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राजधानी

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सरकारी आहार के नाम पर मरीजों से धोखा , जिला अस्पताल में मरीजों का भोजन निगल रही ठेका एजेंसी

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भोपाल। भोपाल जिला अस्पताल (जेपी) में भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले दैनिक आहार के नाम पर सरकार और मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। अधिकारियों की अनदेखी, मिलीभगत और लापरवाही से मरीजों के दैनिक आहार (डाइट) का ठेका लेने वाली एजेंसी मरीजों को अपर्याप्त, गुणवत्ताहीन और बेस्वाद भोजन परोस रही है। जबकि सरकारी भोजन नहीं लेने वाले भर्ती मरीजों के हिस्से के आहार का भुगतान भी एजेंसी को किया जा रहा है। 

जेपी में मरीजों के लिए प्रावधानित भोजन

सुबह नाश्ता-चाय 125 एमएल, 4 नग बिस्किट (मंगल/शुक्र/रविवार को 4 टोस्ट/रस्क), दूध 250 एमएल, एक प्लेट पोहा/उपमा, केला-दो नग (मंगल/शुक्र/रविवार को सौ ग्राम पपीता) 

दोपहर भोजन-सलाद 50 ग्राम, रोटी 3-4 नग (120ग्रा.) उपलब्ध हरी सब्जी- एक कटोरी (सौ ग्राम) दाल (आरहर या खड़ी मूंग) एक कटोरी (30 ग्राम) नमकीन दलिया 1 कटोरी/सौ ग्राम (मंगल/शुक्र/रविवार को सौ एक कटोरी/150 ग्राम चावल)

शाम (मध्यान्ह)- चाय एक कप (125 एमएल), चार नग बिस्किट

रात्रि भोजन- रोटी-3-4 नग, हरी सब्जी-एक कटोरी (सौ ग्राम), दाल (अरहर/खड़ी मूंग) एक कटोरी (30 ग्राम), दूध एक गिलास (250 एमएल)  

गर्भवती महिला: भोजन के अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं को 2 गुड़ मेवा के लड्डू प्रति दिन। 

ठेका एजेंसी मरीजों को जो परोस रही है


सुबह नाश्ता-चाय 50-70 एमएल, 2 रुपये कीमत पार्ले बिस्किट, दूध 100 एमएल, लगभग सौ ग्राम पोहा (प्रतिदिन नहीं)

जो नहीं दिया जा रहा- बिस्किट के स्थान पर तीन दिन टोस्ट/रस्क, केला या पपीता नहीं दिए जा रहे हैं।  

दोपहर भोजन- सलाद-खीरा/ककड़ी के 3-4 पीस, रोटी 3-4 नग, हरी सब्जी (रसेदार पत्तागोभी, लौकी या सेम)-60-70 ग्राम, दाल खड़ी मूंग (60-70 ग्राम)

जो नहीं दिया जा रहा- पत्तागोभी और सेम की सब्जियों में पर्याप्त पानी, पतली दाल नमकीन दलिया या चाबल नहीं। मिक्स सलाद के स्थान पर सिर्फ ककड़ी/खीरा के चार पीस। 

शाम (मध्यान्ह)- चाय-50-70 एमएल, 2 रुपये कीमत का पार्ले बिस्किट। 

रात्रि भोजन- रोटी-3-4 नग, हरी सब्जी-पत्तागोभी की पतली सब्जी (60-70 ग्राम), पतली दाल (60-70 ग्राम)

जो नहीं मिल रहा है- मिक्स सलाद, चाबल/नमकीन दलिया और 250 ग्राम दूध नहीं दिया जा रहा। 

गर्भवती महिला: भोजन के अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं को 2 गुड़-मेवा के लड्डू प्रतिदिन नहीं (गुणवत्ता बहुत खराब)

बर्तन नहीं तो भोजन नहीं- ठेका एजेंसी द्वारा मरीजों को थाली, चाय का कप नहीं दिया जाता। बर्तन नहीं होने पर भोजन भी नहीं। ठेका एजेंसी की प्रबंधक श्रीमती मुमतान का कहना है कि मरीज थाली चुरा ले जाते हैं, इसलिए नहीं दी जाती।  

38 रुपये कम दर पर लिया ठेका 

मरीजों के भोजन आहार (डाइट) का ठेका 1 जनवरी 2024 को कोलकाता की एजेंसी रूपा इंटरप्राइजेज ने तीन साल के लिए लिया है। प्रति मरीज, प्रतिदिन के लिए सरकारी दरें 98 रुपये थी, लेकिन एजेंसी ने 38 रुपये कम 60 रुपये प्रति दिन के हिसाब से ठेका लिया है। हालांकि भोजन की खराब गुणवत्ता या बर्तन नहीं होने के कारण आधे से अधिक मरीज यह भोजन नहीं लेते हैं। लेकिन भुगतान भर्ती मरीजों के पलंग की गिनती से होता है।  

क्या कहते हैं भर्ती मरीज

‘भोजन में कच्ची या जली हुई रोटीयां, दाल में सिर्फ पानी, पत्ता गोभी की पतली सब्जी परोसी जाती है। खाना बिलकुल भी खाने लायक नहीं है, पांच दिन में सिर्फ एक बार भोजन लिया। जिसके पास थाली या बर्तन नहीं, उसे खाना नहीं दिया जाता।’

श्रीमती सोनू द्विवेदी,मरीज निवासी-श्यामला हिल्स, भोपाल 

‘सरकारी खाना बिलकुल अच्छा नहीं होता, बच्ची और जली रोटियां, गोभी की रसेदार सब्जी मैंने कभी खाई नहीं, यहां मिलती है। सुबह आधा गिलास से कम दूध मिलता है, शाम को नहीं। सलाद के नाम पर खीरा-ककड़ी के चार टुकड़े मिलते हैं।’

सक्कू बाई, मरीज, निवासी-जवाहर चौक, भोपाल 

‘ठेका एजेंसी अगर मरीजों के आहार में किसी भी तरह की गड़बड़ी कर रही है, तो उसका टेंडर निरस्त कर नए सिरे से टेंडर बुलवाया जाएगा। वार्ड में निरीक्षण करके भी इसकी जांच करेंगे।’

संजय जैन, सिविल सर्जन सह अधीक्षक, जयप्रकाश (जिला) अस्पताल, भोपाल 

‘मरीजों को प्रतिदिन मीनू के हिसाब से डाइट देते हैं। भोजन के लिए हमारे पास थाली हैं, लेकिन छुट्टी होने पर मरीज लेकर चले जाते हैं। इसलिए थाली देते हैं। मरीज खुद के ही बर्तन में भोजन लेना पसंद करते हैं।’

श्रीमती मुमुताज खान 

जेपी अस्पताल प्रभारी, रूपा इंटरप्राइजेज, कोलकाता (ठेका एजेंसी)