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मध्यप्रदेश

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छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहा आधार कार्ड का संशोधन

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महीनेभर से ज्यादा लम्बी हुई राजपत्र की प्रतीक्षा सूची, बोर्ड फार्म की तिथि करीब 

भोपाल। मध्यप्रदेश के हजारों छात्र आधार कार्ड सेंटर द्वारा की गई गलती से परेशान और भविष्य के लिए चिंतित हैं। आधार कार्ड बनाते समय नाम, उपनाम, पिता के नाम या जन्मतिथि में हुई गलती में संशोधन नहीं कराया गया तो 10वीं, 12वीं बोर्ड परीक्षा की मार्कसीट भी उसी गलती के साथ जारी होगी। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के फार्म की सामान्य शुल्क की तिथि 15 सितम्बर को निकल चुकी है, और विलंब शुल्क के साथ जारी है। जबकि सीबीएसई के फार्म की अंतिम तारीख 30 सितम्बर और विलंब शुल्क के साथ 10 अक्टूबर है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी बोर्ड फार्म में असंशोधित नाम भरे जाने से अपने भविष्य के लिए परेशान हैं।  

नाम संशोधन के एक महीने पुराने आवेदन लंबित

आधार कार्ड में नाम संशोधन से पहले राजपत्र में नाम संशोधन अधिसूचना प्रकाशन आवश्यक है। आधार कार्ड में नाम की शाब्दिक या मात्रा की गलतियों के लिए भी आधार कार्ड सेंटर बिना अधिसूचना के नहीं सुधार रहे हैं। जबकि राजपत्र में अधिसूचना के सैकड़ों आवेदन शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय में लंबित हैं। एक महीने पुराने आवेदनों पर अधिसूचना प्रकाशन के लिए एक महीने बाद भी नंबर नहीं आ रहा है। ऐसी स्थिति में कई छात्रों के फार्म संशोधन के बिना ही भरे गए हैं। 

ज्यादातर गलतियां नाम और उपनाम में 

आधार कार्ड बनाते समय ज्यादातर गलतियां नाम, उपनाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और पते की होती हैं। नाम-उपनाम में शाब्दिक अर्थात स्पेलिंग की बहुत छोटी गलती पर भी आधारकार्ड सेंटर बिना अधिसूचना के संशोधित करने से मना कर देते हैं। जबकि पहली बार आधार कार्ड बनाते समय बच्चों के नाम, उपनाम, घरेलू नाम के अलावा नाम के साथ कुमार, कुमारी, सिंह लगाए जाने हटाए जाने जैसे संशोधन आम हैं, लेकिन आधार कार्ड सेंटर ही नहीं, क्षेत्रीय कार्यालय भी बिना अधिसूचना के इसमें संशोधन नहीं करता है।

नियमों में संशोधन का अधिकार यूआईडीएआई के पास 

आधार कार्ड के लिए अधिकृत केन्द्रीय संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के नियमों के हिसाब से ही प्रत्येक राज्य में आधार कार्ड संशोधन के लिए राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन का नियम अनिवार्य किया गया है। कई छोटे संशोधनों के लिए भी अधिसूचना प्रकाशन की अनिवार्यता समाप्त करने का अधिकार भी इसी संस्था के पास है। राज्य के पास इसके अधिकार नहीं होने से भी यह परेशानी बढ़ी है। 

‘बोर्ड परीक्षा फार्म भरने वाले विद्यार्थियों के लिए उनकी अंतिम तिथि के हिसाब से प्लानिंग करेंगे। अभियान चलाकर इन विद्यार्थियों की अधिसूचना प्रकाशन का प्रयास करेंगे, जिससे उन्हें असुविधा और परेशानी न हो। ’

चन्द्रशेखर वालिम्बे, आईएएस 

नियंत्रक शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल