अपराध

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फर्जी दस्तावेजों से संस्था के नाम पर कराई निजी भूमि, धोखाधड़ी करने वाले पदाधिकारियों पर ईओडब्लू ने की एफआईआर

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भोपाल। भोपाल जिले के ग्राम खुदागंज, तहसील हुजूर में स्थित खसरा नंबर 84 की कुल 5.50 एकड़ भूमि की कूटरचित रजिस्ट्रियां कराकर निजी व्यक्तियों की भूमि को राजस्व रिकार्ड में अवैध रूप से अपनी संस्था पुष्प मयूर गृह निर्माण सहकारी संस्था के नाम पर दर्ज कराने वाले संस्था पदाधिकारियों सहित अन्य लोगों विरुद्ध ईओडब्ल्यू ने अपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी एवं कूटरचना किए जाने की धाराओं में अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। 

इस मामले की शिकायत फरियादी अमानउल्ला पुत्र दिवंगत कैप्टन असद उल्ला खान ने की थी। शिकायत में बताया गया था कि पुष्प मयूर गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, भोपाल के अध्यक्ष नवाब खान एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी निजी भूमि को अवैध रूप से संस्था के नाम पर पंजीकृत करा लिया है। ईओडब्ल्यू ने जांच में पाया कि नवाब खान, पिता मोहम्मद खान, निवासी रेतघाट भोपाल ने रामनिवास शर्मा एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत मूल भू-स्वामियों के साथ धोखाधड़ी की और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भूमि संस्था के नाम दर्ज कराई। जांच में यह भी पाया गया कि रजिस्ट्रियों से भिन्न रकबों का नामांतरण कराकर संस्था के 29 गैर-सदस्यों को सदस्य बताकर अवैध रूप से भूखंडों का विक्रय किया।  सहकारिता विभाग को जानबूझकर कोई जानकारी नहीं दी गई, मुद्रांक शुल्क की छूट का दुरुपयोग किया गया तथा बिना टीएनसीपी की अनुमति फर्जी लेआउट के आधार पर सभी 29 भूखंडों को आवासीय बताकर बेच दिया गया। जांच में अपराध प्रमाणित पाए जाने पर नवाब खान, रामनिवास शर्मा एवं अन्य अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468 एवं 471 के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

5.50 एकड़ भूमि में की हेराफेरी 

ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि ग्राम खुदागंज, तहसील हुजूर, जिला भोपाल स्थित खसरा नंबर 84 का कुल रकबा 13.25 एकड़ था। यह भूमि वर्ष 1980/81 से राजस्व रिकॉर्ड में अमान उल्ला खान, जफर उल्ला खान, नासिर मोहम्मद खान, रहमान उल्ला खान (सभी पुत्र दिवंगत असद उल्ला खान) एवं जाहिदा खातून, पत्नी दिवंगत असद उल्ला खान के नाम पर दर्ज थी। यह भूमि संयुक्त स्वामित्व में थी और किसी भी प्रकार का संपूर्ण विक्रय या हस्तांतरण उस समय तक दर्ज नहीं था। इस13.25 एकड़ भूमि में से 5.70 एकड़ भूमि का विक्रय भू-स्वामी पहले ही कर चुके थे। इसमें से 5 एकड़ भूमि माहिर मियां एंड कंपनी को तथा 0.70 एकड़ भूमि पी.सी. श्रीवास्तव को बेची गई थी। इसके बा शेष 7.55 एकड़ भूमि राजस्व रिकॉर्ड में पुन: मूल भू-स्वामियों के नाम पर दर्ज थी और उस पर किसी संस्था या अन्य व्यक्ति का कोई वैध अधिकार नहीं था। शेष 7.55 एकड़ भूमि में से केवल 2.05 एकड़ भूमि ही वर्तमान में मूल भू-स्वामियों के नाम दर्ज है, जबकि शेष 5.50 एकड़ भूमि पुष्प मयूर गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, भोपाल के नाम पर दर्ज दिखाई गई। यह नामांतरण मूल भू-स्वामियों की जानकारी एवं सहमति के बिना, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कराया गया था।

तीन विक्रय पत्रों से बिकी भूमि 

जांच में पता चला कि वर्ष 1985 में तीन अलग-अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से 5.50 एकड़ भूमि को संस्था के नाम पर खरीदा जाना दिखाया गया। इनमें दो विक्रय पत्रों में 2-2 एकड़ तथा एक में 1.50 एकड़ भूमि का उल्लेख किया गया।इन रजिस्ट्रियों में दर्शाए गए भू-स्वामियों ने अपने हस्ताक्षर होने से साफ इंकार किया है। प्रारंभिक जांच में सभी विक्रय पत्रों पर हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग एक जैसी पाई गई। रजिस्ट्रियों में दर्शाया गया कि भू-स्वामी जफर उल्ला खान ने अपने पिता असद उल्ला खान को पॉवर ऑफ अटॉर्नी दी थी। जबकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जफर उल्ला खान द्वारा ऐसी कोई पॉवर ऑफ अटॉर्नी दी ही नहीं गई थी।

रिकार्ड में कृषि भूमि, आवासीय भूमि के बने प्लान

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि भूमि आज भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद उस पर आवासीय कॉलोनी दर्शाते हुए तीन अलग-अलग लेआउट प्लान तैयार किए गए।इन लेआउट प्लानों को किसी भी सक्षम प्राधिकारी या नगर एवं ग्राम निवेश (टीएनसीपी) से स्वीकृति नहीं मिली थी। फिर भी इन्हीं फर्जी लेआउट के आधार पर भूमि को आवासीय भूखंड बताकर विक्रय किया गया। इन अवैध लेआउट प्लानों के माध्यम से शासन को जानबूझकर आर्थिक हानि पहुंचाई गई, क्योंकि अनुमति और शुल्क के बिना कॉलोनी विकास दिखाकर सरकारी राजस्व से बचने का प्रयास किया गया।