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खनिज राजस्व से मालामाल होगा मध्यप्रदेश
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राज्यों से नीलामी का अधिकार छीनेगा केन्द्रीय खान और खनिज संशोधन विधेयक
भोपाल। संसद के दोनों सदनों में ध्वनि मत से पारित हो चुका खान और खनिज (विकास तथा विनियमन) संशोधन-2025 राज्यों से प्रमुख खनिजों की स्वमेव नीलामी का अधिकार छीनेगा। इसके बावजूद यह संशोधन राज्यों के हित में होगा। भू-गर्भ में अपार खनिज संपदा समेटे मध्यप्रदेश को इससे बड़ा फायदा होगा। न केवल राज्य व केन्द्र सरकार, बल्कि नीलामी से लेकर कारोबार तक पारदर्शी व्यवस्था चलते यह कानून ठेकेदारों और कंपनियों के हित में भी होगा।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में करीब आधा सैकड़ा से अधिक प्रमुख खनिजों की उपलब्धता है। यहां करीब आधा सैकड़ा से अधिक प्रमुख खनिजों की उपलब्धता है। कोयला, चूना पत्थर, हीरा, फ्लोराइड जैसे अन्य कुछ खनिजों में मध्यप्रदेश देश में पहले 10 राज्यों की सूची में शामिल है। हालांकि खनिज संपदा के पर्याप्त दोहन तक अभी राज्य नहीं पहुंच सका है। इस कारण अधिनियम संशोधन के बाद केन्द्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार न केवल भू-गर्भ में उपलब्ध खनिजों की उपलब्धता का सटीक अनुमान लगा सकेगी, बल्कि सरल और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया से खनिज कारोबार कई गुना तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
मप्र के भू-गर्भ में उपलब्ध प्रमुख खनिज संपदा
तांबा, मैग्नीज और हीरा उत्पादन में मप्र देश में पहले स्थान पर है। इसी तरह रॉक फास्फेट में दूसरे, चूना पत्थर में तीसरे और कोयला उत्पादन में चौथे स्थान पर है। इसके अलावा मप्र के भूगर्भ में लौह अयस्क, फ्लैगस्टोन, डोलोमाइट, लाइमस्टोन, मैंगनीज और ग्रेफाइट, ग्रेनाइट, लेड, जिंक, बॉक्साइट, गोल्ड, कॉल बेड मीथेन, रॉक फॉस्फेट डायस्पोर, पायरोफ्लाइट संगमरमर भी उपलब्ध। इसके अलावा एल्युमिनियम, लेटराइट, सोना सहित अन्य कई प्रमुख धातुएं उपलब्ध हैं।
प्रमुख खनिज मात्रा और देश में मप्र का स्थान
देश में कोयल का उत्पादन 3 लाख 61 हजार 411 मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश में 30 हजार 916 मेट्रिक टन कोयला भण्डार है, जो देश का 8 प्रतिशत है। इसी प्रकार चूना पत्थर देश में 19028.5 मैट्रिक टन है और मध्यप्रदेश में 1692 मिट्रिक टन है, जो देश का 9 प्रतिशत है। लौह अयस्क देश में 6209 और मध्यप्रदेश में 54.1 मीट्रिक टन है, जो देश का एक प्रतिशत है। इसी प्रकार तांबा देश में 163.9 मैट्रिक टन है। मध्यप्रदेश में 120.4 मीट्रिक टन है, जो देश का 73 प्रतिशत है। मैंगनीज अयस्क 75.0 मीट्रिक टन है। मप्र में 19.6 मिट्रिक टन है, जो देश का 26 प्रतिशत है। बॉक्साइट 640.5 मीट्रिक टन है और मप्र में 18.6 मीट्रिक टन है, जो देश का तीन प्रतिशत है। रॉक फॉस्फेट देश में 30.9 मैट्रिक टन रिजर्व है और मप्र में 9.0 मीट्रिक टन है, जो 29 प्रतिशत है।
केन्द्र सरकार करेगी राज्यों में नीलामी
राज्यों में मौजूद प्रमुख खनिजों (मेजर मिनरल) की नीलामी अब तक राज्य अपने स्तर पर करते थे। केन्द्रीय कानून में सशोधन के बाद अब इनकी ई-नीलामी केन्द्र सरकार करेगी। हालांकि खनिजों से मिलने वाला राज्यांश सभी राज्यों को लौटाया जाएगा।
ठेकेदारों/कंपनियां क्यों फायदे में?
नीलामी प्रक्रिया केन्द्रीयकृत और पारदर्शी होगी। इसके अलावा खानों में उपलब्ध खनिज की मात्रा का सटीक मूल्यांकन भी हो सकेगा। पट्टाधारक मौजूदा पट्टे में अगर दूसरा खनिज निकलता है तो अब खनन रोका नहीं आएगा, बल्कि पट्टाधारक राज्य सरकार को आवेदन कर बिना नीलामी के दूसरे खनिज के खनन की अनुमति प्राप्त कर सकेंगे। महत्वपूर्ण और कार्यनीतिक खनिजों, तथा अन्य निर्दिष्ट खनिजों को शामिल करने के लिए पट्टाधारक को कोई अतिरिक्त राशि का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इनमें लिथियम, ग्रेफाइट, निकल, कोबाल्ट, सोना और चांदी जैसे खनिज भी शामिल किए गए हैं। देश में खनिजों की पड़ताल के लिए राशि उपलब्ध कराने अन्वेषण ट्रस्ट बनाया जाएगा। कैप्टिव खानों (कंपनी के उपयोग के लिए एवं कंपनी के अधीन खानों) को अंतिम उपयोग की आवश्यकता के बाद, एक वर्ष में उत्पादित खनिजों का 50 प्रतिशत तक बेचने की अनुमति होगी। इस विधेयक से खनिजों की बिक्री की सीमा हटा जाएगी। विधेयक में खनिज एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान है।
‘केन्द्रीय खान और खनिज (विकास तथा विनियमन) संशोधन विधेयक के संबंध में विस्तृत जानकारी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन के बाद ही मिल सकेगी। हालांकि इससे मप्र के भू-गर्भ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध खनिजों का लाभ राज्य सरकार को भी मिलेगा।’
फ्रेंक नोबेल ए (IAS)
संचालक, खनिज, मप्र
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