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मध्यप्रदेश
निगम मंडलों की सूची तैयार, जारी होने का इंतजार, संगठन स्तर पर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद बनी सहमति
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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार सरकार जल्द ही निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित अन्य पदों पर नियुक्तियों की सूची जारी कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि संगठन स्तर पर सभी स्थानीय नेताओं से चर्चा के बाद राज्य स्तर के निगम-मंडलों और स्थानीय स्तर के प्राधिकरणों में नियुक्ति के लिए नाम तय हो चुके हैं। संभवत: इसी सप्ताह सरकार की ओर से सूची जारी हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि मप्र में बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन चुनाव, जिला एवं प्रदेश कार्यकारिणी के बाद राष्ट्रीय स्तर भी कार्यकारी अध्यक्ष का सर्वसम्मति से निर्वाचन हो चुका है। माना जा रहा था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद मप्र में निगम-मंडलों में नियुक्तियां कर दी जाएंगी। हाल में प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसके संकेत दे चुके हैं।
सरकार का हिस्सा बनेंगे प्रमुख नेता,कार्यकर्ता और पूर्व जनप्रतिनिधि
निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में सरकार पार्टी के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं, संगठन के छूटे हुए पूर्व पदाधिकारियों और कुछ ऐसे नेताओं को शामिल करेगी, जो दावेदार होते हुए भी टिकट नहीं पा सके। कांग्रेस से भाजपा में आने वाले और चुनाव हार जाने वाले कुछ पूर्व मंत्री-विधायक भी इसमें शामिल किए जाएंगे। हालांकि सभी निगम-मंडलों की सूची एक साथ आने की संभावना कम ही है। यह नियुक्तियां अलग-अलग सूचियों के माध्यम से जारी की जा सकती है।
हर दिन पार्टी कार्यालय पहुंच रहे कार्यकर्ता
निगम-मंडलों में नियुक्ति के लिए वरिष्ठ नेताओं से सिफारिश लगाए बैठे कई कार्यकर्ता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से मिल रहे हैं। कार्यकर्ता अपने राजनीतिक बायोडाटा और पार्टी एवं विचार के लिए समर्पण की पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ स्वयं की दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं। प्रदेशभर से कार्यकर्ता हर दिन निगम-मंडलों की सूची जारी होने की तारीखें भी पूछ रहे हैं।
निगम-मंडलों के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार
निगम-मंडलों में नियुक्ति के बाद मप्र सरकार के मंत्रि-मंडल का विस्तार भी हो सकता है। कुछ मंत्रियों को हटाए जाने तथा कुछ वरिष्ठ विधायकों को मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है। हालांकि अधिकांश मंत्रियों के विभाग बदले जाने की पर्याप्त संभावना है। मुख्यमंत्री के पास मौजूद प्रमुख विभाग भी वरिष्ठ मंत्रियों को सौंपे जा सकते हैं।
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