राजधानी

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हमारी सरकार ने दिए साढ़े 23 हजार से अधिक पट्टे: मुख्यमंत्री

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विपक्ष का आरोप जनजातीय क्षेत्रों में निरस्त किए जा रहे वन अधिकार के आवेदन

भोपाल। मप्र विधानसभा के मानसून सत्र में जनजातीय मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे कांग्रेस विधायक दल ने सोमवार को ध्यानाकर्षण के माध्यम से जनजातीय पट्टों को निरस्त किए जाने का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक अजय सिंह और हीरालाल अलावा ने जनजातीय जिलों में वन अधिकार के दावेदारों के प्रकरण निरस्त करने, उन्हें बेदखल करने, खेती करने से रोकने एवं प्रताडि़त किए जाने का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि नेता नगर में 40 गांव के लगभग 3 हजार से अधिक दावे खारिज कर उन्हें खेती से रोका जा रहा है। उनके ट्रेक्टर, बैल, कृषि यंत्र छीने जा रहे हैं, जबकि वे पीढिय़ों से काबिज हैं। 

ध्यानाकर्षण के दौरान सदन में उपस्थित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष के आरोपों के जवाब में कहा, वर्ष 2000 तक खासकर कांग्रेस के शासनकाल में एक भी पट्टे नहीं दिए गए। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ही साढ़े 26 हजार पट्टे दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा, 2005 के पहले की स्थिति को ऑनलाइन करने जा रहे हैं। 2005 के पहले किसका कब्जा था, किसका नहीं, आसानी से पता चल जाएगा। सम्पूर्ण रिकार्ड पारदर्शी हो जाएगा। 


सेटेलाइट इमेजरी को भी बनाएंगे साक्ष्य: शाह 

जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा जनजातीय भाईयों को पूरे प्रदेश में पट्टे देने के लिए सेटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मप्र की मोहन सरकार पहली सरकार है, जिसने तय कर लिया है कि सेटेलाइट इमेजरी को भी साक्ष्य मानकर उसे पब्लिक डोमेन में डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि पट्टे दावे वैध और निरस्त करने के लिए दो प्रमाण  चाहिए। बुजुर्ग जनजातीय लोगों के सेटेलाइट इमेजरी डालेंगे। मप्र हिंदुस्तान का पहला राज्य होगा, जहां सेटेलाइट इमेजरी के माध्यम से जनजातियों को लाभान्वित किया जाएगा। 

उत्तर में मंत्री ने खारिज किया विपक्ष का आरोप 

उत्तर में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में करीब 2 लाख 30 हजार जनजातीय लोगों को 3.70  लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र में वन अधिकार पट्टे दिए गए हैं। अधिकार पत्र धारकों को 61 हजार 54, प्रधानमंत्री आवास, सिंचाई के लिए 55357 कपिल धारा कूप निर्माण तथा 24366 पत्र धारकों को विद्युत डीजल पंप दिए गए हैं। 58796 वन अधिकार पत्र धारकों के खेतों पर भूमि सुधार कार्य कराए गए हैं। एक लाख 86 हजार 131 वन अधिकार पत्र धारकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा 21 हजार 514 को किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। उन्होंने वन अधिकार के प्रकरणों को खारिज किए जाने को असत्य बताया। 

जनजातीय मुद्दे पर इन्होंने भी रखी बात 

अजय सिंह, डॉ. हीरालाल अलावा, मोहन सिंह राठौर, श्रीमती झूमा सोलंकी, फूलसिंह बरैया, सोहनलाल बाल्मीक, अभय मिश्रा, नारायण सिंह पट्टा, दिलीप अहिरवार, मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी पक्ष और विपक्ष की ओर से अपने-अपने विचार रखे। 


अध्यक्ष बोले-नेता प्रतिपक्ष हों या मुख्यमंत्री सबकी बात सुननी चाहिए

विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिंह ने नेता प्रतिपक्ष के संबोधन के बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा समय-सीमा में बात रखने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलते हैं, या मंत्री बोलते हैं तो एक सदस्य चुप हो जाता है। विजयवर्गीय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को अधिकार है कि सदन में कभी भी किसी भी समय बोल सकते हैं। लेकिन ध्यानाकर्षण के मामले में नियम परंपरा सबके लिए लागू है। चाहे वह मुख्यमंत्री हो या नेता प्रतिपक्ष। विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि सबके सहयोग से ही सदन अच्छे से चल पाता है। इसलिए अगर नेता प्रतिपक्ष या मंत्री या मुख्यमंत्री कोई भी बोले तो सबको उनकी बात सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने जो मुद्दा उठाया था वह सदन की परंपरा के हिसाब से उचित था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातियों के उत्कर्ष के लिए सरकार सबकी बात सुनने को तैयार है। विपक्ष भी इस मामले में अपने सुझाव दे सकता है।