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कैग रिपोर्ट : केन्द्र के लक्ष्य के अनुरूप मप्र में नहीं हो सका नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादन, सात सालों में 50 प्रतिशत एनआरई क्षमता भी नहीं जुटा सका मप्र
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भोपाल। नवीन एवं नवकरणीय (एनआरई) ऊर्जा स्रोतों से बिजली के उत्पादन में खुद को शीर्ष राज्यों में शामिल बता रहा मध्यप्रदेश वर्ष 2015 से 2022 के बीच 7 सालों तक एनआरई के उत्पादन के लिए केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए लक्ष्य से बहुत पिछड़ा है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने वर्ष 2025 में जारी महालेखापरीक्षा प्रतिवेदन के अनुसार मप्र वर्ष 2022-23 तक कुल उत्पादन लक्ष्य 12018 मेगावॉट की अपेक्षा कुल 5732 मेगावॉट अर्थात कुल 47.70 प्रतिशत एनआरई क्षमता ही प्राप्त कर सका।
प्रमुख पांच राज्यों से भी पिछड़ा मप्र
लेखापरीक्षा ने एमएनआरई की वेबसाइट से लिए गए डाटा के आधार पर मार्च 2023 तक की उपलब्धि की तुलना अन्य पांच प्रमुख राज्यों, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडू, राजस्थान और महाराष्ट्र के प्रदर्शन से भी की तो पाया कि इन पांच राज्यों में उपलब्धि का प्रतिशत सबसे कम 57.87 प्रतिशत महाराष्ट्र और 172.39 राजस्थान के प्रतिशत के बीच था। जो मध्यप्रदेश की तुलना में बहुत अधिक है।
देश की एनआरई में मप्र की कुल 6 प्रतिशत हिस्सेदारी
सीएजी के वर्ष 2025 में जारी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में बताया गया है कि वर्ष 2022-23 के दौरान, भारत में एनआरई स्रोतों से विद्युत उत्पादन से विद्युत उत्पादन ने भारत की कुल ऊर्जा उत्पादन में 13 प्रतिशत अर्थात कुल उत्पादन 16,24,465.61 गीगा वॉट/घंटा (जीडब्ल्यूएच) उत्पादन में से 2,03,552.68 जीडब्ल्यूएच उत्पादन का योगदान दिया। मप्र में इसी अवधि के दौरान, ईआरई स्रोतों से उत्पादित विद्युत का योगदान लगभग छह प्रतिशत अर्थात कुल 1,52,020.26 जीडब्ल्यूएच उत्पादन में से 8872.71 जीडब्ल्यूएच था।
किस स्रोत से कितना नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन
मप्र में चार स्रोतों से नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादन हुआ। इनमें मप्र को सौर ऊर्जा में 5675 मेगावॉट, पवन ऊर्जा का 6200 मेगावॉट, छोटे हाइडल से 25 मेगावॉट और बायोमास से 118 मेगावॉट मिलाकर कुल 12018 मेगावॉट एनआरआई क्षमता का लक्ष्य मिला था। इसके विपरीत 2022-23 तक सौर ऊर्जा से 2742.84, पवन ऊर्जा से 2770.85, बायोमास से 94.53 और छोटे हाइडल से कुल 94.53 के साथ कुल एनआईई उत्पादन क्षमता 5732.13 मेगावॉट दर्शाई गई।
सीएजी को परियोजना क्रियान्वयन में मिली कई कमियां
- पवन ऊर्जा परियोजना नीति, 2012 के कार्यान्वयन में कमियां
- सौर पार्क परियोजनाओं से भूमि उपयोग शुल्क की वसूली में कमी।
- ग्रिड से जुड़ी सौर रूपटॉप परियोजनाओं में भी कमियां मिलीं।
- ग्रिड से जुड़े सौर रूफटॉप के लिए एमएनआरई निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं हो सकी।
- केन्द्रीय वित्तीय सहायता योजना के अंतर्गत स्वीकृत लक्षित मात्रा की प्राप्ति नहीं हो सकी।
- ग्रिड से जुड़ी सौर रूफटॉप योजना के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन एवं ग्रिड कनेक्टिविटी में देरी, परियोजनाओं की कमीशनिंग तिथि की गलत रिपोर्टिंग आदि।
- 3 से 6 माह तक की अवधि के कामों को ठेकेदार द्वारा काम पूरा करने में 16 माह तक की देरी की।
- रूफटॉप सिस्टम की स्थापना के बावजूद नेट मीटरिंग की स्थापना में देरी हुई।
- एमएनआरई पोर्टल में परियोजनाओं के चालू होने के विवरण की गलत रिपोर्टिंंग की गई।
- केन्द्रीय वित्तीय सहायता नहीं मिल सकी अथवा देरी से मिल सकी।
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