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आपतकाल के संस्मरण-पिता-पुत्र दोनों ने काटी आपातकाल की जेल
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आपातकाल के विरोध में आंदोलन कर दी गिरफ्तारी
भोपाल। आपातकाल के विरोध में संघ की ओर से आंदोलन का आह्वान हुआ तो स्वयंसेवक बढ़-चढक़र हिस्सा लेने लगे। वर्ष 1975 के अक्टूबर महीने में एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का राजधानी के सुभाष मैदान में आंदोलन के लिए एकत्रीकरण का संदेश मिला। आंदोलन आरंभ होते ही श्री गौर का भाषण शुरू हुआ तो पहले से तैयार खड़ी पुलिस ने मैदान में उपस्थित आधा सैकड़ा से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। कुछ देर थाने में लिखा-पढ़ी हुई, इसके बाद सभी को मीसा की धाराएं लगाकर जेल भेज दिया। कुछ दिन बाद पिताजी स्व. उद्धवदास मेहता को भी गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया।
आपातकाल के हालातों के संस्मरण सुनाते हुए 86 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) ओमप्रकाश मेहता बताते हैं कि आपातकाल में कोई मानवाधिकार या नियम कानून नहीं था। अधिकारों और पुलिस अत्याचारों के लिए जिसने आवाज उठाई उसे जेल में ठूंसा गया।
मायके लाकर पत्नी को घर छोड़, मैं जेल गया
आपातकाल के खिलाफ समाज में आक्रोश पनप रहा था। जेपी आंदोलन अपने चरम पर था। इस बीच संघ की ओर से आंदोलन का आह्वान हो चुका था। मैं पत्नी को ससुराल (रतलाम) से लेकर लौटा ही था कि सुबह-सुबह बाबूलाल गौर का संदेश पहुंचा। पत्नी को घर छोड़ मैं सुभाष मैदान पहुंचा और आंदोलन के बाद सीधा जेल भेज दिया गया। आपातकाल की समाप्ति के बाद ही जेल से मुक्ति मिल सकी।
भोपाल के पहले नगर संघचालक थे पिता
श्री मेहता बताते हैं कि उनके पिता स्व. उद्धवदास मेहता भोपाल जिले के पहले नगर संघचालक थे। उनके पूरा परिवार ही संघ कार्य के लिए समर्पित था। इसीलिए आपताकाल लगने के बाद पुलिस की निगाह उनके परिवार पर पहले से थी। पहले मुझे, फिर पिताजी को भी जेल भेजा। चूंकि उन्हें कैंसर था इस कारण 15 दिन में मुक्त कर दिया गया। गिरफ्तारी भाई की भी हुई, लेकिन किसी तरह वे थाने से ही छूट गए थे।
संयुक्त परिवार बना परिजनों का सहारा
मेहता बताते हैं कि जब आपातकाल में जेल गया, परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा खराब नहीं थी। मैंने वकालत भी शुरू कर दी थी। विवाह को 9 साल हो चुके थे। चूंकि संयुक्त परिवार था, इसलिए मेरी पत्नी और 3 साल की बड़ी बेटी का ख्याल अन्य परिजनों ने अच्छे से रखा। जेल में हमें भी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। दोनों बेटियों का विवाह हो चुका है। पत्नी श्रीमती मंगला मेहता के साथ महल, लवानिया रोड चौक, भोपाल में निवासरत हैं।
तीथ स्थान-मेला प्राधिकरण में रहे उपाध्यक्ष
श्री मेहता बताते हैं कि राज्य सरकार ने उन्हें अगस्त 2012 में मध्यप्रदेश तीथ स्थान एवं मेला प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनकार राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। वे इस पद पर करीब डेढ़ साल तक रहे।
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