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राजधानी

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एसआईआर में नहीं मिल रहा महिलाओं का रिकार्ड

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प्रशासन की तैयारी अधूरी, अधिकारी बीएलओ-सुपरवाईजर पर बना रहे का दबाव

भोपाल। मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं का रिकार्ड खोजने में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। ऐसे प्रकरण जिनमें महिला विवाह के पूर्व मतदाता नहीं थीं, उनके जिले और प्रदेश भी बदल चुके हैं, परिसीमन के बाद विधानसभा का नाम व क्रमांक बदल चुके हैं अथवा जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की साइट पर उनके माता-पिता का इपिक नंबर नहीं मिल पा रहा है। बड़ी संख्या में ऐसी महिला मतदाताओंं के एसआईआर के फार्म बीएलए, बीएलओ और सुपरवाइजर भी नहीं खोज पा रहे हैं। लेकिन कलेक्टर कौशलेन्द्र सिंह के निर्देश पर उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बीएलओ और सुपरवाइजर दोनों को सख्त चेतावनी के साथ प्रतिदिन १५० एसआईआर फार्म संकलित कर ऑनालइन करने के निर्देश दिए हैं। 

सीईओ की साइट से नहीं मिल रहा रिकार्ड

एसआईआर फार्म हेतु २००३ का रिकार्ड खोजने के लिए प्रशासन ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मप्र की साइट का लिंक जारी किया है। लेकिन इस साइट पर २००३ का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है। अधिकांश मतदाता इस साइट से २००३ की मतदाता सूची और उसमें स्वयं और माता-पिता का इपिक नंबर नहीं खोज पा रहे हैं। फार्म नहीं भर पाने के कारण बीएलओ फार्म संकलित नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन अधिकारी इसके लिए लगातार दबाव बनाए हैं। 

बीएलए एसआईआर में नहीं ले रहे रुचि

चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बूथ लेबल एजेंट (बीएलए) एसआईआर में बीएलओ और मतदाताओं का सहयोग नहीं कर रहे हैं। बीएलए को घर-घर पहुंचकर एसआईआर फार्म भरवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चूंकि बीएलए को इस काम के लिए किसी तरह का मानदेय या सहयोग नहीं मिलना है। इसलिए वे इस काम में रुचि नहीं ले रहे हैं। हालांकि कुछ राजनीतिक दल अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं को इस काम में लगा रहे हैं। 

नेमप्लेट और मकान नंबर नहीं कैसे हो पहचान 

एसआईआर के फार्म लेकर कॉलोनियों-मोहल्लों में घूम रहे बीएलओ को सबसे अधिक परेशानी नाम व पते खोजने में हो रही है। अधिकांश मकानों के सामने उनके नंबर और नेमप्लेट नहीं लगे हैं। ऐसी स्थिति में फार्म के अनुसार एक-एक घर को तलाशने में लम्बा समय लग रहा है। भोपाल के कई मुस्लिम मतदाता विगत ५ दिनों से इत्जिमा में चले गए, इसलिए अनुपस्थिति में परिजनों ने उनके संबंध में जानकारी देने से मना  करते रहे। प्रतिक्रिया हेतु उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।