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ग्वालियर-चम्बल के मावा-पनीर पर राजधानी में नजर

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त्यौहार से पहले मिठाई की गुणवत्ता को लेकर सतर्क हुआ प्रशासन 

भोपाल। दीपावली से पहले राजधानी में नकली मावा से बनी मिठाईयों को लेकर भोपाल जिला प्रशासन एक बार फिर से सतर्क हो गया है। त्यौहार पर आपूर्ति से अधिक मांग बढऩे की स्थिति में शहर में नकली मावा से बनी मिठाई और पनीर न खपाया जा सके, इसलिए दूसरे शहरों खासकर ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना से आने वाले मावा और पनीर पर नजर रखी जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि होली, दीपावली, रक्षाबंधन जैसे त्यौहारों पर मिठाईयों की मांग सामान्य दिनों से कई गुना अधिक बढ़ जाती है। इसके अलावा दूध से बने पनीर की मांग भी बहुत अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में ज्यादा मुनाफे के लालच में नकली मावा-पनीर माफिया सक्रिय हो जाता हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन सहित मप्र के अन्य शहरों में हर साल त्यौहारों से पहले बड़ी मात्रा में नकली मावा और पनीर पकड़ा जाता रहा है। अधिकतर मामलों में पकड़ा गया पनीर-मावा ग्वालियर-चम्बल से भेजा गया होता है। इसलिए इस क्षेत्र से आने वाले नकली सामान पर प्रशासन की विशेष नजर होती है। 

पिछले साल पकड़ा था सौ क्विंटल नकली मावा 

खाद्य विभाग की टीम ने वर्ष 2024 में त्यौहारों पर विशेषकर दिवाली और होली से पहले की गई कार्रवाई में भोपाल में करीब सवा सौ क्विंटल मावा पकड़ा था। परीक्षण के बाद करीब सौ क्विंटल मावा नकली पाया गया था। 16 अक्टूबर 2024 को सबसे अधिक 16 क्विंटल आईएसबीटी बस स्टैण्ड पर खड़ी एक बस की डिग्गी से और 25 अक्टूबर 2024 को आगरा से आया 10 क्विंटल नकली मावा रेलवे स्टेशन परिसर में मिनी ट्रक से जब्त किया था। रक्षाबंधन से पहले 20 अगस्त 2024 को भी ईटखेड़ी पुलिस ने 20 क्विंटल और 10 जुलाई 2024 को बजरिया क्षेत्र से 36 क्विंटल मावा लावारिश हालत में जब्त किया था। 

कैसे बनता है नकली मावा

घटिया गुणवत्ता के मिल्क पाउडर, टेलकम पाउडर, चूना, चॉक और सफेद केमिकल्स, दूध में यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर और घटिया गुणवत्ता का वनस्पति घी मिलाकर नकली मावा बनाया जाता है। सिंथेटिक दूध बनाने के लिए मामूली वॉशिंग पाउडर, रिफाइंड तेल, पानी और शुद्ध दूध को मिला दिया जाता है। इस प्रक्रिया से एक लीटर शुद्ध दूध से 20 लीटर सिंथेटिक दूध बनकर तैयार हो जाता है। इस दूध से मावा तैयार होता है। कुछ लोग मावा में शकरकंद, सिंघाड़े का आटा, मैदा या आलू भी मिलाते हैं। वजन बढ़ाने के लिए आलू और स्टार्च मिलाया जाता है। 

इस तरह करें नकली मावा की पहचान

मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें, अगर यह पानी छोड़े तो यह नकली है। 2 ग्राम मावा को 5 एमएल गरम पानी में घोल लें और ठंडा होने दें। इसके ठंडा होने के बाद इसमें टिंचर आयोडीन डालें। मावा नकली होगा तो इसका रंग नीला हो जाएगा। नकली मावा को जीभ के नीचे रखने पर यह चिपक जाता है, क्योंकि इसे बनाने में स्टार्च या खाद्य तेल जैसी चीजों का उपयोग होता है। मावा सूखा होने पर इसके अशुद्ध होने की संभावना अधिक होती है। 

‘दीपावली से पहले अभियान चलाकर नकली और मिलावटी मावा और पनीर पकडऩे की कार्योजना तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा नागरिकों को नकली खाद्य पदार्थों की पहचान और सामान्य परीक्षण की जानकारी भी दे रहे हैं।’

पंकज श्रीवास्तव, 

खाद्य सुरक्षा अधिकारी, भोपाल