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मध्यप्रदेश

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सडक़ पर मौतों के आंकड़े घटना सरकार का लक्ष्य: मुख्यमंत्री

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सडक़ सुरक्षा उपायों पर राजधानी में हुई प्रदेश स्तरीय कार्यशाला 

भोपाल/मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सडक़ दुर्घटनाओं में हो रही जनहानि को रोकने के लिए ठोस कदम उठा रही है। प्रदेश में लगभग 9 हजार किलोमीटर लंबाई के राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जहां दुर्घटनाओं की दर अधिक है। हमारा लक्ष्य है सडक़ हादसों में होने वाली मौतों को न्यूनतम करना और मध्यप्रदेश को ‘सुरक्षित यात्रा राज्य’ के रूप में स्थापित करना। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को राजधानी के आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय अकादमी में सडक़ सुरक्षा उपायों और सडक़ सुरक्षा के मूल सिद्धांतों (डीडीएचआई) पर केन्द्रित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि सडक़ सुरक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को आदर्श राज्य के रूप में प्रस्तुत करें। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सडक़ पर जिम्मेदार नागरिक बनिए। स्पीड में गाड़ी चलाकर हीरो बनने की जरूरत नहीं, नियमों का पालन करने वाला ही असली हीरो है। सरकार सडक़ सुधार सकती है, हेलमेट बांट सकती है, नियम-कानून बना सकती है, लेकिन गाड़ी का हेंडल और ब्रेक तो आपके हाथ में है। 

सडक़ें प्रदेश के विकास की रीढ़: मंत्री राकेश सिंह

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सडक़ों को किसी भी प्रदेश के विकास की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इनके बिना आर्थिक और सामाजिक प्रगति संभव नहीं है। जैसे-जैसे सडक़ें आधुनिक और तेज़ रफ्तार यातायात के अनुकूल बन रही हैं, वैसे-वैसे सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विभाग ने सडक़ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण को प्राथमिकता दी है। 

जीरो डेथ रोड सेफ्टी मिशन पर हो रहा काम: मुख्य सचिव 

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अपने संबोधन में कहा कि सडक़ सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा से जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। हेलमेट और सीटबेल्ट चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए पहनें। उन्होंने बताया कि अमेरिका में भारत की तुलना में अधिक एक्सीडेंट होते हैं, लेकिन वहां मौतों का प्रतिशत बहुत कम है, क्योंकि लोग नियमों का पालन करते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के पांच प्रमुख विभाग मिलकर ‘जीरो डेथ रोड सेफ्टी मिशन’ पर काम कर रहे हैं। उन्होंने समाज से भी अपील की कि वे सडक़ सुरक्षा के प्रति सजग रहें और दूसरों को जागरूक करें। श्री जैन ने बताया कि देश में होने वाली लगभग 53 प्रतिशत दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। यदि हेलमेट का सही उपयोग किया जाए तो 60 प्रतिशत जानें बचाई जा सकती हैं। 

अधिकांश दुर्घटनाओं का कारण मानवीय त्रुटि: प्रो. वेंकटेश 

आईआईटी मद्रास के सडक़ सुरक्षा विशेषज्ञ एवं मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम में स्वतंत्र संचालक प्रोफेसर (डॉ.) वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने बताया कि जहां अधिकांश दुर्घटनाएं मानवीय त्रुटियों के कारण होती हैं, वहीं लगभग 3 प्रतिशत दुर्घटनाएँ सडक़ डिजाइन, ज्यामिति और संकेतकों की कमी जैसी अवसंरचनात्मक कमियों से जुड़ी होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इन कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर तकनीकी सुधारात्मक कदम उठाए जाएं जिससे दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग, एमपीआरडीसी, पुलिस, स्वास्थ्य संस्थान और जिला प्रशासन के बीच साझा डेटा से ब्लैक स्पॉट की सटीक पहचान और त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव होगी। यह पहल ‘हर मोड़ को सुरक्षित’ बनाने के राज्य सरकार के संकल्प को और सशक्त बनाएगी। प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी सुखवीर सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। 

एप्लीकेशन ‘संजय’ का किया शुभारंभ, एमओयू भी हुए 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट का बटन दवाकर सडक़ सुरक्षा के आधुनिक उपायों पर आधारित एडवांस एप्लीकेशन ‘संजय’ का शुभारंभ किया। कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग एवं मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम लिमिटेड द्वारा आईआईटी मद्रास और सेव लाइफ फाउंडेशन के साथ डीडीएचआई और सडक़ सुरक्षा प्रबंधन पर दो अलग एमओयू हस्ताक्षरित कर परस्पर आदान-प्रदान किये गये। इस अवसर मुख्यमंत्री ने आईआईटी मद्रास द्वारा तैयार की गई ‘सडक़ सुरक्षा शिक्षा प्रणाली’ पुस्तक एवं ‘रोड सेफ्टी’ रिपोर्ट का विमोचन भी किया साथ ही सडक़ सुरक्षा से जुड़े आधुनिक एवं उन्नत उपकरणों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यशाला में सचिव, परिवहन मनीष सिंह, प्रबंध संचालक, एमपीआरडीसी भरत यादव, परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में सडक़ सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला सडक़ सुरक्षा समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि कार्यशाला से वर्चुअली जुड़े।