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28 साल बाद महिला को 2 साल का कारावास
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फर्जी दस्तावेजों से ओबीसी महिला ने प्राप्त की थी अजा कोटे की नौकरी
भोपाल। अनुसूचित जाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य फर्जी दस्तावेज बनवाकर पुरातत्व विभाग में सरकारी नौकरी पाने वाली अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला को भोपाल जिला न्यायालय ने दो वर्ष के कठोर सश्रम कारावास एवं 9 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।
सहायक लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती गुंजन गुप्ता ने बताया कि मामला 28 साल पुराना है, जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भोपाल कृष्णकांत बागरे ने भोपाल के नेहरू नगर में रहने वाली महिला सपना वर्मा को धारा 420, 468, 471 भादंवि में दोषी सिद्ध पाते हुए धारा 420 भादंवि में दो वर्ष के कठोर सश्रम कारावास एवं दो हजार रुपये अर्थदण्ड, धारा 468 भादंवि में 2 वर्ष का कठोर सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपये का अर्थदण्ड एवं धारा 471 भादंवि में एक वर्ष का कठोर सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपये अर्थदण्ड से दंडित करने का निर्णय पारित किया है। इस तरह तीनों धाराओं में कारावास की सजा एक साथ एवं अर्थदण्ड अलग-अलग देना होगा।
महिला ने इस तरह किया फर्जीवाड़ा
आरोपी महिला सपना वर्मा ‘बारी’ जाति की महिला है, जो राज्य शासन के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है। लेकिन उसने खुद को कोरी जाति की बताकर वर्ष 1988-89 में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र तैयार कराया। उसने इस प्रमाण पत्र के आधार पर उसने जिला रोजगार कार्यालय, भोपाल में खुद को अनुसूचित जाति की महिला के रूप में दर्ज कराया। 11 फरवरी 1993 को अजा/अजजा के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विशेष भर्ती अभियान के अंतर्गत पुरातत्व एवं संग्रहालय, मप्र भोपाल में रोजगार कार्यालय से उसका नाम अजा सूची में भेजा गया। 26 मई 1995 को उसकी नियुक्ति हुई और 1 जून 1993 को उसने सरकारी पद पर कार्यभार संभाल लिया। इसकी लिखित शिकायत रामदास गुप्ता नामक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री से की थी। जांच में दोषी पाए जाने पर सपना वर्मा के विरुद्ध 24 मई 1995 को पुलिस में भादंवि की धारा 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोपी विद्यालय एवं महाविद्यालय की अंकसूची सहित जाति संबंधी दस्तावेजों की जांच में भी वह अन्य पिछड़ा वर्ग की पाई गई। जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ भी की गई। कूटरचित दस्तावेजों को बनवाने के लिए उसके हाथ से लिखे एवं हस्ताक्षर वाले दस्तावेज भी जब् किए गए। जांच के बाद आरोपी सपना वर्मा के विरुद्ध धारा 420, 468 के तहत 2 जून 1997 को अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
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