर राजस्व विभाग का कब्जा, राजस्व विभाग द्वारा निजी व्यक्तियों/संस्थाओं को आवंटित अथवा अतिक्रमण की बात कही गई है। प्रश्नांक ‘क’ में उल्लेखित (राजस्व विभाग को विभिन्न उद्देश्यों एवं प्रयोजनों के लिए 10 अक्टूबर 1980 से पूर्व हस्तांतरित ) भूमियों को वन विभाग को वापस दिए जाने हेतु सर्वोच्च न्यायालय ने आदेशित नहीं किया है।
45 साल से पूर्व राजस्व को अंतरित मद सहित राजस्व भूमि
आरक्षित वन भूमि - विदिशा-2138.919 हेक्टेयर, रायसेन-6622.368 हे., सीहोर-5119.444 हे., भोपाल-2441.726 हे., होशंगाबाद-1815.289 हे., झाबुआ-77.488 हे., जबलपुर-934.05 हे., खरगौन-2858.668 हे., सागर-981.886 हे. शहडोल-91.561 हे., उज्जैन-328.00 हे., देवास-186.291 हेक्टेयर। कुल भूमि- 23595 हेक्टेयर।
संरक्षित वनभूमि - बैतूल-27715.315 हेक्टेयर, विदिशा-274.364 हे., रायसेन-2116.097 हे., सीहोर-1659.097 हे., भोपाल-178.262 हे., छिन्दवाड़ा-0.069 हे., होशंगाबाद-781.165 हे., हरदा-1952.067 हे., धार-1081.449 हे., झाबुआ-226.509 हे., जबलपुर-11224.55 हे., डिण्डौरी एवं मंडला- 23653.31 हे., खरगौन-206.818 हे., सागर-1318.395 हे., सिवनी-16699.763 हे., नरसिंहपुर-286.251 हे., शिवपुरी-5688.900 हे., गुना-15126.785 हे., रतलाम-10345.760 हे. और देवास-1200.766 हेक्टेयर। कुल भूमि- एक लाख 21 हजार 776. 533 हेक्टेयर।
सीमांकित संरक्षित वनभूमि : छतरपुर-1339.208 हेक्टेयर, पन्ना- 1869.240 हे., छिंदवाड़ा-45719.461 हे., सागर-2697.953 हे. और देवास-2043.431 हेक्टेयर। कुल भूमि-53,669.293 हेक्टेयर।
वनग्रामों की वनभमि - टीकमगढ़-1613.861 हेक्टेयर, हरदा-187.59 हेक्टेयर, इंदौर-3995.01 हेक्टेयर, धार-4527.26 हेक्टेयर, शिवपुरी-912.723 हेक्टेयर और उज्जैन-72.594 हेक्टेयर। कुल भूमि-11,309 हेक्टेयर।
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