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मध्यप्रदेश

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उज्जैन आरटीओ कार्यालय में वाहन भार घोटाला, 16 चक्का वाहनों को बांटी 55 टन भार की अनुमतियां

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- साढ़े सात टन अधिक ज्वलनशील सामान लादकर 4 साल तक सडक़ों पर दौड़ते रहें टेंकर 

भोपाल। कोरोना काल के उत्तरार्ध में उज्जैन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में बड़ा घोटाला सामने आया है। अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ का परिवहन करने वाले आधा दर्जन से अधिक 16 चक्का वाहनों को नियम विरुद्ध 55 टन भार परिवहन की अनुमति दे दी गई। चार साल तक क्षमता से अधिक भार लादकर ये वाहन दुर्घटना को न्यौता देते रहे, जबकि उज्जैन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय इस भारी गड़बड़ी के साथ हर साल इन नेशनल परमिट वाहनों के पंजीयन अनुज्ञा एवं हर दो साल में इनके फिटनेस का नवीनीकरण भी करता रहा। 

इन वाहनों की बढ़ाई गई भार क्षमता 

एमपी 13 एच 8818: पंजीयन 14 जून 2021 (वाहन में परिवर्तन) 

एमपी 13 एच 1115 पंजीयन 8 अक्टूबर 2021 (वाहन श्रेणी परिवर्तन) 

एमपी 13 एच 1114 पंजीयन 14 सितम्बर 2021 (वाहन श्रेणी परिवर्तन)

एमपी 13 एच 1099 पंजीयन 20 जुलाई 2021 (वाहन में परिवर्तन) 

एमपी 13 एच 1098 पंजीयन 20 जुलाई 2021 (वाहन में परिवर्तन) 

एमपी 13 एच 1068 पंजीयन 8 जून 2021(वाहन में परिवर्तन) 

कुछ अन्य ट्रक भी अतिरिक्त भार के साथ पंजीयन हुए हैं।   

रजिस्ट्रेशन अथवा अल्ट्रेशन में की गई गड़बड़ी 

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय उज्जैन ने वर्ष 2021 में 4825 मॉडल की जिन 6 गाडिय़ों को मय वाहन भार के 47.5 टन के स्थान पर 55 टन में पास किया है। उनमें चार गाडिय़ों में बाद में परिवर्तन (अल्ट्रेशन) किया गया है, जबकि दो गाडिय़ों का श्रेणी (कैटेगरी) परिवर्तन हुआ है। ऐसे में संभावना है कि आरटीओ कार्यालय ने पंजीयन के समय वाहनों को मॉडल के अनुसार और बाद में 7.5 टन बढ़ाकर यह गड़बड़ी की गई है। खास बात यह है कि इस तरह की गड़बड़ी मप्र उज्जैन के अलावा अन्य किसी भी आरटीओ कार्यालय में नहीं हुई।  

आरटीओ बोले स्मार्ट चिप की गलती 

आपके द्वारा भेजे नंबर वाली सभी गाडिय़ों की फाइलें देखी हैं। किसी प्रकार का आदेश नहीं मिला है। स्मार्ट सिप कंपनी ने संभवत: जब डाटा अपलोड के दौरान यह गलती की हो, जिसे आज ही सुधरवा रहे हैं। हालांकि इससे शासन को राजस्व हानि नहीं हुई, क्योंकि गाडिय़ों का लाइफ टाइम टैक्स जमा किया जाता है। परिवहन विभाग से 55 टन वजन पर पास होने के बावजूद मॉडल और टायर के हिसाब से कंपनी/पार्टी को इन गाडिय़ों में 47.5 टन से अधिक माल नहीं भर सकतीं। किसी भी राज्य में ओवरलोड जाने पर इन पर कार्रवाई हो सकती है। इस प्रकरण में वाहन पंजीयन शाखा प्रभारी की जांच करा लेता हँू। अगर कोई देषी पाया जाएगा, कार्रवाई करेंंगे। 

गलती नहीं, घोटाला है, कार्रवाई क्यों नहीं? 

सभी वाहनों का मॉडल नंबर स्पष्ट होने के बावजूद 47.5 टन के स्थान पर 55 टन पास किया जाना कोई मानवीय या मशीनी भूल नहीं है, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और वाहन मालिक की मिलीभगत से हुआ बड़ा घोटाला है। वाहन क्षमता से साढ़े सात टन अधिक  भार परिवहन का उज्जैन आरटीओ कार्यालय से जारी प्रमाण पत्र लेकर गाडिय़ां सवा चार साल तक सडक़ों पर दौड़ती रहीं, हर फेरे में साढ़े सात टन अतिरिक्त माल का परिवहन हुआ। इससे शासन को राजस्व घाटा तो हुआ ही, क्षमता से अधिक भार के कारण इनसे सडक़ दुर्घटना की संभावना अधिक थी। 

सडक़ पर दौड़ता आग का गोला थे ये वाहन? 

नागदा के जिन छह वाहनों (टेंकरों) को उज्जैन आरटीओ कार्यालय से 7.5 टन अतिरिक्त भार परिवहन की अनुमति मिली है, उन सभी में अत्यंत ज्वलनशील (मल्टन सल्फर) का परिवहन होता है। क्षमता से अतिरिक्त भार के चलते सडक़ दुर्घटना की संभावना में ऐसे वाहनों को आग का गोला बनते देर नहीं लगती।   

 परिवहन आयुक्त ने दिए जांच के निर्देश 

मामला परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा के संज्ञान में आते ही उन्होंने उप परिवहन आयुक्त किरन शर्मा को मामले की तुरंत जांच के निर्देश दिए हैं।