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मध्यप्रदेश
चेकपॉइंट प्रभारी बन प्रधान आरक्षक करा रहे वसूली, परिवहन अधिकारियों ने अपात्र कर्मचारियों को थमा दी ‘ई-चालान आईडी’
मध्यप्रदेश
भोपाल। मप्र परिवहन विभाग में आधा दर्जन से अधिक प्रधान आरक्षक अपने अधिकारों के विपरीत चैकपोइंट प्रभारी बनकर न केवल आरटीओ की आईडी पर अवैधानिक रूप से ई-चालानी कार्रवाई कर रहे हैं, बल्कि अलग-अलग राज्यों की सीमाओं से सटे मप्र के वैकल्पिक चैकपोइंटों पर प्रायवेट कटरों से अवैध वसूली भी करा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मप्र की पांच जिलों की सीमा मार्गों पर परिवहन विभाग ने अभी प्रभारी नियुक्त नहीं किए हैं। लेकिन इन सीमाओं पर एक-एक प्रधान आरक्षक सहित आरक्षकों की नियुक्ति है। परिवहन आयुक्त के लिखित आदेश के अनुसार सहायक परिवहन उप निरीक्षक या उससे ऊपर रैंक का ही अधिकारी चालानी कार्रवाई कर सकता है। विभाग में एक भी सहायक उप निरीक्षक उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में परिवहन निरीक्षक और सहायक उप निरीक्षकों को प्रमुख चेकपॉइंटों पर पदस्थ किया है। शेष वैकल्पिक मार्गों पर प्रधान आरक्षकों की नियुक्ति है, लेकिन प्रभारी के रूप में नहीं। इन चेकपॉइंटों पर क्षेत्रीय या जिला परिवहन अधिकारी स्वयं की उपस्थिति में इस स्टाफ से वाहन रुकवा कर चालानी कार्रवाई कर सकते हैं। अनुपस्थिति में न वाहन रोके जा सकते न ही चालानी कार्रवाई की जा सकती है।
इन चैकपोइंट की कमान प्रधान आरक्षकों के हाथ
भारत रावत: चेकपॉइंट शिवपुरी-कोटा (खरई पड़ोरा) राजस्थान सीमा
संतोष तोमर: चेकपॉइंट श्योपुर-1 और श्योपुर-2, (नहर-समरथा) श्योपुर-कोटा एवं श्योपुर-सवाई माधौपुर मार्ग
राजेश वर्मा : चेकपॉइंट अलीराजपुर-1 (गुजरात सीमा पर अलीराजपुर-छोटा उदयपुर रोड़)
महेश माझी : चेकपॉइंट गुना-1 (कुंअरथाना) मनोहर थाना-बीनागंज रोड, राजस्थान सीमा
लाखन इंडपांचे : चेकपॉइंट निवाड़ी-1 और निवाड़ी-2 (रानीगंज-तिलेंगा) निवाड़ी-झांसी रोड़ उप्र सीमा
राजेश तोमर: चेकपॉइंट भिण्ड-1 (इटावा-ग्वालियर रोड) उप्र सीमा
वसूली में व्यवस्था में कई नेताओं के परिजन-रिस्तेदार
परिवहन विभाग में अवैध वसूली व्यवस्था में सबसे ज्यादा नेताओं के परिजन और रिस्तेदार कमान संभाले हैं। चैकपोइंटों पर अधिकांश नियुक्तियां भी नेताओं की शिफारिश हो रही हैं। आरटीआई, टीएसआई, प्रधान आरक्षक और आरक्षक तक की चेकपॉइंट पर नियुक्ति के लिए भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य दलों के कई बड़े नेता अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। कई नियुक्तियां विभागीय मंत्री के माध्यम से भी कराई गई हैं।
कार्रवाई होने पर नेताओं का संरक्षण
चेकपॉइंटों पर अवैध वसूली और अनियमितताओं की शिकायत पर परिवहन आयुक्त संबंधित चेकपॉइंट प्रभारियों पर सीधी कार्रवाई करते हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश स्वयं मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने दिए हैं। लेकिन चेकपॉइंट पर पदस्थ जिन प्रभारियों को नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, उन्हें सिफारिश के माध्यम से बार-बार बचाया जा रहा है। विगत 4-5 महीनों में दतिया जिले के चिरुला चैकपॉइंट पर अवैध वसूली के फेर में कई सडक़ दुर्घटनाएं हुई हैं। कुछ लोगों की मौत भी हुई है। विगत 22 सितम्बर को हुई भीषण सडक़ दुर्घटना के बाद ट्रक चालकों ने राजमार्ग पर जाम लगाया तो एसपी-कलेक्टर भी मौके पर पहुंचे थे । चेकपॉइंट प्रभारी को दोषी मानते हुए विभागीय मंत्री के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई होने ही वाली थी, लेकिन प्रदेश स्तर के एक नेता की सिफारिश से दोषी चेकपॉइंट प्रभारी पर कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी चेकपॉइंट पर हाल में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन वसूली के बंदरबांट के फेर में चेकपॉइंट से सटे चिरूला थाने की पुलिस चेकपॉइंट प्रभारी, कर्मचारियों और वसूलीखोर प्रायवेट कटर को बचाती रही है।
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