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मध्यप्रदेश

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नगरीय निकायों से छह साल में नहीं वसूले जा सके 383 करोड़

मध्यप्रदेश

शासन के आदेश खूंठी पर टांग, मनमानी करते रहे मप्र के नगरीय निकाय, लोकल ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी 

भोपाल। मध्यप्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर परिषदों में आर्थिक अनियमितताओं के साथ-साथ शासन के आदेशों की आव्हेलना का मामला भी संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा से उजागर हुआ है। वर्ष 2019-20 के वार्षिक संपरीक्षा प्रतिवेदन में कई प्रकार की गड़बडिय़ों, अनियमितताओं और घोटालों को उजागर किया गया है। प्रतिवेदन के अनुसार निकाले गए अवशेष संपरीक्षा शुल्क 383 करोड़, 56 लाख 89 हजार 194 रुपये की वसूली शासन अब तक नहीं कर सका है। 

वास्तविक आय से अधिक किया खर्च 

नगर पालिक निगम बुरहानपुर, जबलपुर, कटनी, सागर और रीवा ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में वास्तविक आय से कहीं अधिक राशि खर्च की। ननि बुरहानपुर की वास्तविक आय 162.15 करोड़ की आय के विपरीत 183.46 करोड़ अर्थात 21.30 करोड़ अधिक, जबलपुर ने 547.09 करोड़ के विपरीत 600.70 करोड़ अर्थात 53.60 करोड़ अधिक, कटनी में 86.62 करोड़ के विपरीत 95.68 करोड़ अर्थात 9.05 करोड़ अधिक, सागर में 232.43 करोड़ की अपेक्षा 261.79 करोड़ अर्थात 29.36 करोड़ अधिक और न.नि. रीवा ने 214.31 करोड़ वास्तविक आय की अपेक्षा 225.68 करोड़ अर्थात कुल 11.37 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की। ननि. सागर, नप ब्यावरा, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी और बिजावर ने विगत वर्षों में लक्ष्य से कम आय अर्जित की। 

आय-व्यय के बाद बैंकों में कम मिली राशि 

नगर निगम खंडवा,जबलपुर, छिंदवाड़ा, देवास और रीवा की लेखापरीक्षा में वित्तीय वर्ष 2018-19 में गंभीर अनियमितता सामने आईं। ऑडिट में सामने आया कि इन नगर निगमों की रोकड़बही और बैंक स्टेटमेंट के अनुसार जमा राशि में बड़ा अंतर मिला। ननि खंडवा के खाते में 9.80 करोड़, जबलपुर में 46.43 करोड़, छिंदवाड़ा में 1.56 करोड़, देवास में 22.62 करोड़ और नगर निगम रीवा में 1.16 करोड़ से अधिक राशि का अंतर मिला। 

किस श्रेणी के निकायों पर कितना बकाया

मप्र के संपरीक्षित नगर पालिक निगमों पर 239 करोड़, 10 लाख, 45 हजार 819 रुपये, नगर पालिका परिषदों पर 97 करोड़, 65 लाख, 87 हजार 08 रुपये और नगर परिषदों पर 46 करोड़, 80 लाख, 56 हजार 367 रुपये शेष बताया गया। हालांकि इस गणना में 50 लाख से कम राशि वाले निकाय शामिल नहीं किए गए। 

इन संपरीक्षित निकायों में नहीं हो सकी करोड़ों की वसूली 

- संचित निधि (लोगोपयोगी स्कीम निधि) में 130,75,30, 627 रुपये कम जमा

- संपत्तिकर राशि 904,93,44,712 रुपये की वसूली नहीं। 

- समेकित कर की राशि 261,62,58,667 नहीं वसूली नहीं। 

- विकास उपकर 65,94,56,555 रुपये की वसूली नहीं

- शिक्षा उपकर की राशि 104,72,90, 720 रुपये की वसूली नहीं। 

- विविध आय राशि 20,70,56,715 रुपये की वसूली नहीं। 

- जलदर की राशि 672,89,89,815 रुपये की वसूली नहीं। 

- स्थावर संपत्तियों से किराए की राशि 21,48,58,332 रुपये की वसूली नहीं। 

- निकायों की दुकानों की नीलामी/आवंटन समय पर नहीं होने से 96,71,23,113 रुपये का घाटा। 

- चैक अनादृत (बाउंस) होने से 4,08,35,283 रुपये की आर्थिक क्षति। 

- मांग राशि को कम कर अग्रेसित करने से 2,01,854 रुपये की क्षति। 

- बाजार ठेकों में देरी, अनुबंध शर्तों का पालन नहीं होने से 76,38,415 रुपये का नुकसान। 

- मोबाइल कंपनियों से टॉवर की वसूली में लापरवाही से 1,84,74,883 की क्षति। 

- विविध आय मदों में 21,92,75,461 रुपये की संभावित आर्थिक क्षति। 

- कर्मचारियों द्वारा वसूली राशि लम्बे समय तक निजी उपयोग में लेने से 68,58,101 रुपये का घाटा। 

-  53, 01,15,557 रुपये का अनियमित भुगतान। 

- वेतनभत्ता एवं अन्य मदों में पात्रता से 66,89,998 रुपये अधिक भुगतान। 

- निर्माण कार्यों में 1,41,02, 864 का अधिक भुगतान। 

- निकायों में 15,21,568 रुपये का दोहरा भुगतान। 

- विज्ञापनों पर निर्धारित सीमा से 1,11,29,592 रुपये अधिक खर्च राशि की वसूली नहीं।  

- सार्वजनिक स्वागत, मनोरंजन, प्रदर्शनी पर सीमा से अधिक 1,03,30,347 रुपये अधिक खर्च। 

- दमकल एवं निर्वाचन कार्य पर व्यय राशि 4,71,25, 161 रुपये की प्रतिपूर्ति नहीं हो सकी। 

- केन्द्र व राज्य के अधिरोपित करोड़ों का कटौत्रा नहीं किए जाने से 2, 16,63,503 रुपये का राजस्व घाटा। 

- केन्द्र व राज्य के अधिरोपित करों की कटौत्रा राशि 10,15,74,813 रुपये जमा नहीं। 

- अवशेष संपरीक्षा शुल्क राशि 3,83,56,89,154 रुपये जमा नहीं हो सकी। 

‘प्रदेशभर के नगरीय निकायों को शत-प्रतिशत वर्तमान एवं लंबित राशि की वसूली किए जाने के निर्देश दिए हैं। निकायों को एक पत्र भी जारी कर रहे हैं, जिसमें प्रतिवर्ष के अंत में स्थानीय स्तर पर ऑडिट कराए जाने के निर्देश दिए जाएंगे। सभी निकायों को हर वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट संचालनालय को भेजनी होगी। ’

संकेत भोंडबे 

आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मप्र