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संतानों में जागृत करें संघ के पंच परिवर्तन का भाव, समिधा बस्ती के विराट हिन्दू सम्मेलन पं. प्रदीप मिश्रा ने दिए आशीर्वचन
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भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले सौ सालों से हिन्दुओं को एकजुट कर स्वयं के साथ राष्ट्र और समाज की रक्षा की शिक्षा दे रहा है। हिन्दू एकजुट करने का मतलब आप राष्ट्र के लिए कितने समर्पित हैं, इस भाव का जागरण आपके मन में हो। माताएं अपनी संतानों, परिवार में संघ के पंच परिवर्तन का भाव जागृह करें, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य के बोध से जुड़े भाव शामिल हैं। यह बात राजधानी भोपाल की समिधा बस्ती, महावीर नगर (ओल्ड कैम्पियन क्रिकेट स्टेडियम) में सकल हिन्दू समाज द्वारा आयोजित विराट हिन्दू सम्मेन में संबोधित करते हुए कुबेरेश्वर धाम, सीहोर के सुविख्यात कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कही।
वोट बैंक के लिए बांटी जा रहीं चार बेलें
चार संगठित बैलों के बीच फूट डालकर शेर द्वारा मार डालने की कहानी सुनाते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि हमारे समाज में वे चार संगठित बैल ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं, जिन्हें वोट बैंक के लिए बांटा जा रहा है। लोग हमें बांटने और तोडऩे में लगे हैं। दुनिया के लोग हमें जातियों और ऊंच-नीच में बांटने के लिए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि गाय घर में पाली जाती थी इसलिए पहले गौशाला नहीं थी, बुजुर्गों का सम्मान होता था इसलिए वृद्धाश्रम नहीं थे, हिन्दू एकजुट था, इसलिए जनजागरण के लिए हिन्दू सम्मेलनों की जरूरत भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी मोबाइल में समय बर्वाद कर रही है। इसलिए उसके पास राष्ट्र के बारे में सोचने का समय नहीं है। संघ जगाने, समझाने आया है। जाग जाओ नहीं तो फिर कोई अंग्रेज या विधर्मी आएगा और तुम्हें गुलाम बनाकर जूते के नीचे रखेगा। शताब्दी वर्ष में संघ जगाने निकला है। हिन्दू सोता रहातो एक बार फिर मुगलों का शासन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब आगजनी, भूकंप जैसी आपदा आती है तो संघ के स्वयंसेवक ही सेवा के लिए सामने आते हैं।
परिवार को प्रबल-प्रखर बनाने में माँ का योगदान
पं. मिश्रा ने कहा कि कई असुर आपको बर्वाद करने में लगे हैं। समाज को, बच्चों को प्रखर और प्रबल बनाने में एक स्त्री, एक माँ का योगदान महत्वपूर्ण है।सनातन धर्म कहता है कि एक स्त्री घर-परिवार को राष्ट्र-हिन्दुत्व से जोड़ सकत है। माँ जब भी भोजन बनाए, परिवार के लोग साथ बैठकर भोजन करें, उस समय पंच परिवर्तन के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
संस्था नहीं, संघ समाज परिवर्तन का ग्रंथ: विस्पुते
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह वौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने कहा कि संघ एनजीओ या संस्था नहीं है। यह समाज का संगठन है जो सौ सालों से समाज जागरण के अभियान में जुटा है। उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन के भाव को स्पष्ट किया। सामाजिक समरसता को स्पष्ट करते हुए श्री विस्पुते ने कहा कि हमें भेदभाव की खाई को पाटना है, यह हमारे पतन का कारण है। हिन्दू-हिन्दू भाई-भाई हमारे स्वभाव में हो। कुटुम्ब प्रबोधन पर उन्होंने कहा कि हम एक हजार साल विधर्मियों से बचते रहे। आज भी आपके बच्चों का मानसिक अपहरण हो चुका है। वे भौतिक रूप से आपके हैं, लेकिन उनके साथ माइंड गेम कोई और खेल रहा है। इसलिए बच्चों को राम-कृष्ण, महापुरुषों, वीरों की गाथाएं सुनाएं। परिवार में मूल्यों की स्थापना करें। बच्चों को संस्कारों की शिक्षा दें। कुटुम्ब प्रबोधन करें। पर्यावरण संरक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि पानी की बचत करें, पेड़ लगाएं और प्लास्टिक, डिस्पोजल के उपयोग नहीं करें। स्वदेशी आचरण को लेकर श्री विस्पुते ने कहा कि संविधान के बारे में विचार करें, उसका अक्षरश: पालन करें। नागरिक कर्तवयों पर कहा कि बिजली, पानी के अनावश्यक व्यय को राकें, राष्ट्र और समाज के लिए अपने कर्तव्यों को समझें और स्व की अभिव्यक्ति का बोध करें। स्वदेश, स्वधर्म और स्वराज्य का भाषा, भूषा, भोजन, भ्रमण, भजन और भ्रमण को हर समय ध्यान में रखें। स्वदेशी का भाव परिवार में लागू करें। ये ध्यान रखें कि राष्ट्रीय यज्ञ में हमारी समिधा भी समर्पित हो।
सत्ता या पार्टी बदलने से देश नहीं बदलता
श्री विस्पुते ने जापान में नागरिकों की राष्ट्रभक्ति के उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे देश में देशभक्ति के भाव के जागरण की आवश्यकता है। सत्ता या पार्टी बदलने से कुछ नहीं होगा। देश बदलना है तो नागरिकों में देशाब्ध जागरण की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके वैचारिक संगठन वर्षों से पंच परिवर्तन के काम में जुटे हैं।
देश भक्ति के जागरण में जुटा है संघ
श्री विस्पुते ने कहा कि सामज में देशभक्ति और संगठन का अभाव है। व्यक्ति निर्माण के काम में जुटा संघ लगातार जनजागरण कर रहा है। देश तभी आगे बढ़ता है, जब समाज आगे बढ़ता है। इसलिए संघ सौ सालों से देशभक्ति के जागरण में लगा है। संघ का मानना है कि समाज नहीं बदलेगा तो देश नहीं बदलेगा, देश को बचाना है तो जन-जन में देशभक्ति का जागरण करना होगा। संगठन हमारा स्वभाव बनना चाहिए।
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