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रात 8 बजे चढ़ता है पतीला, रात 12 बजे मासूमों का भोजन तैयार, ठेकेदार की गुप्त रसोई में आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए अवैध रूप से पकता है गुणवत्ताहीन भोजन
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भोपाल/ग्वालियर। महिला एवं बाल विकास विभाग के स्थानीय अधिकारियों की सांठगांठ से ग्वालियर जिले में पोषण आहार के नाम पर चल रहे गड़बड़झाले का खुलासे के बाद 300 से अधिक आंगनबाडिय़ों पर भोजन पहुंचाने वाले ठेकेदार की रसोई शहर के मोतीझील क्षेत्र में एक गुप्त और सुरक्षित स्थान पर संचालित होती मिली। ठेकेदार की इस रसोई में हर अगले दिन का पोषण आहार तैयार करने की तैयारी रात 8 बजे से शुरू होती है और रात 12 बजे तक भोजन बनकर तैयार हो जाता है। सुबह 6 बजे यहां से कुल 9 ऑटो रिक्शा स्टील की बरनियों में भोजन लेकर आंगनबाडिय़ों पर निकल जाते हैं। प्रत्येक ऑटो को 10-10 बरनियां दी जाती हैं, जिनके माध्यम से प्रतयेक को 35-40 आंगनबाडिय़ों में खाना पहुंचाना होता है।
साफ-सफाई न सुरक्षा, न ही ठेकेदार पर फूड लायसेंस
आंगनबाड़ी के सैकड़ों बच्चों के लिए अवैध रूप से भोजन तैयार कर रहे इस ठेकेदार की रसोई में न तो साफ-सफाई है और न ही सुरक्षा के ही प्रबंध हैं। रसोई में पेवर ब्लॉक लगे हैं, जहां पर्याप्त गंदगी मौजूद है। खाना बनाते समय हलवाई न सिर पर हेयर नेट पहनते हैं और न ही सफाई का ध्यान रखते हैं। स्व-सहायता समूह की महिलाओं के स्थान पर पूडिय़ां बेलने के लिए यहां मशीन मौजूद है। दाल-दलिया, चावल और खिचड़ी के लिए बड़े आकार के एल्यूमिनियम के भगोने और पकाने के लिए आधा दर्जन से अधिक व्यवसायिक गैस सिलेण्डर यहां हर समय उपलब्ध होते हैं। प्लास्टिक की टंकी में भरे बोरिंग के पानी से भोजन तैयार होता है। खास बात यह है कि 300 से अधिक मासूमों के लिए यहां भोजन तैयार हो रहा है, लेकिन ठेकेदार के पास न तो फूड लायसेंस (एफएसएसएआई) है और न उसका विभाग में पंजीयन है। ऐसे में दूषित भोजन से संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रुप पर लिखा पत्रकार को न दें समूह की जानकारी
आंगनबाडिय़ों पर पोषण आहार के नाम पर चल रहा फर्जीवाड़ा उजागर न हो सके, इसके लिए विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि केन्द्र पर किसी को भी समूह अथवा केन्द्र के बारे में जानकारी न दें। कुछ सुपरवाईजर ने कार्यकर्ताओं के वॉट्सअप गु्रप पर मैसेज डलवाया है, जिसमें लिखा है, ‘कोई भी आंगनबाड़ी केन्द्र पर कोई पत्रकार आये तो अपने समूह का नाम नहीं बताना है, और न ही कोई अपने केन्द्र के बारे में जानकारी देना है।’ खुलासे के बाद सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया कि वे बच्चों को बैठाकर खाना खाते हुए फोटो और वीडियो बनाकर भेजें।
खीर-पूड़ी, मूंगबड़ी, सब्जी गायब, मिले दाल-चाबल
आंगनबाड़ी की पोषण आहार तालिका के अनुसार मंगलवार को नाश्ते में पौष्टिक खिचड़ी और दोपहर भोजन में खीर-पूड़ी, मूंगबड़ी, आलू-टमाटर की सब्जी दी जानी थी। लेकिन 300 से अधिक आंगनबाडिय़ों पर भोजन पहुंचाने वाले ठेकेदार ने इस मंगलवार को नाश्ता और भोजन के नाम पर सिर्फ दाल-चावल ही भेजे। वहीं शहरी क्रमांक 1 के सेक्टर-2 में स्थित बहोड़ापुर क्षेत्र की आंगनबाडिय़ों पर एक अन्य ठेकेदार ने आलू की सब्जी, पूड़ी और रवे का हलवा भेजा।
श्वान भी सूंघकर छोड़ गया यह हलवा
बहोड़ापुर क्षेत्र के वार्ड क्र. 4 की आंगनबाड़ी से लिए गए हलवे के नमूने को जब बारी-बारी से अलग-अलग श्वानों के सामने रखा गया, तो सभी श्वानों ने उसे सूंघा, लेकिन खाया नहीं। हमारे पास इसका वीडियो भी मौजूद है। अनुमान लगाया जा सकता है कि आंगनबाडिय़ों में मासूमों को परोसे जा रहे इस भोजन की गुणवत्ता कैसी होगी।
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