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कांग्रेस ने दिल्ली में उठाया सिंगरौली जिले में पेड़ों की कटाई मामला
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-संविधान, पर्यावरण और जनजाति अधिकारों के हनन के आरोप
भोपाल। सिंगरौली जिले के सुलियारी और धिरौली गांव में अडानी समूह को कोल ब्लॉक आवंटित किए गए हैं। आवंटित क्षेत्र में कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। जहां बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई और लोगों को विस्थापित किया गया है। स्थिति का जायजा लेने के लिए कांग्रेस का एक दल पिछले दिनों सिंगरौली पहुंचा। कांग्रेसियों ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सिंगरौली मामले में उठाया। आरोप लगाए कि सिंगरौली में संविधान, पर्यावरण और जनजाति अधिकारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। कांग्रेस इस मामले को लेकर अब न्यायालय जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रविवार को पार्टी के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में कहा कि जहां एक ओर माँ के नाम पर एक पेड़ लगाने का अभियान चलाया गया है, वहीं दूसरी ओर कार्पोरेट घरानों को लाखों पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा रही है। मप्र के सिंगरौली जिले में अडानी समूह को खनन हेतु सुलियारी और धिरौली कोल ब्लॉकों का आवंटन इसी दोहरे चरित्र का प्रमाण है, जहाँ बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई और आदिवासी समुदायों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सिंगरौली की स्थिति का जायजा लेने के लिए कांग्रेस की समिति जब सिंगरौली पहुँची तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। कड़े विरोध और जनदबाव के बाद ही समिति को पीडि़तों से मिलने की अनुमति दी गई।
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में देश के संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहां पर्यावरण, वाइल्ड लाइफ और जनजाति से जुड़े सारे नियम और कानूनों को तोड़ा जा रहा है। प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी जनजाति आबादी और जंगल का भू-भाग मप्र में है। मप्र में कानून है कि किसी जनजाति की जमीन कोई गैर-आदिवासी नहीं खरीद सकता, लेकिन 1,46,000 हेक्टेयर जमीन खनन के लिए अलग-अलग लोगों को दे दी गई। सरकार ने पिछले 4 साल में जनजातियों की 1,30,000 हेक्टेयर जमीन बेच दी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि सिंगरौली का यह मामला केवल एक जिले या एक राज्य का नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान, पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
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