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शीत सत्र में विधायकों को मिलेंगे लंबित प्रश्नों के उत्तर
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जानकारी एकत्र करने के बहाने अधिकारी उत्तर नहीं भेजते, ताकि न खुल सकें राज
भोपाल। विभागीय कामकाज में अनियमितताओं और गड़बडिय़ों से संबंधित अथवा उलझन भरे जिन प्रश्नों के उत्तर अधिकारी देना नहीं चाहते, उन्हें जानकारी एकत्रित किए जाने के नाम पर टालने का प्रयास करते हैं। हालांकि बार-बार लंबित रखे जाने के बावजूद विधानसभा में पूछे गए हर प्रश्न का उत्तर मंत्री के माध्यम से देने के लिए विभाग बाध्य होता है। विगत सत्रों के ऐसे ही लंबित कई प्रश्नों के उत्तर इस बार शीतकालीन सत्र में विधायकों को मिलने वाले हैं। मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के निर्देश पर सचिवालय सभी लंबित प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराए जाने के आदेश जारी कर चुका है।
लंबित प्रश्नों पर बैठक में जताई थी नाराजगी
विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने अधिकारियों की बैठक लेकर यह स्पष्ट किया था कि विधायकों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर पहुंचाने में देरी नहीं होनी चाहिए। इस तरह की पेंडेंसी अच्छी नहीं है। उन्होंने विधानसभा में दिए गए आश्वासनों पर कार्यवाही को लेकर भी जरूरी निर्देश दिए थे। विधानसभा के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की इस बैठक में अध्यक्ष तोमर ने कहा था कि विधायकों की सबसे अधिक शिकायत होती है कि वे जो जानकारी सरकार से विधानसभा के माध्यम से लेना चाहते हैं उसका जवाब समय पर नहीं मिलता और प्रश्नों के उत्तर की पेंडेंसी बढ़ती जाती है। इसलिए अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है ताकि इस स्थिति को ठीक किया जा सके। उन्होंने कहा था कि आश्वासनों पर अमल नहीं होने की शिकायत विधायक करते हैं।
शीत सत्र के लिए विभागों पर पहुंच रहे प्रश्न
एक से 5 दिसम्बर के बीच आयोजित मप्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों को विधानसभा सचिवालय ने विभागों को भेजना शुरू कर दिया है। विगत 4 से 7 नवम्बर के बीच ऑनलाइन और ऑफलाइन पूछे गए प्रश्नों के उत्तर सत्र के दौरान अलग-अलग निर्धारित तिथियों तक सचिवालय के पास पहुंचने हैं। लॉटरी सिस्टम से चयनित अधिकतम 25 तारांकित प्रश्नों के उत्तर सदन में मंत्री से लिए जा सकेंगे। शेष सभी प्रश्नों के उत्तर सदस्यों को लिखित में प्राप्त होंगे।
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