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मध्यप्रदेश
पटवारी को भारी पड़ रही वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा
मध्यप्रदेश
कांग्रेस में कलह के पीछे दोनों उपमुख्यमंत्रियों का समर्थन
भोपाल। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्णयों पर मप्र के वरिष्ठ नेताओं द्वारा बार-बार उंगली उठाई जा रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पटवारी वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा कर ‘एकला चलो’ की नीति अपना कर केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष खुद को सक्षम और मप्र में खुद को कांग्रेस का सबसे बड़ा नेता बताने का प्रयास कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को उपेक्षित करने का प्रयास लगातार हुआ है। पटवारी ने प्रदेश अध्यक्ष बनते ही सबसे पहले प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर कमलनाथ को चुनौती दी थी। हालांकि कार्यकारिणी भंग करने के 10 महीने से अधिक समय तक वे अपनी कार्यकारिणी घोषित नहीं कर सके थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर कई नेता पटवारी से नाराज दिखे। प्रदेश भर से कई इस्तीफे भी हुए और विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, महापौर, पार्षद, जिला पंचायत पदाधिकारी सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हुए। अक्टूबर में जब पटवारी ने प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की तो अधिकांश बड़े नेता उनसे नाराज नजर आए। वहीं पूर्व नेता प्रतिपक्ष और विधायक अजय सिंह ने पटवारी को खुलकर चुनौती दी और कार्यकारिणी पर सवाल खड़े किए। 21 नवम्बर 2024 को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक का पार्टी के सभी बड़े नेताओं और प्रदेश कार्यकारिणी के कई सदस्यों ने अघोषित बहिष्कार किया। बीच-बीच में अजय सिंह, लक्ष्मण सिंह जैसे अन्य नेताओं ने भी मीडिया-सोशल मीडिया के माध्यम से पटवारी को चेतावनी पूर्ण समझाइश दी। लेकिन पटवारी की कार्यशैली नहीं बदली। इसीलिए दो दिन पहले नई दिल्ली में केन्द्रीय नेतृत्व की बैठक में मध्यप्रदेश से केन्द्रीय प्रतिनिधियों के लिए पटवारी द्वारा सौंपे गए नामों पर पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने आपत्ति ली। उन्होंने अपनी आपत्ति सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर व्यक्त करते हुए पटवारी द्वारा दिए गए गौरव रघुवंशी के नाम पर आपत्ति ली। उनकी आपत्ति के बाद केन्द्रीय प्रतिनिधियों की सूची को केन्द्रीय नेतृत्व ने रोक लिया है, और पटवारी द्वारा सौंपी गई सूची में बदलाव की भी संभावना है। लेकिन वरिष्ठ नेताओं से सलाह किए बिना लिए जा रहे निर्णयों ने पटवारी की मुस्किलें जरूर बढ़ा दी हैं।
पटवारी के विरोध के पीछे नाथ और दिग्गी!
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से जीतू पटवारी प्रदेश में अपनी अलग टीम खड़ी करते नजर आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के द्वार पर ढोक लगाने वाले कई नेता अब पटवारी के पाले में नजर आ रहे हैं। पटवारी के विरोध में इन दोनों ही नेताओं ने अब तक सार्वजनिक बयान या प्रतिक्रिया भलें नहीं दी है, लेकिन इनके समर्थकों द्वारा लगातार पटवारी के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। हालांकि सच यह भी है कि पटवारी द्वारा दूसरे बड़े नेताओं की अनदेखी और उपेक्षा के चलते पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन सहित कई नेता पटवारी से न केवल नाराज हैं, बल्कि मप्र में उनके नेतृत्व के विरोध में मप्र से लेकर दिल्ली तक माहौल भी बना रहे हैं।
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