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आठ लाख की स्टाम्प ड्यूटी की धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों पर ईओडब्ल्यू ने की एफआईआर
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- आरोपी ने जमीन विक्रेता को भी लगाया एक करोड़ का चूना
भोपाल। जबलपुर में बिना शासकीय स्टाम्प ड्यूटी चुकाए, मूल रजिस्ट्री की फोटोकॉपी के आधार पर नामांतरण करवाकर उस संपत्ति को बेचने वाले आरोपी विरूद्ध आर्थिक अपराध शाखा, भोपाल में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आर्थिक अपराध शाखा, जबलपुर को मिली थी कि आरोपियों ने 8 लाख रुपये कम स्टा्म्प डयूटी चुकाई थी, जिससे राजिस्ट्रार ने उनकी रजिस्ट्री होल्ड की थी। आरोपियों ने बिना स्टाम्प डयूटी चुकाए रजिस्ट्री की फोटो कापी के आधार पर नामांतरण करवा कर 30 नवम्बर 2019 से 8 अगस्त 2022 के बीच इस संपत्ति को आगे बेच दिया। आरोपियों ने लगभग एक करोड़ रुपये के जो चेक विक्रेता को दिए थे, वो भी बाउंस हो गये।
आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मोहम्मद आसिफ पिता अब्दुल खालिक मन्सूरी,न्यू कंचनपुर,अधारताल जबलपुर, रूपेश विश्वकर्मा पिता तुलसीराम विश्वकर्मा,फूटाताल स्कूल के पास हनुमानताल जबलपुर ने आपराधिक षड्यंत्र कर मूल विक्रय पत्र की छायाप्रति का उपयोग करधोखाधड़ी करके राजस्व को राशि 7,95,920 रुपय का नुकसान पहुंचाकर गलत तरीके से नामांतरण करवाने पर भादंवि की धाारा 420, 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में आरोपियों ने लगभग एक करोड़ रुपये के जो चेक विक्रेता को दिये वो भी बाउंस हो गये।
शिकायत की जांच में मिली यह गड़बड़ी
शिकायत जांच में ईओडब्ल्यू को पता चला कि आवेदक पुनीत रंजन यादव के पिता विक्रेता स्व. मोहनलाल यादव ने क्रेता मोहम्म्द आसिफ और रूपेश विश्वकर्मा के पक्ष में जिला जबलपुर स्थित भूमि खसरा नंबर 159/1/1व 159/2/1कुल रकबा 0.257हे. जमीन को 1,03,84000 रुपये विक्रय पत्र का पंजीयन दिनांक 30 नवम्बर 2019 को किया था। जमीन का कुल मूल्य 1,03,84000 रुपये में से 20 लाख रुपये नकद एवं शेष राशि विभिन चैकों के माध्यम से क्रेता मोहम्म्द आसिफ और रूपेश विश्वकर्मा द्वारा आवेदक के पिता मोहनलाल यादव को देना का उल्लेख विक्रय पत्र में किया गया। किन्तु आरोपियों द्वारा दिए गए सभी चेक बाउंस हो गये। आरोपी आसिफ मंसूरी,रुपेश विश्वकर्मा ने मूल विक्रय पत्र में प्रतिफल की राशि के चैक का विवरण दर्ज कर धोखाधड़ी करते हुये भूमि क्रेता के रुप से विक्रय पत्र के पंजीयन एवं स्टाम्प शुल्क में मिली कमी की राशि 7,95,920 रूपये जमा नहीं किए और मूल पंजीकृत विक्रय पत्र जारी नहीं किया। आरोपियों ने मूल विक्रय पत्र पंजीयन शुल्क के आभाव में विधि अनुरूप जारी नहीं किए जाने के बावजूद उसकी प्रति को उपयोग में लाया जाकर नायब तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत कर नामांतरण करा लिया गया। अनावेदकों के द्वारा पूर्ण पंजीयन शुल्क एवं मुद्रांक शुल्क अनावेदक आसिफ मंसूरी एवं रुपेश विश्वकर्मा द्वारा जमा नहीं किया जाकर अन्य व्यणक्तियों को भूमि बेचकर अवैध रूप से लाभ उठाया।
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