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राजनीति

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‘बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर एक विचार’ संगोष्ठी

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विशाल व्यक्तित्व के राष्ट्रपुरुष थे बाबा साहब अंबेडकर

संगोष्ठी को केन्द्रीय मंत्री मेघवाल और डॉ. सप्रे ने किया संबोधित 

भोपाल। ‘बाबा साहब एक बहुआयामी, विशाल व्यक्तित्व वाले राष्ट्रपुरुष थे। उनके व्यक्तित्व को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने सिर्फ संविधान की रचना ही नहीं की, बल्कि देश को कई ऐसे विचार दिये, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी हमारे लिए उपयोगी हैं।’ यह बात केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने बुधवार को जेके हॉस्टिपटल कम्युनिटी हॉल, कोलार में पुरूषार्थ सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित संविधान निर्माता भारत रत्न ‘बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर एक विचार’ विषय पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। 

संगोष्ठी में संबोधित करते हुए प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय टोली के सदस्य डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर विकसित भारत के लिए कार्य कर रहे थे। बाबा साहब ने हर वर्ग के कल्याण और सामाजिक समरसता के लिए कार्य किया।


पं. नेहरू की तुष्टिकरण की नीति से दुखी थे बाबा साहब 

केंद्रीय मंत्री श्री मेघवाल ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने जब नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया, तो अपने इस्तीफे की वजहें भी लिखी थीं। लेकिन उस पत्र को गायब कर दिया गया। उस पत्र में डॉ. अंबेडकर ने पं. नेहरू से कहा था कि देश के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज के साथ आपका व्यवहार ठीक नहीं है। आप मुस्लिमों पर अत्याचार की चिंता करते हैं, लेकिन आपको दलितों, आदिवासियों के साथ हो रहा अन्याय दिखाई नहीं देता। पत्र में लिखा है कि आपकी विदेश नीति ठीक नहीं है। आपने ओबीसी कमीशन बनाने की बात कही थी, लेकिन वो भी गठित नहीं हुआ। इसके अलावा जिस तरह से आपने संसद में हिंदू कोड बिल वापस लिया, उससे मैं दुखी हूं और मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रहा हूं। श्री मेघवाल ने कहा कि 1952 में हुए पहले लोकसभा के चुनाव में बाबा साहब ने बॉंबे नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ा था। लेकिन बाबा साहब वो चुनाव लगभग दस हजार वोटों से हार गए थे। उस सीट पर निरस्त किए जाने वाले वोटों की संख्या 74333 थी, जो देश में सबसे ज्यादा थी। बाबा साहब के खिलाफ षडयंत्र की पुष्टि एक और तथ्य से भी होती है। चुनाव के बाद पं. नेहरू ने लेडी माउंटबेटन को लिखे पत्र में बाबा साहब की चुनावी हार का जिक्र करते हुए लिखा था-टुडे आई एम हैप्पी। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर बहुमुखी व्यक्तित्व वाले थे। 


संघ की शाखाओं में अपनापन महसूस करते थे बाबा साहब 

केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा कि बाबा साहब की 100 वीं जयंती के अवसर पर पांचजन्य ने एक विशेषांक निकाला था, जिसमें बाबा साहब के व्यक्तित्व का संपूर्ण चित्रण था। छात्र जीवन में बाबा साहब पुणे के भावे स्कूल और अन्य स्कूलों में लगने वाली संघ की शाखाओं में भी जाते थे। एक बार डॉ. हेडगेवार के स्थान पर बाबा साहब ने बौद्धिक भी दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने एक सभा में सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि संघ की शाखाओं में उन्हें अपनापन महसूस होता है। श्री मेघवाल ने कहा कि भाजपा ने बाबा साहब को सम्मान दिया।  कांग्रेस ने निजी स्वार्थों के लिए संविधान संशोधन किए। 


वर्तमान भारत के निर्माण में डॉ. अम्बेडकर का अमूल्य योगदान-डॉ. सप्रे 

प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय टोली के सदस्य डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर विकसित भारत के लिए कार्य कर रहे थे। बाबा साहब ने हर वर्ग के कल्याण और सामाजिक समरसता के लिए कार्य किया। श्रमिकों को आठ घंटे के कार्य का नियम बाबा साहब के प्रयासों से शुरू हुआ। डॉ. बाबा साहब को मानने वाले बहुत लोग हैं। उन लोगों से पैसा इकठ्ठा करके प्रिटिंग प्रेस बनाई। जितने भी मजदूर और कर्मचारी क्षेत्र में सुविधाएं दिख रही है उसको प्रारंभ करना ही बाबा साहब की सबसे बड़ी भूमिका रही है। विद्यार्थियों के बीच बाबा साहेब सबसे ज्यादा लोकप्रिय थे क्योंकि जहां भी विद्यार्थियों को परेशानी आती थी उनकी सहायता करते थे। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने जो संविधान हमको सौंपा है उसके हिसाब से कोई बड़ा कोई छोटा नहीं है और कोई ऊंचा-नीचा नहीं होता। संगोष्ठी को जेएनसीटी यूनिवर्सिटी के कुलपति जयनारायण चौकसे ने भी संबोधित किया। मंच का संचालन भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव ने किया एवं आभार जेएनसीटी के संचालक अनुपम चौकसे ने व्यक्त किया।