मध्यप्रदेश

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मासूमों के पोषण आहार में फर्जीवाड़े के खुलासे से परेशान डीपीओ बोलीं गड़बड़ी पर मैं न प्रतिक्रिया दूंगी और न ही कोई जानकारी

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भोपाल/ग्वालियर। ग्वालियर जिले की आंगनबाडियों में पूरक पोषण आहार के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े के खुलासे से महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी परेशान हैं। इस घोटाले पर प्रतिक्रिया एवं भोजन वितरण करने वाले स्व-सहायता समूहों की जानकारी मांगे जाने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) श्रीमती उपासना राय बोलीं, मैं न तो किसी भी तरह की जानकारी दूंगी और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया ही दूंगी। 

उल्लेखनीय है कि समूहों की आड़, ठेकेदार गटक रहे मासूमों का पोषण आहार’ शीर्षक से बच्चों के पोषण आहार में खुलासे को विगत दिवस उजागर किया गया है, जिसमें मासूम बच्चों के ‘पूरक पोषण आहार’ की सप्लाई ठेकेदारों द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को ठेके पर लेकर की जा रही है। आंगनबाडियों में पहुंच रहे बच्चों की वास्तविक संख्या अधिक दर्शाकर और दिए जा रहे भोजन की मात्रा उसी अनुपात में दर्शाकर सीधे तौर पर ठेकेदारों को अनुचित भुगतान कराया जा रहा है। 

12 बजे के बाद साथ पहुंची लप्सी, दाल-चावल

इस घोटाले के खुलासे के बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने न जांच की और न ही कार्रवाई। जबकि सोमवार को परियोजना शहरी क्र.-5 के गुढ़ा क्षेत्र की आंगनबाडिय़ों पर पहुंचने वाले नाश्ता और भोजन की स्थिति बहुत ही खराब मिली। दोपहर 12 बजे के बाद पीले ऑटो में ठेकेदार का कर्मचारी सुबह के नाश्ते की लप्सी और भोजन के रूप में चावल और पतली दाल लेकर पहुंचा। जबकि नियम से नाश्ते का समय सुबह 9 से 9.30 और भोजन का समय दोपहर 12 से 12.30 बजे का होता है। विभागीय मीनू के अनुसार सोमवार को नाश्ते में प्रति बच्चे के अनुपात में 100 ग्राम लप्सी और 140 ग्राम सब्जी, दाल और रोटी पहुंचनी थी। लेकिन ठेकेदार ने मीनू से सब्जी और रोटी गायब कर दाल-चावल कर दिया। 

फर्जी उपस्थिति के लिए अधिकारियों का दबाव! 

आंगनबाडिय़ों में 3-6 वर्ष के 80 प्रतिशत उन बच्चों की उपस्थिति दर्शाई जाती है, जिन्होंने कभी आंगनबाड़ी की चौखट पर पैर नहीं रखा। इस उम्र के ज्यादातर बच्चे स्कूल जाते हैं। चूंकि क्षेत्र के सभी बच्चों के नाम कार्यकर्ता द्वारा सर्वे कर आंगनबाड़ी में दर्ज किए जाते हैं। लेकिन इनकी दैनिक उपस्थिति नहीं होती है, फिर भी इनके नाम पोषण आहार लेने वाले बच्चों की सूची में दर्ज करने ही पड़ते हैं। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऐसा करने के लिए पर्यवेक्षक एवं सहायक परियोजना अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव होता है। भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और पोषण आहार तालिका के अनुसार नहीं आने पर ठेकेदार से सवाल करने पर अधिकारी उन्हीं पर कार्रवाई की धमकी देते हैं। 

महीने में 15 दिन भी नहीं आता खाना

गुढ़ा क्षेत्र में डांग वाले बाबा की पहाड़ी पर स्थित आंगनबाड़ी के सामने रहने वाले सुनील भदौरिया ने बताया कि कुत्ते-बिल्ली के कारण ऑटो वाला इस आंगनबाड़ी का खाना उन्हीं के घर पर रखकर जाता है। महीने में 15 दिन भी नाश्ता-भोजन नहीं आता। भोजन सामग्री, गुणवत्ता और मात्रा के नाम पर यहां सिर्फ दाल-दलिया और चावल आते हैं । मीनू में उल्लेखित बेज पुलाव, सांभर आज तक नहीं देखे। खीर सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को आती है। आज (सोमवार को) आंगनबाड़ी पर नाश्ता-भोजन नहीं आया।