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मध्यप्रदेश
सरकार पर नहीं फंड, एजेंसियां भुगत रहीं अर्थदण्ड
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निजी एजेंसियों को मिल रही आउटसोर्स कर्मचारियों के पीएफ भुगतान में देरी की सजा
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के पास आउटसोर्स पर रखे गए लाखों कर्मचारियों के लिए वेतन और भविष्य निधि (ईपीएफ) राशि का मद तो है, लेकिन ईपीएफ में देरी पर नियमानुसार लगने वाले अर्थदण्ड की राशि के भुगतान का कोई मद नहीं है। आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं के बदले निजी एजेंसियों को विभागों से उनके वेतन और पीएफ राशि का भुगतान देरी से किया जा रहा है। इसलिए निजी एजेंसियां भी कर्मचारियों के खातों में समय पर भविष्य निधि राशि जमा नहीं कर पा रही हैं। इस कारण भविष्य निधि संघठन इन एजेंसियों पर भारी अर्थदण्ड लगा रहा है। विभाग से भुगतान में देरी बताकर एजेंसियों ने जब यह राशि अधिकारियों से मांगी तो विभागों के पास ऐसा कोई मद नहीं होने की बात कहकर अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। अब एजेंसियों को लाखों रुपये राशि अपनी जेब से भुगतनी पड़ रही है।
क्या है भविष्य निधि का नियम
नियोक्ता भविष्य निधि कार्यालय (ईपीएफओ) द्वारा 14 जून 2024 को जारी अधिसूचनाओं के बाद किसी भी शासकीय विभाग अथवा निजी एजेंसी अथवा कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों की भविष्य निधि महीने की 15 तारीख तक जमा किया जाना अनिवार्य है। एक भी दिन की देरी होने पर संबंधित सेवा कंपनी/एजेंसी पर अर्थदण्ड का प्रावधान है। छह माह में दो-दो माह की देरी के हिसाब से अर्थदण्ड का प्रतिशत भी बढ़ता जाएगा। 1 से 60 दिन की देरी पर 5 प्रतिशत, 61 से 120 दिन की देरी पर 10 प्रतिशत, 121 दिन से 180 दिन की देरी पर 15 प्रतिशत एवं 181 दिन अर्थात छह महीने से अधिक देरी पर प्रतिदिन के हिसाब से 25 प्रतिशत अर्थदण्ड लगेगा। कंपनी द्वारा कर्मचारियों के खाते में पीएफ की राशि जमा नहीं कराने पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन भादंवि की धारा 406/409 के तहत पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज करा सकता है और कंपनी के बैंक खाते भी बंद करा सकता है।
स्व-चलित सिस्टम से आता है अर्थदण्ड का मैसेज
कर्मचारी के पीएफ खाते में 15 तारीख तक राशि जमा नहीं होने पर भविष्य निधि संगठन लगातार संबंधित कंपनी को मेल आईडी पर अर्थदण्ड की राशि सहित लगातार मैसेज भेजता है। यह मैसेज स्व-चलित कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था से तैयार होकर अपने आप पहुंचता है। अर्थदण्ड सहित कुल राशि की गणना भी कम्प्यूटर स्वयं ही करता है। जानकारी के अनुसार प्रदेशभर की सैकड़ों की संख्या में निजी एजेंसियों के पास भविष्य निधि संगठन के मैसेज पहुंच रहे हैं। विभाग भुगतान में देरी की बात तो स्वीकार रहे हैं, लेकिन अर्थदण्ड मद नहीं होने की बात कहकर इस राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
शासन ने तय की वेतन भुगतान की तारीख
राज्य शासन ने हाल ही में सभी शासकीय कार्यालयों, निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन दिलाने की पहल की है। एक हजार से कम आउटसोर्स कर्मचारी वाले शासकीय कार्यालयों, निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में उनका वेतन भुगतान प्रत्येक माह की 7 तारीख तक एवं एक हजार से अधिक कर्मचारी संख्या वाले कार्यालयों में 10 तारीख तक भुगतान किया जाना अनिवार्य किया गया है। किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी को निर्धारित समय सीमा में वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति में शिकायत के लिए वॉट्सअप नंबर भी जारी किया है। शासन के इस आदेश से भी कई आउटसोर्स एजेंसियां परेशान हैं।
‘यह मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से संबंधित है। लेकिन अगर इसमें श्रम विभाग से संबंधित कोई परेशानी है तो संबंधित एजेंसी मुझे बताएं, उनका हर प्रकार से सहयोग करेंगे। ’
जैसमीन अली सितारा
सहायक श्रम आयुक्त, मप्र भोपाल
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