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मध्यप्रदेश
मप्र में खारिज हुए वनाधिकार के 51 प्रतिशत दावे
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-लंबित दावों की संख्या भी 10 हजार से अधिक नहीं
भोपाल। वनाधिकार के तहत मप्र में 51 प्रतिशत दावे खारिज हुए हैं। वनाधिकार कानून के क्रियांवयन के मामले में यह आंकड़े तब सामने आए हैं जबकि सरकार पट्टों को लेकर फिर कवायद शुरू करने की तैयारी में है। बावजूद इसके लंबित 10 हजार दावों के इतर निरस्त हुए 3.22 लाख दावों के मामले में विचार की संभावना कम बताई जा रही है।
दरअसल केंद्र सरकार को दी गई जानकारी में सरकार ने बताया है कि वनाधिकार कानून के तहत 6.27 लाख दावे मिले थे। वर्ष 2006 से 2025 के बीच प्राप्त इन दावों में 2.94 लाख मान्य किये गए। जिसमें 0.27 लाख सामुदायिक व 2.66 लाख व्यक्तिगत हैं। इसके साथ 3.22 लाख दावे निरस्त किये गए हैं। जिसमें गुना में 22,890, सिंगरौली में 22,676 और सागर में 30,545 दावे खारिज किये गये हैं।
तकनीकि तय करेगी असली दावेदार
वनाधिकार पट्टों के दावेदारों में असली की पहचान अब तकनीकि से तय की जाएगी। इसके मद्देनजर पट्टों को मान्य या अमान्य करने के लिए कम से कम दो प्रमाण आवश्यक किये गये हैं। जिसमें 2005 की सैटेलाइट इमेजरी को मुख्य आधार बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बताया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिये हैं बेदखली के आदेश
फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को उन वनवासियों को बेदखल करने का निर्देश दिया था जिनके वन अधिकार आवेदन खारिज कर दिए गए थे। हलांकि वन विभाग सख्ती से इस आदेश का पालन नहीं करा पाया है। इसके पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप भी माना जा रहा है।
वन क्षेत्रों में अवैध कब्जे
प्रदेश के वन क्षेत्र अवैध कब्जे से जूझ रहे हैं। बुराहनपुर और नेपानगर इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आए है। हालांकि वन विभाग द्वारा बेदखली की कार्रवाई भी शुरू की गई बावजूद इसके विपक्ष के विरोध को देखते हुए इसमें तेजी नहीं आ पाई है। बताया जाता है कि अनावश्यक विवादों से बचने सरकार फिर लंबित दावों की समीक्षा करने की तैयारी शुरू कर चुकी है।
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