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पेड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना भी हो सकता है सडक़ निर्माण कार्य, एनजीटी ने भोपाल के अयोध्या बायपास पर पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक
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भोपाल। भोपाल के अयोध्या बायपास पर प्रस्तावित 10 लेन सडक़ परियोजना के लिए 8 से 12 हजार पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। हालांकि एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना सडक़ निर्माण का कार्य जारी रह सकता है।
राजधानी भोपाल में अयोध्या बायपास पर आसाराम तिराहा (करोंद रोड) से रत्नागिरी तिराहा तक करीब 16 किलोमीटर लंबे फोरलेन के चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित हजारों पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, सडक़ निर्माण कार्य पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। एनजीटी ने साफ किया है कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना निर्माण कार्य जारी रह सकता है। एनएचएआई द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 8 से 12 हजार पेड़ों को हटाने की योजना बनाई गई थी। मंगलवार से कटाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन पर्यावरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के बाद अगले ही दिन हृत्रञ्ज ने इस पर रोक लगा दी।
पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का आरोप
इस मामले में याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सक्सेना ने आरोप लगाया कि सडक़ निर्माण से पहले तय पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भोपाल पहले ही बीआरटीएस, स्मार्ट सिटी, कोलार सिक्सलेन और मेट्रो जैसी परियोजनाओं में लाखों पेड़ खो चुका है। हर बार पौधरोपण का दावा किया गया, लेकिन जमीन पर उसके परिणाम नजर नहीं आते।
वैकल्पिक योजना और क्षतिपूर्ति पर सवाल
याचिकाकर्ता पक्ष के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने एनजीटी को बताया कि पूर्व आदेशों के बावजूद अब तक ऐसी कोई केंद्रीय सशक्त समिति गठित नहीं की गई, जो कम से कम पेड़ों की कटाई के विकल्पों पर विचार कर सके। इसके अलावा काटे गए वृक्षों की भरपाई और रोपित पौधों को पांच साल तक जीवित रखने की स्पष्ट योजना भी प्रस्तुत नहीं की गई है।
8 जनवरी को अगली सुनवाई, तब तक पूरी तरह रोक
एनजीटी ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए 8 जनवरी 2026 तक पेड़ों की कटाई पर पूर्ण रोक लगा दी है। अगली सुनवाई इसी तारीख को होगी। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिए हैं कि जब तक समिति की बैठक के मिनट्स और वैकल्पिक योजना पेश नहीं की जाती, तब तक एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। मामले की सुनवाई जस्टिस पुष्पा सत्यानारायणा और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। पीठ ने स्पष्ट किया कि परियोजना स्थल पर वृक्षों की कटाई पर रोक रहेगी, लेकिन एनएचएआई पेड़ों से छेड़छाड़ किए बिना सडक़ परियोजना से जुड़े अन्य कार्य जारी रख सकता है।
सडक़ बनेगी, पर हरियाली पर फैसला बाकी
इस आदेश के बाद भोपाल में विकास बनाम पर्यावरण की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अब सबकी नजर 8 जनवरी की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि सडक़ चौड़ीकरण किस कीमत पर और किन शर्तों के साथ आगे बढ़ेगा।
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