मध्यप्रदेश

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सरकारी पेंशन खातों में 44 लाख का घोटाला, ईओडब्ल्यू ने सात पर दर्ज की एफआईआर

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भोपाल। मध्यप्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने सरकारी पेंशन खातों में 44 लाख रुपये के घोटाले की जांच के बाद सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। जांच में सामने आया कि बैंक ऑफ इंडिया के दो कर्मचारियों ने तीन साल तक निष्क्रिय खातों को अवैध रूप से सक्रिय कर 44.11 लाख रुपये का गबन किया। 

मंगलवार, 9 दिसम्बर को ईओडब्ल्यू ने आरोपी दीपक जैन, अजय सिंह परिहार, खुशबू खान, अफरोज खान, ललिता ठाकुर, कल्पना जैन, हेमलता जैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। साथ ही अन्य संभावित सहयोगियों की जांच जारी है। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, आईटी एक्ट के तहत पहचान और डेटा का दुरुपयोग, साइबर धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।  

बैंक की शिकायत पर हुई कार्रवाई 

ईओडब्ल्यू ने बैंक ऑफ इंडिया, भोपाल जोन से मिली शिकायत के आधार पर इस मामले की जांच की। जांच में पाया गया कि बैंक कर्मचारी दीपक जैन (स्पेशल असिस्टेंट) और अजय सिंह परिहार (स्टाफ क्लर्क) ने योजनाबद्ध तरीके से खातों में हेराफेरी की। दोनों ने फिनाकल सिस्टम में अपनी और सहकर्मियों की लॉगइन आईडी का दुरुपयोग कर 212 से अधिक निष्क्रिय खातों को सक्रिय किया। इन खातों में शासन की सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राहत राशि और अन्य सरकारी सहायता जमा होती थी। सक्रिय होने के बाद इन खातों से रकम चार परिचितों खुशबू खान, अफरोज खान, ललिता ठाकुर और कल्पना जैन के खातों में अंतरित की गई। सभी एटीएम कार्ड आरोपी दीपक जैन के पास थे और इन्ही एटीएम से नकद निकासी की जाती रही। करीब 44.11 लाख रुपये को आरोपियों ने 70.30 के अनुपात में बांटा। 

इस तरह पकड़ा गया घोटाला 

8 मार्च 2019 को सैफिया कॉलेज शाखा में एक महिला ने शिकायत की कि उसके मृत पति के खाते से अवैध निकासी हुई है। शाखा प्रबंधक ने आंतरिक जांच की, जिसमें लेनदेन दीपक जैन और अजय सिंह परिहार द्वारा किए जाने की पुष्टि हुई। यह मामला जब ऊपरी स्तर पर पहुंचा, तो बैंक की विजिलेंस और विभागीय जांच में कई शाखाओं में लगातार हेराफेरी के प्रमाण मिले।

जांच में यह तथ्य आए सामने 

ईओडब्ल्यू ने फिनेकल लॉग, एटीएम, निकासी रिकॉर्ड, सीसीटीव्ही फुटेज और राशि अंतरण रिपोर्ट की जांच की। इसमें पाया गया कि 64 खाते दीपक जैन ने अपने सहकर्मियों की आईडी का दुरुपयोग कर खुद सक्रिय किए। जनवरी 2016  से मार्च 2019 तक तीन वर्षों में घोटाला कई शाखाओं में चलता रहा। आरोपियों के निजी खातों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकद जमा पाई गई। बैंक के मानक संचालन नियमों का भारी उल्लंघन किया गया। पर्यवेक्षी नियंत्रण बेहद कमजोर पाया गया। ईओडब्ल्यू ने कहा कि यह केवल बैंकिंग अनियमितता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहचान के दुरुपयोग, सिस्टम में घुसपैठ और साइबर धोखाधड़ी का गंभीर मामला है।