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मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री बोले कानून-व्यवस्था कलेक्टर की पहली जिम्मेदारी, घटना या दुर्घटना, मौके पर तत्काल पहुंचें
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सरेंडर न करें, ऐसे नक्सलियों को अगले छह महीने में करें नेस्तनाबूत
भोपाल। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर बुधवार दोपहर राजधानी में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के कानून व्यवस्था पर आयोजित अंतिम सत्र में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिलाधीशों को निर्देशित करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था कलेक्टर की पहली जिम्मेदारी है। जिले में कोई भी घटना-दुर्घटना हो, उन्हें तत्काल घटना स्थल पर पहुंचना है। मुख्यमंत्री ने अगले छह महीने में मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स जिले के प्रशासनिक मुखिया होने के साथ-साथ जिला दण्डाधिकारी भी हैं, इसीलिए जिले में कानून व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करने की पहली जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में खुद का प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करें, ताकि किसी भी घटना या दुर्घटना की सूचना तत्काल प्राप्त हो और समय पर नियंत्रण किया जा सके। कोई भी घटना या दुर्घटना की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचे। इससे घटना या दुर्घटना और अधिक बड़ा रूप नहीं लेंगी। कलेक्टर एवं एसपी दोनों में उच्च कोटि का तालमेल होना चाहिए। दोनों संयुक्त रूप से कार्ययोजना बनाकर जिले की कानून व्यवस्था की निगरानी रखें।
संवेदनशील बस्तियों, सकरी सडक़ों को करें चिहिन्त
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था के दृष्टिगत ऐसी संवेदनशील बस्तियां जहां सडक़ें सकरी हैं, तथा फोर्स मूवमेंट में समस्या आती है, सभी कलेक्टर ऐसे स्पॉट्स/जगहों को चिन्हित कर वहां का जोनल प्लान स्थानीय नगरीय निकायों के सहयोग से अगले तीन माह में तैयार कर लें, ताकि आवागमन सुगम हो और आवश्यकता पडऩे पर फोर्स मूवमेंट में समस्या न आए। उन्होंने मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए ठोस रणनीति बनाने के भी निर्देश दिए। अंतिम सत्र का संचालन अपर मुख्य सचिव गृह विभाग श्री शिवशेखर शुक्ला ने किया। सत्र में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना भी उपस्थित रहे।
नक्सल प्रभावित तीन जिलों को केन्द्रित करें
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मध्यप्रदेश को मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त करने के दृष्टिगत 6 माहों में बालाघाट, मण्डला और डिण्डोरी जिलों के कलेक्टर्स और एसपी लक्ष्य केंद्रित कर यह काम पूरा करें। नक्सली घटनाओं को समाप्त करने के लिए हर संभव कार्यवाही करें। नक्सली या तो सरेंडर करें अन्यथा उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।
नशा कारोबार रोकने पड़ोसी जिलों से करें समन्वय
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ड्रग्स के अवैध कारोबार एवं नशे पर अंकुश लगाने के लिए पड़ौसी राज्यों के साथ समन्वय करते हुए हर स्तर पर नशे को प्रतिबंधित किया जाए। इसी कड़ी में कोरेक्स कफ सिरप के अतिशय उपयोग को भी नियंत्रित किया जाए। इंडस्ट्रियल बेल्ट में कलेक्टर-एसपी तालमेल करके बारीक निगाहे रखें। शेड्यूल एच ड्रग्स ओवर द काउंटर ना बिकें और सभी दवाइयों का हिसाब भी फार्मासिस्ट अनिवार्य रूप से रखें। अपराधों में संलिप्त आदतन अपराधियों की जमानत निरस्त की जाएं। साइबर अपराधों के खिलाफ भी कार्रवाई में तेजी लाएं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सभी कलेक्टर व एसपी स्पॉट जीआईएस मैपिंग कर विस्तृत कार्ययोजना बनाएं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति की संभावना ही न रहे।
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