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सदन में सरकार को घेरने में विफल रहा विपक्ष

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प्रदर्शन की औपचारिकता तक सिमटी संगठन की रणनीति 

भोपाल। मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस संगठन और पार्टी नेतृत्व द्वाारा किए गए पूर्व प्रयास और तैयारियां पूरी तरह विफल नजर आ रही हैं। हर दिन अलग-अलग मुद्दों पर विधानसभा परिसर में अलग ढंग से प्रदर्शन के अलावा पार्टी विधायक सदन में मजबूत उपस्थिति नहीं दिखा पा रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों मांडू में आयोजित हुए कांग्रेस पार्टी के ‘नव संकल्प शिविर’ में देशभर से पहुंचे प्रमुख नेताओं को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण शिविर में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दों पर भाजपा सरकारों को घेरने की रणनीति बनी। मप्र विधानसभा के मानसून सत्र से पहले हुए इस प्रशिक्षण शिविर में सत्र के दौरान मप्र सरकार को सडक़ से सदन तक घेरने के लिए विशेष रणनीति बनी। इसके तहत 10 दिवसीय सत्र अवधि में सदन के बाहर आकर्षक एवं आक्रामक ढंग से प्रदर्शन और सदन के अंदर प्रमुख राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार को बाध्य करने की रणनीति बनी थी। सदन के बाहर प्रतिपक्ष का प्रदर्शन जिस जोश और नवाचार के साथ शुरू हुआ, पांचवें दिन तक वह सिर्फ औपचारिकता नजर आने लगा। वहीं सदन में भी सेना और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर सरकार को घेरने के प्रयास में विपक्ष खुद कटघरे में नजर आया। 


प्रदेश प्रभारी के सामने ही फेल हुआ विपक्ष

प्रशिक्षण के बाद भी परिणाम नहीं आने पर विगत एक अगस्त को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी विधानसभा पहुंचे। उन्होंने पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के कक्ष में बैठकर पार्टी विधायकों की क्लास ली। इसके बाद दर्शक दीर्घा में बैठकर पार्टी विधायकों का प्रदर्शन देखा। प्रदेश प्रभारी की उपस्थिति में पार्टी विधायकों ने सदन में बढ़-चढक़र जोश दिखाने प्रयास जरूर किया, लेकिन वे श्री चौधरी को संतुष्ट नहीं कर पाए। उल्लेखनीय है कि मप्र में पार्टी संगठन की संरचना और आयोजनों से लेकर मप्र विधानसभा के प्रदर्शनों की रणनीति स्वयं श्री चौधरी तैयार कर रहे हैं। विगत मार्च महीने में बजट सत्र से लेकर वर्तमान मानसून सत्र के प्रदर्शनों की संरचना भी उन्होंने ही बनाई है।   


प्रदर्शन में शामिल नहीं हो रहे अधिकांश विधायक 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विधानसभा परिसर में किए जा रहे प्रदर्शनों में कांग्रेस के आधे से ज्यादा विधायक शामिल नहीं हो रहे हैं। उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे भी पिछले सत्रों की तरह मानसून सत्र में अब तक न तो प्रदर्शनों में ही नजर आए हैं और न ही सदन में उनकी आक्रामक भूमिका दिखाई दी है। विपक्ष के नाम पर विधानसभा में 65 कांग्रेसी विधायकों के अलावा भारतीय आदिवासी पार्टी के एक मात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार हैं। लेकिन सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में कांग्रेस को उनका साथ नहीं मिल रहा है।